समय के संकेत: कोविड से निपटने व पुनर्बहाली उपायों में सभी की भागीदारी हो

23 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वर्ष 2020 का अन्तरराष्ट्रीय संकेत भाषा दिवस एक ऐसी महामारी के दौर में मनाया जा रहा है जिसने दुनिया भर में हर कहीं आम जीवन को उलट-पलट कर रख दिया है, प्रभावितों में बधिर समुदाय भी शामिल है.

यूएन महासचिव ने इस दिवस के लिये दिये अपने सन्देश में यह कहते हुए अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि कुछ देशों में कोविड-19 के बारे में सूचना व सार्वजनिक स्वास्थ्य उदघोषणाएँ राष्ट्रीय संकेत भाषाओं में भी मुहैया कराई जा रही हैं.

और उन्होंने अपनी वो पुकार फिर दोहराई है कि कोविड-19 का सामना करने की कार्रवाई और पुनर्बहाली उपायों में सबकी भागीदारी होनी चाहिये.

विकलाँगता रणनीति

महासचिव ने जानकारी देते हुए कहा कि वर्ष 2019 में यूएन विकलाँगता समावेशिता रणनीति शुरू की गई थी जिसका मक़सद “जो भी कुछ हम करते हैं, यहाँ तक कि संकटों के दौर में भी”, उन सभी गतिविधियों में विकलाँगता वाले व्यक्तियों का पूर्ण समावेश, सार्थक भागीदारी और सहभागिता मज़बूत करना है.

उन्होंने कहा कि किसी को भी पीछे नहीं छोड़ देने का जो केन्द्रीय वादा एजेण्डा 2030 में किया गया है, उसे पूरे करने के लिये “यही एक मात्र रास्ता” है.

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महासचिव ने कहा “इस अन्तरराष्ट्रीय संकेत भाषा दिवस पर, मैं तमाम स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक नेताओं का आहवान करता हूँ कि वो संकेत भाषाओं और संस्कृतियों की विविधता को संरक्षित करने के साथ-साथ ज़ोर-शोर से बढ़ावा दें. ताकि हर एक बधिर व्यक्ति समाज को अपना योगदान देने की गतिविधियों में भरपूर तरीक़े से भागीदारी कर सकें, और अपनी पूर्ण सम्भावनाओं का विकास कर सकें.”

300 विभिन्न संकेत भाषाएँ

बधिर लोगों के विश्व महासंघ के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 7 करोड़ 20 लाख लोग 300 विभिन्न संकेत भाषाओं का प्रयोग करते हैं, इनमें से 80 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी विकासशील देशों में बसती है.

संयुक्त राष्ट्र का ख़याल है कि अन्तरराष्ट्रीय संकेत भाषा दिवस बधिर लोगों व संकेत भाषाओं का प्रयोग करने वाले अन्य लोगों की भाषाजनक पहचान व सांस्कृतिक विविधता की संरक्षा और उसे बढ़ावा देने के लिये एक अनूठा अवसर प्रदान करता है.

UN Photo/Manuel Elias
ऐक्टर डैरिल मिशेल( बैठे हुए) एक विशेष कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए

विश्व संगठन का ये भी ख़याल है कि संकेत भाषाएँ पूरी तरह से विकसित व पूर्ण प्राकृतिक भाषाएँ हैं, जो बोली जाने वाली भाषाओं से, ढाँचागत रूप में कुछ अलग हैं.

एक अन्तरराष्ट्रीय संकेत भाषा भी है जिसका इस्तेमाल बधिर व्यक्ति अन्तरराष्ट्रीय बैठकों में और अन्तरराष्ट्रीय यातायात व सामाजिक मेल-मिलाप के लिये करते हैं. इसे संकेत भाषा का एक रूप माना जाता है जो बहुत जटिल नहीं है और उसकी शब्दावली भी संक्षिप्त है.

वैश्विक चुनौतियाँ

बधिर व्यक्तियों का विश्व महासंघ वर्ष 2020 के अन्त में स्थानीय, राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर के नेताओं द्वारा संकेत भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिये एक वैश्विक नेतृत्व चुनौती कार्यक्रम जारी करेगा.

इसमें हर देश में बधिर लोगों के राष्ट्रीय संगठन और बधिर लोगों के नेतृत्व वाले संगठनों की भी भागीदारी रहेगी.

 

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कोविड-19: ‘जवाबी कार्रवाई में विकलांग व्यक्तियों का भी रखें ध्यान’

दुनिया की कुल आबादी का लगभग 15 फ़ीसदी हिस्सा यानि क़रीब एक अरब लोग विकलांगता के साथ जीवन गुज़ारते हैं. कोविड-19 संकट से उपजे हालात में विश्व आबादी के इस बड़े हिस्से को ज़रूरी मदद और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में मुश्किलें पेश आ रही हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को एक रिपोर्ट पेश की है जिसमें महामारी से निपटने की कार्रवाई में विकलांगों का समावेश सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है. 

विकलांगों का समावेशन उनका 'बुनियादी मानवाधिकार'

विकलांगता के शिकार लोगों के अधिकारों को वास्तविकता में अमल में लाना न्यायसंगत है और हमारे साझा भविष्य में व्यावहारिक निवेश भी है. विकलांग  व्यक्तियों के अधिकारों पर हुई संधि के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यूएन महासचिव ने विकलांगों के समावेशन को टिकाऊ विकास एजेंडे की दृष्टि से भी अहम बताया.