कोविड-19: महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में ‘उम्मीद की किरण’

10 अगस्त 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा है कि कोरोनावायरस संक्रमण के पुष्ट मामलों की संख्या इस सप्ताह दो करोड़ का आँकड़ा पार कर जाने की सम्भावना है. यूएन एजेंसी प्रमुख ने ध्यान दिलाया कि बहुत से देशों को महामारी पर क़ाबू पाने में काफ़ी हद तक सफलता भी मिली है जो इस लड़ाई में आशा का संचार करता है और फैलाव पर क़ाबू पाने में बुनियादी स्वास्थ्य उपायों की अहमियत को रेखांकित करता है. 

सोमवार को पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए यूएन एजेंसी के महानिदेशक ने कहा कि कोविड-19 संक्रमितों के आँकड़ों के पीछे विशाल पीड़ा और दुख भी छिपा है. 

उन्होंने कहा कि हर जीवन मायने रखता है, बहुत से लोग कष्ट में हैं और यह विश्व के लिए एक बेहद मुश्किल लम्हा है. 

कोरोनावायरस संक्रमण के पुष्ट मामले इस हफ़्ते दो करोड़ और मृतकों की संख्या साढ़े सात लाख का आँकड़ा पार कर सकती है. 

“लेकिन मैं स्पष्टता से कहना चाहता हूँ कि आशा के संकेत दिखाई दे रहे हैं और कोई देश, क्षेत्र, शहर या क़स्बा कहीं भी हो – महामारी का रुख़ मोड़ने में देर नहीं हुई है.”

महानिदेशक घेबरेयेसस ने दोहराया कि नेताओं को आगे बढ़कर ज़रूरी क़दम बढ़ाने होंगे और नागरिकों को नए उपायों को अपनाना होगा. 

कुछ देशों में सफलता

“मेकॉन्ग क्षेत्र के कुछ देशों, न्यूज़ीलैण्ड, रवाण्डा और कैरीबियाई व पैसिफ़िक के अनेक द्वीपीय देशों ने वायरस पर जल्द क़ाबू पाने में सफल रहे हैं.”

ग़ौरतलब है कि पिछले सप्ताहांत न्यूज़ीलैण्ड की प्रधानमंत्री जेसिन्डा आरडर्न ने 100 दिनों में सामुदायिक फैलाव का कोई नया मामला सामने आने पर ख़ुशी ज़ाहिर की लेकिन सतर्क बने रहने के प्रति भी आगाह किया.

रवाण्डा में कोविड-19 के ख़िलाफ़ प्रयासों मे प्रगति के लिए मज़बूत नेतृत्व, सार्वभौम स्वास्थ्य कवरेज, सुस्पष्ट सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी के साथ-साथ कोविड-19 के लिए निशुल्क परीक्षण की व्यवस्था बताई गई है. 

लोगों ने बिना किसी मुश्किल के टैस्टिंग कराई और संक्रमितों का जल्द पता लगाना उन्हें अलग रखा जाना और उनके सम्पर्क में आए लोगों का पता लगाना सम्भव हो पाया.

“बुनियादी बातों का ध्यान रखने से वायरस की सही स्थिति के बारे में स्पष्ट तस्वीर उभरती है और फैलाव को दबाने व जीवन बचाने के लिए ज़रूरी लक्षित कार्रवाई होती है.”

यूएन एजेंसी के प्रमुख के मुताबिक फ़्राँस, जर्मनी, कोरिया गणराज्य, स्पेन, इटली और ब्रिटेन में भी बड़े पैमाने पर महामारी फैली थी लेकिन उचित कार्रवाई के ज़रिये संक्रमणों पर क़ाबू पा लिया गया.

महानिदेशक घेबरेयेसस ने बताया कि संक्रमण के नए मामलों से नए निपटने के लिए देश अब हर औज़ार का इस्तेमाल कर रहे हैं. 

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने उत्तरी इंग्लैण्ड में कुछ संक्रमणों की पुष्टि होने के बाद कुछ इलाक़ों में घर पर रहने का आदेश जारी किया. उधर फ़्राँस में राष्ट्रपति मैकराँ ने भी नए मामलों का पता चलने पर पैरिस में कुछ व्यस्त इलाक़ों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है. 

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महानिदेशक घेबरेयेसस ने ध्यान दिलाया कि जिन देशों ने वायरस पर क़ाबू पाने में काफ़ी हद तक सफलता मिली है वहाँ समाजों, स्कूलो और अन्य गतिविधियों को फिर से खोलने के लिए जोखिम मूल्याँकन पर आधारित तरीक़ों को अपनाया जा रहा है.

“हम सब स्कूलों को सुरक्षापूर्वक खुलते हुए देखना चाहते हैं लेकिन हमें छात्रों, कर्मचारियों और शिक्षकों की स्वास्थ्य रक्षा को सुनिश्चित करना होगा. इसकी बुनियादी समुदाय में फैलाव पर पर्याप्त नियन्त्रण पाना है.”

वैक्सीन और उपचार की तलाश

उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि अगर हम असरदार रूप से वायरस को दबाते हैं तो समाजों को सुरक्षित ढँग से खोला जा सकता है. 

तीन महीने पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन ‘ACT Accelerator’ नामक पहल को शुरू किया था जिसका लक्ष्य महामारी की रोकथाम व उपचार के उपायों को विकसित करना व तेज़ी से उन्हें हर देश तक पहुँचाना था.

इस पहले के तहत विकसित की जा रही वैक्सीनों का परीक्षण दूसरे व तीसे चरण में है और वैश्विक वैक्सीन सुविधा अब 160 से ज़्यादा देशों में उभर रह है. 

कोविड-19 के गम्भीर मामलों में कारगर नज़र आ रही ‘डेक्सामीथेज़ोन’ दवा का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है और अनेक अन्य उपचारों पर काम चल रहा है. 

उन्होंने कहा कि इन उपायों को ‘ACT Accelerator’ के तहत दुनिया भर में पहुँचाने के लिए अगले तीन महीने का समय एक बेहद अहम अवसर है.

 

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