कोविड-19: बाल शिक्षा के लिये अहम क्षण, निडर क़दम उठाने का आहवान 

केनया के नैरोबी में मथारे अनौपचारिक शिविर में माँ अपने दस वर्षीय बच्चा को पढ़ा रही है.
© UNICEF/Translieu/Nyaberi
केनया के नैरोबी में मथारे अनौपचारिक शिविर में माँ अपने दस वर्षीय बच्चा को पढ़ा रही है.

कोविड-19: बाल शिक्षा के लिये अहम क्षण, निडर क़दम उठाने का आहवान 

संस्कृति और शिक्षा

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 ने शिक्षा के इतिहास में सबसे बड़ा व्यवधान पैदा किया है जिसके कारण 160 से ज़्यादा देशों में एक अरब से ज़्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने मंगलवार को नया नीतिपत्र जारी करते हुए, मौजूदा शिक्षा संकट और गहराती विषमताओं से निपटने के लिये अपना चार सूत्री एजेण्डा सामने रखा है जिसमें स्कूलों में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने, निवेश बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की नए सिरे से कल्पनाशीलता का आहवान किया गया है.

महासचिव गुटेरेश ने अपने वीडियो सन्देश में शिक्षा को निजी विकास और समाजों के भविष्य की एक कुँजी बताया है. 

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उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब दुनिया विषमता के ग़ैर-टिकाऊ स्तर का सामना कर रही है, हमें शिक्षा की पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है जो सबके लिये बराबरी लाती है. 

नए नीतिपत्र में कक्षाओं में बच्चों की वापसी के सम्बन्ध में सिफ़ारिेशें जारी की गई हैं, साथ ही ‘हमारा भविष्य बचाओ’ (Save Our Future) नामक एक वैश्विक मुहिम भी शुरू की गई है. 

“हमें निडर क़दम अभी उठाने होंगे ताकि समावेशी, सुदृढ़, गुणवत्तापरक शिक्षा प्रणाली को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप सृजित किया जा सके.”

शिक्षा में व्यवधान

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि विश्वव्यापी महामारी के कारण दुनिया भर में एक अरब से ज़्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं. 

संकट के दौरान पढ़ाई-लिखाई को जारी रखने के लिये प्रयास किये गए हैं और पाठ्यक्रम को रेडियो, टैलीविज़न और ऑनलाइन माध्यमों से बच्चों तक पहुँचाया गया, लेकिन बहुत से छात्र इस दायरे से बाहर हैं. 

यूएन प्रमुख ने कहा कि विकलांग छात्र, अल्पसंख्यक, वंचित लोग, शरणार्थी व विस्थापन का शिकार समुदाय के सदस्यों के इस संकट में पीछे छूट जाने का ख़तरा है. 

जो छात्र दूर रहकर पढ़ाई कर सकते हैं, उन्हें भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनकी सफलता उनके रहन-सहन की परिस्थितियों और निभाए जाने वाली घरेलू ज़िम्मेदारियों पर निर्भर करती है.

वैश्विक महामारी से पहले भी पढ़ाई-लिखाई और सीखने का संकट मौजूद था – 25 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित थे.  

“अब हम एक पीढ़ीगत आपदा का सामना कर रहे हैं जो अकथनीय मानव सम्भावनाओं को बर्बाद, दशकों की प्रगति को कमज़ोर और गहराई तक समाई विषमताओं को और गहन कर सकती है.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस संकट का असर बाल पोषण, बाल विवाह और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर अब तक हुई प्रगति पर पड़ेगा, जो चिन्ताजनक है. 

स्कूलों में वापसी

मंगलवार को जारी नीतिपत्र में चार प्रमुख क्षेत्रों में कार्रवाई की पुकार लगाई गई है:

- स्कूल फिर से खोला जाना. कोविड-19 के फैलाव पर क़ाबू पा लिये जाने के बाद छात्रों को स्कूलों में वापिस बुलाना होगा और शिक्षण संस्थानों को सुरक्षित बनाए रखना शीर्ष प्राथमिकता होनी चाहिये. 

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि यह प्रक्रिया जटिल है और सरकारों की मदद के लिये इस सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी किये हैं. 

बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य की रक्षा, संक्रमण के जोखिम और महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी के असर जैसी अन्य बातों का ध्यान रखा जाना होगा, और

इस क्रम में अभिभावकों, शिक्षकों व युवाओं से सलाह-मशविरा किया जाना अहम है.

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- वित्तीय फ़ैसल लेते समय शिक्षा को प्राथमिकता. वैश्विक महामारी से पहले निम्न और मध्य आय वाले देशों को पहले से ही शिक्षा क्षेत्र में प्रतिवर्ष डेढ़ ट्रिलियन डॉलर की कमी का सामना करना पड़ रहा था, और यह धनराशि अब और भी ज़्यादा होगी.

इस चुनौती से निपटने के लिये शिक्षा बजट बढ़ाना होगा और अन्तरराष्ट्रीय एकजुटता प्रयासों के केंद्र में शिक्षा को रखना होगा – कर्ज़ प्रबन्धन से लेकर आर्थिक स्फूर्ति पैकेजों और वैश्विक मानवीय राहत अपीलों तक. 

- पहुँच से दूर लोगों के लिए लक्षित प्रयास. यूएन प्रमुख ने कहा कि शिक्षा विस्तार सम्बन्धी कार्यक्रमों को उन समुदायों व लोगों तक पहुँचना होगा जिनके सबसे अधिक पीछे छूट जाने का ख़तरा है - आपात हालात, संकटों में रह रहे लोग, अल्पसंख्यक, विस्थापित और विकलांग. 

साथ ही लड़कियों, लड़कों, महिलाओं व पुरुषों के सामने पेश चुनौतियों के प्रति सम्वेदनशील रहना होगा और डिजिटल खाई को पाटने के प्रयास करने होंगे. 

- शिक्षा के भविष्य पर मनन. महासचिव गुटेरेश ने कहा कि शिक्षा के बारे में नए सिरे से कल्पनाशीलता का यह एक पीढ़ीगत अवसर है.

उन्होंने कहा कि हम भविष्योन्मुखी प्रणालियों की दिशा में क़दम बढ़ा सकते हैं जिससे सभी के लिये गुणवत्तापरक शिक्षा सुनिश्चित की जा सके और टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने में लम्बी छलांग लगा सकें.