कोविड महामारी के बावजूद 'एसडीजी के पथ पर अग्रसर रहना होगा'

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक स्वास्थ्यकर्मी एक परिवार को स्वच्छता किट सौंपते हुए.
UN Women/Fahad Kaizer
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में एक स्वास्थ्यकर्मी एक परिवार को स्वच्छता किट सौंपते हुए.

कोविड महामारी के बावजूद 'एसडीजी के पथ पर अग्रसर रहना होगा'

एसडीजी

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में कोविड-19 महामारी से बचने के लिये किये गए ऐहतियाती उपायों के कारण लागू की गई तालाबन्दी जैसे-जैसे खुल रही है, यह भी स्पष्ट होता जा रहा है कि अब पहले की तरह व्यापार करना अकल्पनीय होगा, विशेषत: उन देशों में जो पहले से ही टिकाऊ विकास लक्ष्यों को पूरा करने से बहुत दूर थे. एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के लिये आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग (UNESCAP), संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और एशियाई विकास बैंक (ADB) के वरिष्ठ अधिकारियों का यह लेख इसी विषय पर विमर्श को आगे बढ़ाता है...

टिकाऊ विकास पर उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच की हाल ही में एक वर्चुअल बैठक हुई जिसमें सरकारों और हितधारकों से बेहतर पुनर्बहाली सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया.

एशिया क्षेत्र सबसे पहले कोविड-19 की चपेट में आया जहाँ इस महामारी के विनाशकारी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव महसूस किये गए.

महामारी की जवाबी कार्रवाई के प्रयासों के दौरान यह उजागर हुआ कि हमारे समाज में कितनी बड़ी संख्या में लोग आवश्यक सेवाओं तक पहुँच के बिना, ग़रीबी और भुखमरी के हालात में रहते हैं.

एशिया-प्रशान्त क्षेत्र में लगभग 40 करोड़ लोग फिर से ग़रीबी के ग़र्त में धँस सकते हैं, यानि प्रतिदिन 3.20 डॉलर से कम के ख़र्च पर गुज़ार-बसर करने के लिये मजबूर. 

अनेक देशों में जीवन और आर्थिक नुक़सान को कम करने के लिये बहुत से साहसिक क़दम उठाए जा रहे हैं क्योंकि एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के अनुमान के अनुसार सिर्फ़ इस क्षेत्र में में ही डेढ़ ट्रिलियन डॉलर से ढाई ट्रिलियन डॉलर तक की हानि हुई है. 

राजकोषीय और सामाजिक समर्थन 

महामारी के तात्कालिक स्वास्थ्य और मानव प्रभावों से जैसे ही ध्यान हटेगा, इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का सामना करने के लिये सरकारों और समाजों के समक्ष अभूतपूर्व नीति, नियामक व राजकोषीय विकल्प मौजूद होंगे.

एसडीजी – यानि वर्ष 2030 तक ग़रीबी उन्मूलन और टिकाऊ विकास प्राप्त करने की प्रतिबद्धता -  इस तरह के अशान्त व अनिश्चित समय में रास्ता दिखाने का काम कर सकते हैं.

इन एजेंसियों की नई संयुक्त रिपोर्ट, Fast-Tracking the SDGs: Driving Asia Pacific Transformations, महामारी के मद्देनज़र एसडीजी प्राप्त करने के लि/s छह प्रवेश बिन्दुओं पर प्रकाश डालती है.

इनमें मानव कल्याण और क्षमताओं को मज़बूत करना, स्थाई और न्यायपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं की ओर स्थानान्तरण, टिकाऊ खाद्य प्रणालियों का निर्माण, ऊर्जा के क्षरण को रोकना और ऊर्जा की सार्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करना, टिकाऊ शहरी और उप-शहरी विकास को बढ़ावा देना और वैश्विक पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति शामिल हैं.

इनमें से प्रत्येक प्रवेश बिन्दु महामारी से बाधित हो गया है. फिर भी ये व्यवधान 2030 एजेण्डा की महत्वाकांक्षाओं को प्रतिबिम्बित करते हुए नए नज़रियों और सम्भावनाओं के अवसर पैदा कर सकते हैं.

प्रणाली और संस्थानों का समन्वय 

महामारी ने अनेक प्रमुख प्रणालियों में कमज़ोरी और प्रणालीगत दोष सामने लाकर खड़े कर दिये हैं. हालाँकि, अनेक व्यावहारिक रणनीतियाँ ऐसी भी हैं जिनका कई देशों ने कोविड-19 से पहले और बाद में विकास लक्ष्यों से सम्बन्धितत प्रगति में तेज़ी लाने और सहनक्षमता मज़बूत करने के लिये उपयोग किया है.

देशों ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों का विस्तार करने, सामाजिक सुरक्षा प्रणालियाँ मज़बूत करने, कमज़ोर तबके के लिये नक़दी मुहैया कराने और खाद्य वितरण प्रणाली जैसे अनेक क़दम उठाए हैं. ऐसे प्रयासों के लिये सटीक और नियमित आँकड़ों की उपलब्धता बहुत महत्वपूर्ण है.

सबसे वंचित लोगों और छोटे व मध्यम आकार के उद्यमों (एसएमई) के वित्तपोषण के लिये नवाचार (इनोवेशन) भी अहम है.

अनेक देशों ने भेदभाव के विभिन्न रूपों, विशेषकर लिंग और लिंग आधारित हिंसा के ख़िलाफ़ व्यापक क़दम उठाए हैं.

निजी क्षेत्र और वित्तपोषण संस्थानों के साथ भागीदारी ने रचनात्मक समाधानों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. ये सभी अनुभव आशावादी दृष्टिकोण के लिये आधार प्रदान करते हैं.

जटिलताओं से निपटने के लिये नीति क्रान्तियाँ

कोविड-19 संकट की जवाबी कार्रवाई लोगों की भलाई, उन्हें सशक्त बनाने और समानता को आगे बढ़ाने पर केन्द्रित होनी चाहिये.

प्राकृतिक संसाधनों और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिये मानव और पर्यावरण में समन्वय करना ही ऐसे भविष्य की कुंजी है जिससे यह सुनिश्चित होगा कि मौजूदा समय की इस आपदा जैसा ही कोई संकट भविष्य में फिर से ना देखना पड़े. 

हमें नीति-निर्धारण और व्यवहार में क्रान्ति लाने की आवश्यकता है.

समावेशी और जवाबदेह शासन प्रणाली, भविष्य के झटकों के लिये सहनशील और अनुकूल संस्थाएँ, सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य बीमा और मज़बूत डिजिटल बुनियादी ढाँचा, आवश्यक परिवर्तनों का हिस्सा होंगे.

ये सभी उपाय कम कार्बन और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ बुनियादी ढाँचे और हरित ऊर्जा के भविष्य की ओर बढ़ने से प्रेरित हैं.

हरित अर्थव्यवस्था

एशिया और प्रशान्त क्षेत्र के बहुत से देश विकास के लिये हरित पुनर्बहाली और समावेशी दृष्टिकोण लेकर महत्वाकांक्षी नई रणनीति विकसित कर रहे हैं.

कोरिया गणराज्य ने हाल ही में दो केन्द्रीय स्तम्भों के आधार पर एक नए सौदे की घोषणा की: डिजिटलीकरण और डी-कार्बनाइज़ेशन.

बहुत से देश, जो पहले से ही महत्वाकांक्षी स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों और जलवायु कार्रवाई के समर्थक रहे हैं, वो "ब्लू रिकवरी" पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, जिसमें मत्स्य प्रबन्धन के लिये अधिक टिकाऊ दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया जाता है.

भारत ने हाल ही में इस क्षेत्र में सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयन्त्र के संचालन की घोषणा की है.

चीन जीवाश्म ईंधन उद्योगों की तुलना में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अधिक रोज़गार पैदा कर रहा है.

हमारे क्षेत्र के बहुत से देश कोविड-19 पुनर्बहाली के हिस्से के रूप में सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों का इस तरह विस्तार कर रहे हैं जिससे हाशिये पर धकेले हुए लोगों को केवल इसी समय नहीं, बल्कि हमेशा ही, नीतियों के केन्द्र में रखा जा सके, इनमें अनौपचारिक सैक्टर के कामगार विशेष रूप से शामिल हैं.

संयुक्त राष्ट्र और एशियाई विकास बैंक यानि एडीबी जैसी संस्थाएँ संकट की साझा प्रतिक्रिया में सहयोग करने में जुटी हुई हैं. अब यह महत्वपूर्ण है कि हम एसडीजी प्राप्त करने के लिये देशों को वो समर्थन हासिल करने में मदद करें जो आगे बढ़ने में उनके लिये सहायक हो.

लेखकगण:

आर्मिडा सालसियाह अलिसहबाना - संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव और एशिया और प्रशान्त के लिए आर्थिक एवँ सामाजिक आयोग (UNESCAP) की कार्यकारी सचिव;

कन्नी विग्नराजा - संयुक्त राष्ट्र  सहायक महासचिव और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)) में एशिया और प्रशान्त के लिये क्षेत्रीय ब्यूरो की निदेशक;

बंबांग सुसन्तोनो - एशियाई विकास बैंक (ADB) में ज्ञान प्रबन्धन और टिकाऊ विकास विभाग के उपाध्यक्ष.