अफ़ग़ानिस्तान: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की मौतों को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई का आग्रह

14 अगस्त 2020

अफ़ग़ानिस्तान में इस वर्ष की शुरुआत से अब तक नौ मानवाधिकार कार्यकर्ता अपनी जान गँवा चुके हैं जिसे संयुक्त राष्ट्र की एक स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ ने चिन्ताजनक रूझान बताया है. शुक्रवार को यूएन विशेषज्ञ मैरी लॉलॉर ने अफ़ग़ान प्रशासन से मौतों के इस सिलसिले को रोके जाने का आग्रह किया है. 

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हालात पर विशेष रैपोर्टेयर मैरी लॉलॉर ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष अगस्त महीने तक ही मृतकों का आँकड़ा बढ़ गया है. 

उन्होंने तीन अन्य स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञों के साथ एक साझा बयान जारी कर कहा कि दण्डमुक्ति की भावना से इस तरह के अपराधों को बढ़ावा मिल रहा है और यह दर्शाता है कि समाज में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की भूमिका की अहमियत को नहीं पहचाना जाता.

विशेष रैपोर्टेयर के मुताबिक पिछले मामलों की जाँच-पड़ताल में कोई नतीजा नहीं निकला है. उन्होंने मानवाधिकारों के इस जघन्य उल्लंघन की पूर्ण जवाबदेही तय किए जाने की ज़रूरत को रेखांकित किया है.

असमतुल्लाह सलाम देश के ग़ज़नी प्रांत में शिक्षा के अधिकार को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत थे लेकिन 1 अगस्त को परिवार के साथ ईद मनाने के लिए जाते समय उन्हें अगवा किए जाने के बाद उनकी हत्या कर दी गई. 

उनकी मौत से कुछ ही समय पहले फ़ातिमा नताशा खलील और अहमद जावेद फ़ौलाद को 27 जून को तब जान से मार दिया गया जब वे अफ़ग़ानिस्तान में स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग में काम के लिए जा रहे थे. 

मानवाधिकार कार्यकर्ता इब्राहिम एब्रात की मई महीने में ज़ाबुल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 

इन घटनाओं से चिन्तित विशेषज्ञों ने कहा, “जनवरी में, अफ़ग़ान सरकार ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की रक्षा के लिए राष्ट्रीय संरक्षण तंत्र के सृजन के विचार को अपना समर्थन दिया था. लेकिन अब तक कोई प्रगति नहीं हुई है और स्पष्ट है कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के लिए पहले की तुलना में हालात बेहतर नहीं हैं.”

“हम सरकार से वायदे के अनुरूप एक असरदार राष्ट्रीय संरक्षण प्रणाली को तात्कालिक रूप से स्थापित करने का आग्रह करते हैं.”

उन्होंने कहा है कि अफ़ग़ान प्रशासन को समय रहते कार्रवाई करनी होगी और कार्यकर्ताओं को धमकियाँ या डराए-धमकाए जाने की रिपोर्टों पर तत्काल कार्रवाई करनी होगी. 

साथ ही हिंसा और मौतों के मामलों की गहराई में जाकर जाँच करना भी अहम होगा. विशेषै रैपोर्टेयर ने कहा है कि वे अफ़ग़ानिस्तान में प्रशासन से इस सम्बन्ध में बातचीत कर रहे हैं और हालात की निगरानी की जाती रहेगी.

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतंत्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतंत्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिए कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतंत्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं.

 

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