यूएन75 संवाद: दस लाख लोगों ने प्रकट कीं भविष्य के प्रति आशाएँ व आकाँक्षाएँ

21 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की 75वीं वर्षगाँठ के अवसर पर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के सन्दर्भ में लोगों से उनकी राय और सुझावों के जानने के लिये व्यापक स्तर पर सम्पन्न हुए एक अभूतपूर्व सर्वेक्षण के नतीजे जारी कर दिये गए हैं. जनवरी 2020 में शुरू हुए इस सर्वे में विकसित व विकासशील देशों में जीवन के हर क्षेत्र से जुड़े लोगों, महिलाओं, पुरुषों, लड़कों, लड़कियों ने भविष्य के प्रति अपनी आकाँक्षाएँ, आशाएँ और आशंकाएँ प्रकट कीं और बताया कि संयुक्त राष्ट्र इस कार्य में उनकी किस तरह मदद कर सकता है. 

देश, पृष्ठभूमि, आयु और लिंग सम्बन्धी भिन्नताओं के बावजूद इस क़वायद में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों में भविष्य के प्रति दूरदृष्टि में असाधारण एकजुटता दिखाई दी है.  

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रकाशित इस रिपोर्ट के पाँच मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

1) बेहतर बुनियादी सुविधाएँ

पूरी दुनिया इस समय कोविड-19 महामारी की चपेट में है इसलिये यह हैरानी की बात नहीं है कि इस सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले लोगों की तात्कालिक प्राथमिकता बेहतर बुनियादी सेवाओं तक बेहतर पहुँच का होना है. इनमें स्वास्थ्य देखभाल, जल, साफ़-सफ़ाई और शिक्षा सम्बन्धी सेवाएँ हैं. 

अनेक लोगों का मानना है कि शिक्षा और महिला अधिकारों के क्षेत्रों में स्थिति अन्तत: सुधरेगी.  

महामारी के फैलाव को रोकने के लिये तालाबन्दी और अन्य पाबन्दियों के दौरान भी यह सर्वेक्षण जारी रहा. 

मैक्सिको के एक प्रतिभागी का कहना है: “वायरस ने रोज़गार, आपसी बातचीत, शिक्षा और शान्ति के मौक़े छीन लिये हैं. हर जगह डर व्याप्त है और लोग इन हालात का सही से सामना नहीं कर पा रहे हैं.”

2) अधिक अन्तरराष्ट्रीय सहयोग

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक कोविड-19 महामारी ने असरदार और किफ़ायती वैक्सीन विकसित करने, और उसके उत्पादन व वितरण के लिये अन्तरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया है ताकि धनी और निर्धन, सभी देश इसका लाभ उठा सकें. 

UNDP Afghanistan
अफ़ग़ानिस्तान में एक स्वास्थ्य सुविधा केन्द्र पर सोलर पैनल.

यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने के लिये किये जा रहे प्रयासों का हिस्सा है – साझा बेहतरी के लिये देशों का सहयोगपूर्ण ढँग से काम करना. 

सर्वेक्षण के नतीजे दर्शाते हैं कि कुल दस लाख प्रतिभागियों में से बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रयासों को अच्छा बताया है. 87 फ़ीसदी लोगों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता अहम है और कोविड-19 संकट ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया है. 

अल्बानिया के एक प्रतिभागी ने साझा सामाजिक दायित्व की अहमियत को रेखांकित किया: “यह बेहद अहम होगा कि पुनर्बहाली की प्रक्रिया को मानवता की भावना के आधार पर आगे बढ़ाया जाये. इस महामारी से हमने सबक़ सीखा है कि कोई भी इनसान तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक सभी लोग सुरक्षित नहीं है.”

3) जलवायु कार्रवाई

वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी पर रोक लगाने, जलवायु परिवर्तन की रोकथाम करने और प्राकृतिक पर्यावरण की तबाही पर विराम लगाने में विश्व समुदाय अभी सफल नहीं हो पाया है. बड़ी संख्या में लोगों ने इस विकराल चुनौती को अपनी मध्यमकालीन और दीर्घकालीन चिन्ताओं में शुमार किया है.  

अन्य दीर्घकालीन चिन्ताओं के रूप में ग़रीबी, सरकारी स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार, सामुदायिक हिंसा और बेरोज़गारी का उल्लेख किया गया. 

चीन से एक युवा प्रतिभागी ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से हर कोई प्रभावित है: “पर्यावरणीय प्रदूषण के कारण मौजूदा वैश्विक जलवायु परिवर्तन से व्यक्तियों और जनसमूहों के लिये जोखिम बढ़ रहा है.”

4) यूएन के साथ नज़दीकी सहयोग की दरकार

हर 10 में से छह प्रतिभागियों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया को बेहतर बनाया है और 74 फ़ीसदी लोगों के मुताबिक वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढँग से मुक़ाबला करने के लिये यूएन का होना ज़रूरी है.  

© UNICEF/Delil Souleiman
यूनीसेफ़ की टीम सीरिया में हिंसा प्रभावित लोगों तक विभिन्न रूपों में सहायता पहुँचा रही है.

लेकिन सर्वेक्षण में हिस्सा लेने वाले आधे से ज़्यादा प्रतिभागियों को संयुक्त राष्ट्र के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है और वे इसे अपने जीवन से दूर पाते हैं.  

अनेक प्रतिभागियों ने एक युवा परिषद के गठन की सिफ़ारिश की है ताकि संयुक्त राष्ट्र अधिकारियों को सुझाव और परामर्श मुहैया कराया जा सकें. 

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ब्राज़ील के एक प्रतिभागी ने क्षेत्रीय व स्थानीय स्तर पर यूएन द्वारा अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का सुझाव दिया है. “संयुक्त राष्ट्र क्षेत्रीय व स्थानीय पक्षकारों के साथ और भी ज़्यादा नज़दीकी के साथ काम कर सकता है. भविष्य में निवेश करते हुए ऐसे औज़ार व संसाधन प्रदान किये जा सकते हैं जिनसे सामाजिक कार्यकर्ताओं की स्वायत्तता को बढ़ावा मिलता हो.”

5) एक बेहतर भविष्य में विश्वास 

भावी जीवन के मसले पर बुज़ुर्गों की तुलना में युवा प्रतिभागियों, विशेषत: विकासशील देशों के प्रतिभागियों में आशावाद की झलक ज़्यादा मिलती है. मध्य और दक्षिणी एशिया व सब-सहारा अफ़्रीका के प्रतिभागियों में योरोप और उत्तर अमेरिका के प्रतिभागियों की अपेक्षा आशावाद ज़्यादा है.   

जापान में एक 17 वर्षीय छात्र ने बताया: “कोई भी शक्तिहीन नहीं है.” 

संयुक्त राष्ट्र सर्वेक्षण से जुड़े कुछ तथ्य व आँकड़े:

- यूएन के सभी 193 सदस्य देशों में से प्रतिभागियों ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया
- महिलाओं और पुरुषों की लगभग समान संख्या में भागीदारी रही 
- 51 प्रतिशत प्रतिभागियों की उम्र 30 वर्ष से कम थी
- 30 फ़ीसदी प्रतिभागी मध्य और दक्षिणी एशिया से थे
- सब-सहारा अफ़्रीका से 30 प्रतिशत और योरोप से 15 फ़ीसदी ने हिस्सा लिया

दस लाख आवाज़े किस तरह सुनी गईं

  • यूएन75 शीर्षक वाले एक मिनट के सर्वे (https://un75.online/?lang=hin) के ज़रिये ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुँचने की कोशिश हुई. यह सर्वेक्षण अब भी 64 भाषाओं में उपलब्ध है.
  • सर्वे के दौरान इण्टरनैट की पहुँच से दूर लोगों से सम्पर्क साधना भी सुनिश्चित किया गया. इसके तहत ऑफ़लाइन माध्यमों, जैसेकि मोबाइल ऐप, एसएमएस और अन्य ज़रियों से सर्वेक्षण कराया गया.
  • फ़ोन और निजी सम्पर्क के ज़रिये भी लोगों से उनकी राय के बारे में पूछा गया.

 

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