कोविड-19 के दौरान धार्मिक कार्यों के लिये मार्गदर्शिका जारी

5 अगस्त 2020

यूनीसेफ़ और अनेक आस्था समूहों ने कोविड-19 के दौरान अपने धर्म और आस्था के रास्ते पर सुरक्षापूर्वक चलने, ग़लत सूचनाओं व जानकारी का मुक़ाबला करने और कमज़ोर और वंचित लोगों की मदद करने के लिये दिशानिर्देश जारी किये हैं. 

यूनीसेफ़ ने रिलीजन फॉर पीस (RfP) व आस्था और स्थानीय समुदायों पर संयुक्त विद्या पहल (Joint Learning Initiative on Faith and Local Communities) के साथ मिलकर मार्गदर्शन दस्तावेजों की एक श्रृंखला जारी की है, जिसमें धार्मिक नेताओं और आस्था समुदायों को कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करने के बारे में सलाह दी गई है. 

यूनीसेफ़ में विकास संचार की वरिष्ठ सलाहकार, डॉक्टर केरिडा मैकडोनाल्ड ने कहा, "यूनीसेफ़ का आस्था आधारित संगठनों और नेताओं के साथ मिलकर, बच्चों और परिवारों के लिये काम करने का एक लम्बा इतिहास रहा है.

महामारी के साथ, यह साझेदारी और भी महत्वपूर्ण हो गई है. कोविड-19 एक बाल अधिकार संकट है और हम सभी को अपने बच्चों के लिये, फिर से एक बेहतर और सुरक्षित दुनिया बनाने की ख़ातिर मिलकर काम करने की आवश्यकता है.”

इस महामारी से धर्म से जुड़े समारोहों पर बड़े पैमाने पर असर पड़ा है और पूजा-अर्चना, प्रार्थना, ईश्वर का ध्यान समेत अंत्येष्टि, विवाह, धार्मिक वस्तुओं को चूमने जैसी प्रथाओं व अन्य सामान्य धार्मिक अनुष्ठानों के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिये जोखिम पैदा होने का ख़तरा है.

UNIC Rio
यहूदियों की एक धार्मिक प्रथा जो शब्बत शुरू होने के लिये सांयकाल में मोमबत्ती रौशन करके पूरी की जाती है.

इस मार्गदर्शन के ज़रिये बहु-धार्मिक कार्रवाई के लिये ठोस दिशा प्रदान करने, मौजूदा स्थानीय प्रयास शुरू करने और प्रासंगिक धार्मिक सम्बन्धों के साथ वैज्ञानिक व तकनीकी जानकारी को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है.

मार्गदर्शन के अब तक तीन सेट जारी किये गए हैं:

•    एकत्र होने, प्रार्थना और अनुष्ठान का अभ्यास करने के नए तरीक़े अपनाना: इस मार्गदर्शिका में इस बारे में विशिष्ट सिफारिशें हैं कि धार्मिक हस्तियाँ अपने समुदायों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करते हुए, इकट्ठा होकर, प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठानों व मृत्यु और शोक जैसे समस्त धार्मिक संस्कारों को किस तरह पूरा कर सकते हैं. 

•    ग़लत सूचना और भेदभाव समाप्त करने और आशा जगाने की जानकारी मुहैय्या कराना: इस दस्तावेज़ में अफ़वाह, भय, निराशा, कलंक और भेदभाव के कुछ महत्वपूर्ण कारकों और नकारात्मक प्रभावों को बढ़ाने वाले कारकों की रूपरेखा दी गई है.

साथ ही धार्मिक नेताओं का मार्गदर्शन किया गया है कि वो इन चुनौतियों से किस तरह निपट सकते हैं.

•    जोखिम का सामना कर रहे लोगों की मदद करना: कोविड-19 के कारण बुज़ुर्ग, बेघर, प्रवासी, विकलांग व्यक्ति, गर्भवती महिलाओं और बच्चों जैसे लोगों को स्वास्थ्य सम्बन्धी जटिलताओं और मृत्यु का अधिक ख़तरा होता है, और वो निवारक उपायों का पालन करने में असमर्थ हो सकते हैं.

यह मार्गदर्शिका इन समूहों की विशिष्ट आवश्यकताओं क पूरा करने के लिये सहायता प्रदान करने और एकजुटता, समुदाय व आशा के उत्साहजनक मूल्यों के लिये सुझाव की रूपरेखा प्रदान करती है.

यूनीसेफ़ ने रिलीजन फॉर पीस के महासचिव, प्रोफ़ेसर अज़्ज़ा करम ने कहा, "देश जैसे-जैसे लॉकडाउन ख़त्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, महामारी से विशेष रूप से घरों की आमदनी ख़त्म होने और उससे जुड़े नुक़सान का असर सामने आने लगा है.

इन मार्गदर्शिकाओं में आस्था नेताओं को इन प्रभावों से निपटने में समुदायों की मदद करने के बारे में सलाह दी गई है."

स्थानीय अनुकूलन डिज़ाइन

मार्गदर्शन दस्तावेज़, राष्ट्रीय नेताओं और सामुदायिक स्तरों पर धार्मिक नेताओं, आस्था समुदायों और आस्था-आधारित संगठनों द्वारा स्थानीय अनुकूलन और उपयोग के लिये डिज़ाइन किये गए हैं.

ये अप्रैल 2020 में शुरू किये गए  Multi-Religious Faith-in-Action COVID-19 Initiative का हिस्सा हैं, जिसके तहत सबसे कम उम्र के नागरिकों समेत सभी लोगों पर इस महामारी के प्रभावों के बारे में जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई है.

आगामी मार्गदर्शन दस्तावेज़ों में महिलाओं और बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा को रोकने, बच्चों और युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने और सामाजिक सेवाओं की पुनर्बहाली में सहयोग करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा.

मार्गदर्शिका डाउनलोड करने के लिये यहाँ क्लिक करें - https://www.faith4positivechange.org/guidance-documents

 

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