आतंकवाद और संगठित अपराध के तार जुड़े - वैश्विक कार्रवाई की दरकार

6 अगस्त 2020

सुरक्षा परिषद में आतंकवाद और संगठित अपराध के बीच की कड़ियों पर गुरुवार को चर्चा हुई जिसमें विशेषज्ञों ने चिन्ता जताई कि आपराधिक व आतंकी गुटों में अवसरवादी सहयोग बढ़ रहा है, और वैश्विक महामारी कोविड-19 से उपडी व्यवस्थागत कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाने की कोशिश की जा रही है. विशेषज्ञों ने इस चुनौती से निपटने के लिये अन्तरराष्ट्रीय सन्धियों व क़ानूनी औज़ारों के असरदार उपयोग की अहमियत को रेखांकित किया है.

मादक पदार्थों एवँ अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (UNODC) की कार्यकारी निदेशक ग़ादा वॉली ने कहा कि व्यापक और सहयोगपूर्ण कार्रवाइयाँ किये जाने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है. 

कोविड-19 संकट से राष्ट्रीय स्तर पर प्रशासनिक एजेंसियों के समक्ष नए प्रकार की चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं और अपराधी तत्व तालाबन्दी और यात्रा सम्बन्धी रुझानों में बदलाव आने के कारण उभरी कमज़ोरियों का फ़ायदा उठाना चाहते हैं.  

उन्होंने बताया कि इन ख़तरों से निपटने के लिये क्षमताएँ विकसित करना यूएन एजेंसी के कामकाज का एक अहम हिस्सा है. 

आतंकवाद और संगठित अपराध के बीच साँठ-गाँठ से निपटने के लिये प्रस्ताव 2482 के तहत सदस्य देशों द्वारा किये गए उपायों पर गुरुवार को एक रिपोर्ट पेश की गई है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख के मुताबिक इस रिपोर्ट को तैयार करने में 50 सदस्य देशों, 15 आतंकवाद निरोधक मामलों में समन्वय संस्थाओं, आतकंवाद निरोधक समिति के कार्यकारी निदेशालय और विश्लेषण व प्रतिबनध निगरानी टीम ने अपना योगदान दिया है. 

पारस्परिक हित

ग़ादा वॉली ने बताया कि सदस्य देशों ने आतंकवाद को वित्तीय पोषण मुहैया कराए जाने के विषय में आपस में जुड़ने वाली अनेक कड़ियों को रेखांकित किया है. लेकिन कुछ देश सीमित जाँच क्षमता होने के कारण इन कड़ियों की मौजूदगी की पुष्टि नहीं कर पाए. 

बहुत से देशों के मुताबिक आतंकवादी और संगठित अपराधी तत्व साझा इलाक़ों व आपसी हितों के आधार पर सहयोग करते हैं और इस काम में निजी रिश्तों का भी इस्तेमाल होता है जो अक्सर जेलों में बनते हैं. 

अनेक देशों ने बताया कि आतंकवादियों को संगठित आपराधिक गतिविधियों से फ़ायदा मिलता है, जैसेकि मानव तस्करी, प्रवासियों की तस्करी, फ़िरौती के लिए अपहरण और ग़ैरक़ानूनी नशीली दवाओं की तस्करी. 

आपराधिक नैटवर्क राष्ट्रीय प्रशासनिक एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिये अक्सर आतंकी गुटों के साथ सहयोग करने में दिलचस्पी रखते हैं. इसके मद्देनज़र सदस्य देशों ने प्रस्ताव 2482 के तहत नीतियाँ और कार्रवाई के लिये अन्य उपाय अपनाए हैं. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि सदस्य देशों ने परा-राष्ट्रीय संगठित अपराध (Transnational Organized Crime) और नशीली दवाओं पर नियन्त्रण के लिये अन्तरराष्ट्रीय सन्धियों सहित अन्य क़ानूनी औज़ारों पर मोहर लगाने की अहमियत पर ज़ोर दिया है. 

उन्होंने धन के अवैध लेनदेन और हवाला के ख़िलाफ़ लड़ाई को यूएन प्रस्तावों व सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी के साथ प्रभावी ढँग से आगे बढ़ाने की वकालत की है. 

साथ ही सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ाने को एक प्राथमिकता माना गया है – इसके तहत विमान यात्रा करने वाले यात्रियों की जानकारी का विश्लेषण होगा. 

ये भी पढ़ें - आतंकवाद के विरुद्ध अहम प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में पारित

इसके अलावा जेल प्रबन्धन को बेहतर बनाना होगा ताकि कट्टरता की रोकथाम की जा सके और हिंसक चरमपंथ से लड़ाई में सम्पूर्ण समाज को साथ लेकर चलने वाले तरीक़े विकसित किये जा सकें. 

सदस्य देशों ने सीमापार सहयोग की आवश्यकता को समझते हुए क्षेत्रीय मंचों, द्विपक्षीय समझौतों, अन्तरराष्ट्रीय अपराध पुलिस संगठन (INTERPOL) और आपस में क़ानूनी सहयोग सुनिश्चित करने वाली सन्धियों को बढ़ावा देने की बात कही है. 

यूएन एजेंसी प्रमुख ने कहा कि आतंकवाद की सटीक परिभाषा के लिये राष्ट्रीय क़ानूनी फ़्रेमवर्क में ज़रूरी बदलाव किये जा सकते हैं.आपराधिक न्याय प्रक्रिया में समन्वय, तथ्य जुटाने और विशेषीकृत इकाई स्थापित करने के लिये ज़्यादा संसाधन निवेश किये जाने की ज़रूरत है. 

आतकंवाद विरोधी रणनीति

संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद निरोधक कार्यालय के प्रमुख व्लादीमीर वोरोनकोव ने जुलाई महीने में आयोजित आतंकवाद विरोधी सप्ताह की ओर ध्यान आकर्षित किया.

इस सप्ताह में सदस्य देशों और नागरिक समाज के एक हज़ार से ज़्यादा प्रतिनिधियों ने शिरकत की थी और वैश्विक आतंकवाद विरोधी रणनीति के लिये प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा की थी. 

आतंकवाद विभाग प्रमुख ने कहा कि हमारा विचार-विमर्श दर्शाता है कि सदस्य देशों में यह समझ और चिन्ता है कि आतंकवादी तत्व नशीली दवाओं, सामान, प्राकृतिक संसाधनों की अवैध तस्करी, अपहरण, फ़िरौती सहित अन्य गतिविधियों के ज़रिये से धन जुटा रहे हैं. 

उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के महीनों में साइबर अपराधों में बड़ा उछाल आया है और वर्ष 2020 की पहली तिमाही में फ़र्ज़ी ईमेल भेजकर लोगों की निजी जानकारी चुराने वाली घटनाओं (Phishing) में 350 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई. अनेक मामलों में अस्पतालों व स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को निशाना बनाया गया. 

बैठक में चिन्ता जताई गई कि आतंकवादी तत्व कोविड-19 के कारण बड़े पैमाने पर आए व्यवधान और विकट आर्थिक हालात का फ़ायदा ठा रहे हैं और भय, नफ़रत, विभाजन फैलाने के साथ-साथ नए लोगों को भर्ती करने व कट्टरता फैलाने की कोशिशों में लगे हैं. 

अन्य वक्ताओं ने आतंकवाद और संगठित अपराध के बीच गठजोड़ से उपजे ख़तरे से निपटते समय ज़रूरत के अनुरूप कार्रवाई करने और मानवाधिकारों व बुनियादी आज़ादियों का सम्मान करने की अहमियत दोहराई है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड

समाचार ट्रैकर: इस मुद्दे पर पिछली कहानियां

आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के फैलाव से बढ़ रही है अस्थिरता: यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि आतंकवाद से परिवारों और समुदायों को सदमा पहुंचता है और प्रभावित क्षेत्रों में अस्थिरता फैलती है. केनया की राजधानी नैरोबी में बुधवार को आतंकवाद विरोधी सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों का ज़िक्र किया और अफ़्रीका में चरमपंथी हमलों के पीड़ितों के साथ एकजुटता जताई.