75वाँ सत्र: नेपाल ने कहा, असाधारण दौर से गुज़रती दुनिया में बहुपक्षवाद है कुंजी

25 सितम्बर 2020

नेपाल के प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा है कि मानवता को शान्ति व समृद्धि की दिशा में आगे ले जाने के लिये सहयोग व एकजुटता की भावना बेहद अहम है. उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने और संयुक्त राष्ट्र को मज़बूत बनाने का दायित्व सदस्य देशों पर है.

प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली ने शुक्रवार को जनरल डिबेट के लिये भेजे गए वीडियो सन्देश में कहा कि दुनिया इस समय एक असाधारण दौर से गुज़र रही है. मौजूदा कोरोनावायरस संकट का सार्वजनिक स्वास्थ्य, आजीविकाओं, समाजों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर हुआ है.  

उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वास्थ्य संकट पर पार पाने के लिये एक किफ़ायती वैक्सीन तक सभी की पहुँच आसान बनानी होगी, ज्ञान व अनुभव साझा करने होंगे और मेडिकल उपकरणों व सामग्री की सामयिक आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी.

“भू-राजनैतिक तनाव फिर उभर रहे हैं. दुनिया के अनेक हिस्सों में शान्ति व स्थिरता अब भी एक अपूर्ण आकाँक्षा है.”

उन्होंने कहा कि “हथियारों की दौड़, जलवायु परिवर्तन व त्रासदियाँ जैसी चुनौतियाँ शान्ति व टिकाऊ विकास की सम्भावनाओं में अवरोध बन रही हैं. इस अदृश्य वायरस ने इन व्याधियों की गम्भीरताओं को और उजागर किया है.”

प्रधानमन्त्री ओली ने व्यापार तनावों, वैश्विक विषमता, वित्तीय अनिश्चितता और क़र्ज़ संकट पर चिन्ता जताई.

बहुपक्षवाद पर ज़ोर 

नेपाल के प्रधानमन्त्री ने वर्तमान परिस्थितियों में अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता को बेहद अहम बताया, विशेषत: एक ऐसे दौर में जब अन्तरराष्ट्रीय व्यवस्था अनिश्चितताओं से घिरी है. 

उन्होंने कहा कि एकतरफ़ा मंशाओं और संरक्षणवादी नीतियों की गाज बहुपक्षीय सहयोग पर गिरी है लेकिन उसका मूल्य व प्रासंगिकता पहले से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है. 

“संकीर्ण राष्ट्रीय हितों के बजाय  वैश्विक कल्याण को बहुपक्षवाद और नियम आधारित व्यवस्था के आधार में रखना होगा.”

प्रधानमन्त्री ओली ने ध्यान दिलाते हुए कहा कि रचनात्मक, लोकतान्त्रिक, विज्ञान आधारित और वैश्विक साझीदारियों के ज़रिये ही कठिन दौर से उबरा जा सकता है. 

नेपाल के प्रधानमन्त्री ने चिन्ता जताई है कि कोरोनावायरस संकट के कारण टिकाऊ विकास के 2030 एजेण्डा की दिशा में अब तक हुई प्रगति के खोने का जोखिम पैदा हो गया है.

उन्होंने कहा कि मौजूदा विषमताओं को और भी ज़्यादा गहरा होने से रोकने के लिये, टिकाऊ विकास लक्ष्यों को, कार्रवाई व पुनर्बहाली के आधार में रखते हुए सबसे कमज़ोर तबकों तक पहुँचना होगा. 

संकटों में घिरी मानवता

प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि मानवता हथियारों की दौड़ की एक बड़ी क़ीमत चुका रही है. उनके मुताबिक सैन्य शक्ति बढ़ाने के बजाय वित्तीय संसाधनों का इस्तेमाल ग़रीबी व भुखमरी से निपटने में किया जा सकता है. 

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज परमाणु हथियारों के बजाय कोविड-19 वैक्सीन को सुलभ बनाना ज़्यादा अहम है. 

“दुनिया को मास्क की ज़रूरत है, बन्दूकों की नहीं; ज़्यादा सुरक्षा उपकरणों की ज़रूरत है, विनाशकारी हथियारों की नहीं; और जीवन बचाने के लिये ज़्यादा सामाजिक ख़र्च की ज़रूरत, ना कि जीवन तबाह करने के लिये सैन्य ख़र्चों की.”

प्रधानमन्त्री ओली ने कहा कि जलवायु संकट अब भी अस्तित्व के लिये एक ख़तरा बना हुआ है और बड़े कार्बन उत्सर्जक देशों की चुप्पी से ज़िम्मेदारियों को विफल नहीं होने देना चाहिये.

इस सम्बन्ध में उन्होंने पेरिस समझौते को पूर्ण व प्रभावी ढँग से लागू किये जाने का आहवान करते हुए स्फूर्तिवान जलवायु कार्रवाई और उसके लिये वित्तीय संसाधनों की सुलभता की पुकार लगाई है. 

“हमें मानवता की साझा विरासत को संरक्षित रखना होगा.”

 

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