भारत के रेलवे नैटवर्क को हरित करने की मुहिम

10 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रन (UNEP) भारत में रेलवे नैटवर्क को हरित बनाने की मुहिम में क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के ज़रिये अहम योगदान दे रहा है. भारतीय रेलवे की गिनती दुनिया के विशालतम रेलवे बुनियादी ढाँचों में होती है जो हर दिन करोड़ों लोगों को सेवाएँ मुहैया कराता है.

भारतीय रेल नैटवर्क दुनिया में सबसे बड़ा और विस्तृत रेलवे नेटवर्क है जिसमें हर साल 8 अरब से अधिक लोग यात्रा करते हैं.

लेकिन हर साल करोड़ों लोगों को लाखों किलोमीटर की यात्रा मुहैया कराना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है - इसके लिये भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, भले ही दूसरे वाहनों की तुलना में यात्रियों का प्रतिमील कार्बन उत्सर्जन बहुत कम हो.

भारत में ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन (Biennial Update Report to UNFCCC 2018) में परिवहन क्षेत्र का लगभग 12% हिस्सा है, जिसमें रेलवे का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा है.

भारत सरकार ने परिवहन से उपजे उत्सर्जन को कम करने के मक़सद से भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता को 2015 के लगभग 35 प्रतिशत की तुलना में 2030 तक 45 प्रतिशत करने की प्रतिबद्धता जताई है.

भारत सरकार रेलवे को हरित बनाने पर काम कर रही है. फिलहाल रेलवे के आधे से अधिक नैटवर्क विद्युतीकृत हैं और अगले 3-4 वर्षों में सम्पूर्ण नेटवर्क का विद्युतिकरण करने का लक्ष्य है.

विद्युतिकरण के ज़रिये अधिक उत्सर्जन वाले डीज़ल इंजनों के बदले, एक बेहतर केन्द्रीय व कुशल विद्युत प्रणाली स्थापित की जाएगी.

भारतीय रेलवे ने जुलाई 2020 में यह भी घोषणा की कि 2030 तक राष्ट्रीय परिवहन प्रणाली पूरी तरह शून्य कार्बन उत्सर्जक हो जाएगी.

मतलब ये कि इससे हर साल 75 लाख टन कार्बनडाइ ऑक्साइड उत्सर्जन ख़त्म होगा – जो लगभग दो कोयला बिजली संयन्त्रों के उत्सर्जन के बराबर कहा जा सकता है.

विकास व रेलवे क्षमता

भारत के रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने कहा, "आर्थिक विकास और बढ़ती खपत के कारण संसाधनों की मांग भी बढ़ रही है. हमें स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय चिन्ताओं का भी ध्यान रखना होगा."

"भारतीय रेलवे ने ऊर्जा दक्षता में सुधार लाने और 2030 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लिये जीवाश्म ईंधन स्रोत हटाकर सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अपनाने की मुहिम शुरू की है."

ESCAP Photo/Bhar Sudip
भारत में रेलगाड़ी करोड़ों लोगों के लिये सस्ता व सुलभ यातायात साधन है मगर रेलगाड़ियों में अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा भीड़ रहती है क्योंकि ज़रूरत के अनुसार रेलगाड़ियाँ उपलब्ध नहीं हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने लम्बे समय से भारतीय रेलवे के प्रयासों का समर्थन किया है.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने जुलाई 2020 में  स्थिरता और हरित अर्थव्यवस्था पर भारतीय रेलवे प्रबन्धन व कर्मचारियों के लिये एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम का नेतृत्व किया.

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था अकादमी के सहयोग से यूएनईपी की ‘हरित अर्थव्यवस्था के लिये कार्रवाई की भागीदारी’ के तहत उस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.

सप्ताह भर के प्रशिक्षण में 60 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर, भारतीय रेलवे में सतत सार्वजनिक ख़रीद, हरित भवन, कूड़ा प्रबन्धन और जैव विविधता व हरित पहलों में जैव-विविधता व संरक्षण को शामिल करने के तरीक़े सीखे.

प्रतिभागियों में उच्च-अधिकारियों से लेकर प्रवेश स्तर तक के अधिकारी शामिल थे. साथ ही प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की जो आगे जाकर प्रशिक्षक बनेंगे.

यह पहली बार है जब इतनी बड़ी और अधिक मात्रा में कार्बन फुटप्रिण्ट छोड़ने वाले संगठन (भारतीय रेलवे) के लिये इस प्रकार का वर्चुअल संवादात्मक प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है.

हरित रेलवे की पहल

भारत में संयुक्त रष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख अतुल बगई ने कहा, “भारत का रेल नैटवर्क लम्बे समय से देश के सामाजिक ताने-बाने का एक अभिन्न अंग रहा है. रेलवे को हरित करना न केवल सरकार के जलवायु उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिये महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की पर्यावरणीय पहल का भी एक महत्वपूर्ण प्रतीक है."

"यूएनईपी को इस तरह के प्रशिक्षणों और अन्य माध्यमों के ज़रिये इन प्रयासों में योगदान देने पर गर्व है."

रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव का प्रशिक्षण के बारे में कहना था, “भारतीय रेलवे का लक्ष्य हासिल करने के लिये सभी स्तरों पर अधिकारियों की क्षमता निर्माण अति महत्वपूर्ण है. मैं इस प्रयास में भारतीय रेलवे और यूएनईपी के बीच और सहयोग के लिए तत्पर हूँ.”

भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ रेलगाड़ी में यात्रा करने वाले लोगों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होगी और उसके ज़रिये माल ढुलाई में भी, ऐसे में यह सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होगा कि भारत का ये प्रसिद्ध रेल नैटवर्क सतत एवं टिकाऊ हो.

फिर, बिजली उत्पादन तो उत्सर्जन समीकरण का केवल एक हिस्सा है. भारतीय रेलवे, स्टेशनों और प्रतिष्ठानों को भी हरित प्रमाणित करने की योजना बना रहा है. इसके लिये 100 से अधिक जल उपचार और पुनर्चक्रण (री-सायकलिंग) संयन्त्र स्थापित किये गए हैं.

एक अन्य अद्वितीय पहल में, रेलरोड ऑपरेटर ने यात्रियों के मानव अपशिष्ट प्रबन्धन के लिये लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों के डिब्बों में बायो टैंक फिट किया हैं.

इस टैंक में, कूड़े को बैक्टीरिया द्वारा नष्ट किया जाता है, जिससे हानि न करने वाली गैस और गन्दा पानी निकलता है, जो निकासी से पहले शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुज़रता है. टा

ऊर्जा और शोध संस्थान (टैरी) द्वारा किये गए एक अध्ययन में पाया गया कि इन बायो टैंकों के ज़रिये, गन्दगी का प्रवाह कम करने और स्वास्थ्य व स्वच्छता लाभ मिलने के अलावा, साल भर में लगभग 155 टन कार्बनडाइ ऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन रोका जा सकता है.

ये लेख पहले यहाँ प्रकाशित हुआ - https://www.unenvironment.org/news-and-stories/story/its-full-steam-ahead-green-indias-railway-network

 

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