कोविड-19 से उबरने के प्रयासों में महिलाओं की है केन्द्रीय भूमिका

3 सितम्बर 2020

संयुक्त राष्ट्र उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा है कि युवा महिलाओं को पर्यावरणीय, आर्थिक व नस्लीय न्याय के आपस में जुड़े मोर्चों पर जद्दोजहद करना पड़ रहा है. उप महासचिव ने गुरूवार को गोलमेज़ विचार-गोष्ठि की श्रृंखला दूसरी कड़ी में ये बात कही जिसमें मशहूर महिला अर्थशास्त्रियों ने शिरकत की. 

उप महासचिव ने कहा कि वो एक ऐसी पीढ़ी की महिलाओं द्वारा पेश किये गए विचारों से बहुत प्रभावित हुई हैं जो एक ऐसी दुनिया का सामना कर रही हैं जहाँ खुलेपन के बजाय सीमितता है, सहिष्णुता के बजाय नफ़रत और कलंकित करने की मानसिकता है, सुरक्षा मुहैया कराने के बजाय नाज़ुक स्थिति बना देना आम बात है.

और इन सबसे ऊपर, एक ऐसी दुनिया  जलवायु परिवर्तन के कारण अपने वजूद के ही संकट का सामना कर रह है. 

महिलाओं के बिना - नाकामी

आमिना जे मोहम्मद ने कहा कि महिलाओं को भेदभाव से भरी एक ऐसी दुनिया में जीना और ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाना पड़ रहा है जिसका मौजूदा ढाँचा उन्होंने नहीं बनाया है. 

ऐसे में पहचान, देश और पहचान के निर्धारक तत्व, जिनके साथ कोई इनसान पैदा होता है, वो केवल एक इत्तेफ़ाक से कुछ ज़्यादा हैं. 

उन्होंने कहा, “हमें बाधाएँ ख़त्म करने के लिये एक निष्पक्ष और भेदरहित नज़र की दरकार है.” ये भी बहुत महत्व है कि ऐसा कोई भी प्रयास जिसमें महिलाओं की भागीदारी ना हो, वो अन्ततः नाकाम ही होगा.

पीढ़ी की आवाज़

उप महासचिव आमिना जे मोहम्मद ने कहा कि युवा अर्थशास्त्रियों ने ऐसे मुद्दों के ठोस, असल और साहसिक समाधान पेश किये जिनका सामना आज की युवा पीढ़ी कर रही है.

इनमें रोज़गार की कमी और जलवायु परिवर्तन प्रमुख हैं. इसलिये ये मौक़ा हमें इस पीढ़ी की आवाज़ें सुनने के लिये एक घण्टी का भी काम कर रहा है.

उन्होंने कहा, “वो कोई अगली पीढ़ी नहीं हैं. वो मौजूदा पीढ़ी हैं, वो नेतृत्व करने वाले हैं, ये दरअसल उनकी दुनिया है जोकि हम इस संकट से उबरने के प्रयासों के तहत बनाने की कोशिश कर रहे हैं.”

उम्मीद की किरण

संयुक्त राष्ट्र की उप प्रमुख ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने एक ऐसा मौक़ा मुहैया कराया है जब विभिन्न पक्ष कठिन सवालों पर ग़ौर करने के लिये तैयार हो रहे हैं. ये सवाल आर्थिक और वित्तीय ढाँचों के बारे में हैं जहाँ नवाचार वाले समाधान किसी समय केवल आर्थिक विचार के दायरे में ही होते थे.

“केवल कुछ महीने पहले ऐसा सम्भव नहीं था.” 

साथ ही उन्होंने सभी से अवसरों का सही लाभ उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में इस तरह से जान फूँकी जाए कि ये सही मायनों में सभी लोगों के लिये काम करे.

 

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