शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार: नई व्याख्या

29 जुलाई 2020

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति ने शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने के अधिकार की व्याख्या करते हुए स्पष्ट किया है कि यह दायरा व्यक्तिगत मौजूदगी वाली बैठकों के साथ-साथ वर्चुअल और ऑनलाइन सभाओं के लिये भी लागू होता है. मानवाधिकार समिति के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने कहा है कि लोगों को शान्तिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकारों को मानवाधिकार क़ानूनों का सम्मान करते हुए अपने तय दायित्वों का निर्वहन करना चाहिये. 

यूएन मानवाधिकार कार्यालय के मुताबिक शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार उन सभी शासन प्रणालियों के मूल में है जिनमें लोगों की हिस्सेदारी है और वे आज़ादी से सार्वजनिक नीतियों के समर्थन या विरोध में अपनी आवाज़ उठा सकते हैं. 

18 विशेषज्ञों वाली यूएन मानवाधिकार समिति की ओर से बुधवार को यह क़ानूनी सलाह पेश की गई है.

इस समिति की ज़िम्मेदारी यह निगरानी करना है कि देश ‘नागरिक और राजनैतिक अधिकारों पर अन्तरराष्ट्रीय नियमपत्र’ को किस तरह लागू कर रहे हैं - अन्तरराष्ट्रीय नियमपत्र पर 173 देशों ने मोहर लगाई है.

विशेषज्ञ पैनल ने अपनी आम टिप्पणी (General Comment) में बताया है कि प्रदर्शनकारियों के पास मास्क पहनने और चोगे से अपना चेहरा ढकने का अधिकार है.

सरकारों को प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी नहीं जुटानी चाहिये, उन्हें डराए-धमकाए जाने और प्रताड़ित करने से भी बचना चाहिये.

अमेरिका के मिनियापॉलिस शहर में पुलिस हिरासत में एक काले अफ़्रीकी व्यक्ति की मौत के बाद हाल के दिनों में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ के समर्थन में विश्व के अनेक शहरों प्रदर्शन हुए हैं.

इन्हीं हालात के मद्देनज़र यूएन द्वारा नियुक्त स्वतन्त्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने के अधिकार के दायरे की व्याख्या की है. 

समिति के सदस्य क्रिस्टॉफ़ हेयन्स ने कहा कि एक साथ इकट्ठा होकर जश्न मनाना या अपनी पीड़ाओं को ज़ाहिर करना लोगों का एक बुनियादी अधिकार है – सार्वजनिक व निजी स्थलों में, घरों से बाहर, घरों के अन्दर और ऑनलाइन भी.

“बच्चों, विदेशी नागरिकों, महिलाओं, प्रवासी कामगारों, शरण लेने के प्रयासों मे जुटे और शरणार्थियों सहित हर किसी को शान्तिपूर्ण ढँग से एकत्र होने का अधिकार है.” 

समिति की सलाह में कहा गया है कि सरकारें सार्वजनिक व्यवस्था या सुरक्षा का हवाला देकर और सम्भावित हिंसा के किसी विशिष्ट ख़तरे के बिना, प्रदर्शनों पर पाबन्दी नहीं लगा सकतीं. 

डिजिटल माध्यमों की भूमिका

साथ ही स्पष्ट किया गया है कि सरकारें इंटरनेट नैटवर्क पर रोक नहीं लगा सकती और ना ही किसी वेबसाइट को बन्द कर सकती हैं क्योंकि शान्तिपूर्ण सभाओं में उनकी भी एक भूमिका है. 

यूएन विशेषज्ञों ने ज़ोर देकर स्पष्ट किया है पत्रकारों और मानवाधिकार पर्यवेक्षकों को शान्तिपूर्ण सभाओं की निगरानी करने, जानकारी जुटाने का अधिकार है, हिंसक और ग़ैरक़ानूनी सभाओं सम्बन्धी जानकारी भी. 

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शान्तिपूर्ण सभाओं के अधिकार पर यूएन के विशेष रैपोर्टेयर क्लेमॉन वोले ने ताज़ा व्याख्या का स्वागत किया है और दोहराया है कि यह डिजिटल गतिविधियों के लिये भी लागू होता है. 

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के सन्दर्भ में यह विशेष रूप से अहम है क्योंकि शान्तिपूर्ण सभाएँ अब ऑनलाइन भी आयोजित की जा रही हैं. 

“डिजिटल टैक्नॉलॉजी और शान्तिपूर्ण सभा के अधिकार के मिलन बिन्दु पर गहनता से ध्यान केन्द्रित करते हुए, आम टिप्पणी 37 (General Comment 37) में एक स्पष्ट फ़्रेमवर्क पेश किया गया है ताकि डिजिटल युग में इस बुनियादी अधिकार की रक्षा हो सके.”

मानवाधिकार समिति की इस व्याख्या से विश्व भर में राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अदालतों में न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण दिशानिर्देश मिलने की बात कही गई है. 

स्पेशल रैपोर्टेयर और वर्किंग ग्रुप संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की विशेष प्रक्रिया का हिस्सा हैं. ये विशेष प्रक्रिया संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार व्यवस्था में सबसे बड़ी स्वतन्त्र संस्था है. ये दरअसल परिषद की स्वतन्त्र जाँच निगरानी प्रणाली है जो किसी ख़ास देश में किसी विशेष स्थिति या दुनिया भर में कुछ प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करती है. स्पेशल रैपोर्टेयर स्वैच्छिक रूप से काम करते हैं; वो संयक्त राष्ट्र के कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें उनके काम के लिये कोई वेतन नहीं मिलता है. ये रैपोर्टेयर किसी सरकार या संगठन से स्वतन्त्र होते हैं और वो अपनी निजी हैसियत में काम करते हैं.

 

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