बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए 'कोविड-19 से लें सबक़'

यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश बैठक को संबोधित करते हुए.
UN Photo/Jean-Marc Ferré
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश बैठक को संबोधित करते हुए.

बेहतर भविष्य को आकार देने के लिए 'कोविड-19 से लें सबक़'

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनिया भर के प्रमुख सांसदों की एक सभा को सम्बोधित करते हुए कहा है  कि वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने की कार्रवाई में दुनिया ने जो सबक़ लिए हैं उनका उपयोग भविष्य में सही रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए किया जाना होगा. 

संसद के अध्यक्षों के विश्व सम्मेलन को सम्बोधितकरते हुए महासचिव गुटेरेश ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने समाजों को चुनौती देने वाली कमज़ोरियों को सामने ला खड़ा कर दिया है और अनेक प्रणालीगत दुबर्लताओं को उजागर किया है.

महासचिव ने कहा कि वायरस से पहले भी हमारा समाज बढ़ती विषमताओं, पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति, नागरिक समाज के लिए सिकुड़ती ज़मीन, सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अपर्याप्त संसाधन और सामाजिक टकराव व अवसरों की कमी के कारण अस्थिर था.

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उन्होंने आगाह किया, "हम जहाँ थे वहाँ वापस नहीं जा सकते, इसलिए  पुनर्बहाली को भविष्य के लिए हालात सही करने के एक वास्तविक अवसर में तब्दील करना चाहिए."

यूएन प्रमुख ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण विनाश लगातार बढ़ता जा रहा है और जलवायु कार्रवाई के लिए महत्वाकाँक्षा कम हो रही है इसलिए जलवायु संकट से निपटना अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है,.

उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रगति का आकलन करने वाले संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा, "कोविड-19 की वजह से कॉप-26 सम्मेलन वर्ष 2021 तक स्थगित हो गया है, लेकिन एक जलवायु आपातस्थिति हमारे सामने पहले से ही है."

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि जहाँ एक ओर अन्तरराष्ट्रीय समुदाय कोविड संकट को दूर करने के लिए प्रयासरत है, वहीं उसे जलवायु परिवर्तन रूपी दूसरे संकट का भी मुक़ाबला करना होगा जिससे दुनिया अधिक टिकाऊ पथ पर चल सके.

उन्होंने बताया कि हमारे पास पर्याप्त नीतियाँ, तकनीक और जानकारी मौजूद है. उनके मुताबिक अर्थव्यवस्थाओं को बचाने, पुनर्निर्माण और पुनर्बहाली करते समय वो छह सकारात्मक जलवायु बिंदुओं को ध्यान में रखना होगा. 

- समाजों को अधिक सहनशील बनाना और न्यायोचित बदलाव लाना

- हरित रोज़गार और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा

- पैरिस समझौते के लक्ष्य की शर्तों के मुताबिक व्यवसायों, विमानन और जहाज़रानी उद्योग को सहयोग प्रदान करना

- जीवाश्म ईंधन सब्सिडी और कोयला आधारित अर्थव्यवस्था को समर्थन में कटौती करना

- निर्णय प्रक्रियाओं में जलवायु जोखिम का समावेशन और साथ  मिलकर काम करने पर ज़ोर देना

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जोर देकर कहा, "साधारण शब्दों में, कोविड-19 से दुनिया किस तरह उबरती है, वसंसही हमारी पृथ्वी के लिये ‘बनने या बिगड़ने’ का क्षण होगा."

यूएन प्रमुख ने कहा कि पुनर्बहाली के प्रयासों को अस्थिरता के अन्य स्रोतों और असंतोष के अन्य कारमों को भी दूर करना होगा और इसमें देशों व समुदायों के बीच असमानताएँ भी शामिल हैं.

"जातिवाद और लैंगिक भेदभाव से लेकर आय असमानताओं तक, मानवाधिकारों के इन गहन उल्लंघन से हमारी भलाई और हमारे भविष्य को ख़तरा है."

महासचिव ने कहा, “असमानता, आर्थिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, वित्तीय संकट, अपराध में वृद्धि, और ख़राब शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है  व ये अब नए रूपों में सामने आ रहा है.

उन्होंने कहा, "यही कारण है कि मैं राष्ट्रीय स्तर पर एक नए सामाजिक अनुबंध की पुकार लगा रहा हूँ." 

“इसमें सामाजिक संरक्षा  नीतियों और सुरक्षा साधनों के नए तरीक़ों को शामिल करना चाहिए जिसमें सभी को स्वास्थ्य सुविधाएँ और न्यूनतम आय मिलने की सम्भावना शामिल है. नए कौशल और आजीवन अवसर प्रदान करने के लिये शिक्षा और डिजिटल टैक्नॉलॉजी दो महान उत्प्रेरक हो सकते हैं.”

साथ ही अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर एक नए वैश्विक अनुबंध की आवश्यकता है - यह सुनिश्चित करने के लिए कि शक्ति,  सम्पदा और अवसरों को निष्पक्ष वैश्वीकरण और विकासशील देशों के लिए एक मज़बूत आवाज के साथ अधिक व्यापक और समान रूप से साझा किया जा सके.