यमन: बेहतर भविष्य के लिये योजना की बुनियाद हैं जनता की चिन्ताएँ व आशाएँ

16 जुलाई 2020

यमन में सरकार और अन्सार अल्लाह के बीच हिंसक संघर्ष छठे वर्ष में प्रवेश कर रहा है. देश में हिंसा और अस्थिरता का यमनी नागरिकों के जीवन पर गहरा असर पड़ा है. यमन में संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने यूएन न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में देश में मौजूदा हालात और चुनौतियों व लम्बे समय से शान्ति बहाली के लिये किए जा रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की है...

वर्ष 2015 में लड़ाई की वजह से देश में हालात तब और ज़्यादा ख़राब हो गए जब अन्तरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के अनुरोध पर सऊदी अरब के नेतृत्व में एक गठबन्धन ने सैन्य हस्तक्षेप किया ताकि हूती लड़ाकों, यानि अन्सार अल्लाह गुट, को राजधानी सना और अन्य इलाक़ों से पीछे धकेला जा सके.

हूती लड़ाकों ने वहाँ सितम्बर 2014 से क़ब्ज़ा किया हुआ था.

वर्षों से चली आ रही लड़ाई के कारण लाखों लोग भुखमरी व कुपोषण का शिकार हैं और यमन में इन हालात के कारण वह दुनिया का सबसे ख़राब मानवीय संकट बन गया है. 

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश की ओर से उनके विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स यमन में युद्ध का अन्त करवाने के लिये शान्ति प्रयासों में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. 

युद्धरत पक्ष मध्यस्थता प्रक्रिया का हिस्सा हैं और प्रक्रिया जारी है, लेकिन कोविड-19 महामारी और स्वास्थ्य व अर्थव्यवस्था ढाँचों पर उसके प्रभावों के कारण इन प्रयासों को तेज़ी से आगे बढ़ाने की ज़रूरत महसूस की जा रही है. हिंसा की आँच में झुलस रहे लोगों के लिए महामारी और ज़्यादा मुश्किल हालात पैदा कर सकती है. 

मार्टिन ग्रिफ़िथ्स ने ईमेल द्वारा किये गए इस इंटरव्यू के शुरू में  शान्ति वार्ता पर अब तक हुई प्रगति से अवगत कराया... 

“यह प्रक्रिया मार्च 2020 में शुरू हुई जब यूएन महासचिव ने यमन में युद्धरत पक्षों से लड़ाई रोकने, कोविड-19 के ख़तरे पर ध्यान केन्द्रित करने और राजनैतिक समाधान ढूँढने के लिए इस अवसर का इस्तेमाल करने का आहवान किया था. 

यमन सरकार, अन्सार अल्लाह और अन्य यमनी पक्षों व नागरिक संगठनों ने महासचिव की इस अपील का स्वागत किया था. 

मार्च के अन्त में, मेरे कार्यालय ने यमन सरकार और अन्सार अल्लाह के साथ राष्ट्रव्यापी युद्धविराम, मानवीय राहत व आर्थिक उपायों, और हिंसक संघर्ष के पूर्ण रूप से ख़ात्मे के लिये राजनैतिक प्रक्रिया की तत्काल बहाली पर समझौते के मसौदे सम्बन्धित पक्षों को उपलब्ध कराए. 

हमें अप्रैल महीने के शुरू में दोनों पक्षों से इन मसौदों पर उनकी राय मालूम हुई. दोनों पक्षों के रुख़ पर विचार-विमर्श के बाद हमने मध्य-अप्रैल के बाद उन्हें कुछ बदलावों के साथ एक नया मसौदा भेजा ताकि उनके मतभेद दूर किये जा सकें. 

इसके बाद दोनों पक्षों के साथ कई दौर की द्विपक्षीय वार्ता हो चुकी है और यह प्रक्रिया आज भी जारी है. जब तक आपसी बातचीत होती रहेगी तब तक प्रस्तावित समझौते के मसौदे में बदलाव होता रहेगा. 

यह प्रक्रिया लम्बी और चुनौतीपूर्ण रही है, इसलिये भी क्योंकि ये वर्चुअल माध्यमों के ज़रिये हो रही है. इतने सम्वेदनशील समझौते पर चर्चा बेहद मुश्किल है, वो भी दोनों पक्षों के बीच दरकते भरोसे और सभी मोर्चों पर सैन्य लड़ाई के जारी रहने की पृष्ठभूमि में. 

एक मध्यस्थ के तौर पर दोनों पक्षों के रुख़ में खाई को पाटना मेरी ज़िम्मेदारी है, चाहे वो मतभेद कितने भी व्यापक क्यों ना हों. तब तक जब तक आपस में एक ऐसे समझौते पर सहमति नहीं बन जाती जिससे यमनी जनता की आकाँक्षाएँ पूरी होती हों. 

मैं लड़ाई ख़त्म करने, लोगों की पीड़ाओं को ख़त्म करने और हिंसक संघर्ष के अन्त पर केन्द्रित शान्ति वार्ता की बहाली के अपने उद्यम में पीछे नहीं हटूँगा.

UN Photo/Manuel Elias
यमन में स्थिति से सुरक्षा परिषद को अवगत कराते विशेष दूत मार्टिन ग्रिफ़िथ्स.

जब तक सभी पक्ष इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं, तब तक यमन में शान्ति के लिए उम्मीद क़ायम है.

साझा घोषणापत्र से अपने आप यमन में हिंसा का अन्त नहीं होगा. लेकिन यमन में तत्काल राष्ट्रव्यापी युद्धविराम हासिल करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण क़दम होगा.

इससे यमन की जनता की मुश्किलें आसान हो जाएँगी और व्यापक रूप से हिंसक संघर्ष का अन्त करने के लिये शान्ति वार्ता का रास्ता खुलेगा.

साझा घोषणापत्र में युद्धविराम का उल्लेख बहुत पहले से लम्बित है. जनवरी से हमने देश के विभिन्न हिस्सों में नए सिरे से सैन्य संघर्ष को देखा है. 

दो ही दिन पहले हाजाह में एक हवाई हमले में सात बच्चे और दो महिलाओं की मौत हो गई. यमन इस युद्ध के विनाशकारी नतीजों का सामना करने के लिये मजबूर हैं और उन्हें ढहती अर्थव्यवस्था व कोरोनावायरस के तबाही वाले फैलाव से भी जूझना पड़ रहा है.

ये भी पढ़ें - यमन में मानवीय मदद के लिये दो अरब 60 करोड़ डॉलर का संकल्प

साझा घोषणापत्र में मानवीय राहत और आर्थिक उपायों का उल्लेख भी पहले से लम्बित है. इस घोषणापत्र में अन्य उपायों के अलावा अनेक संकल्प व क़दम उल्लिखित हैं जो निम्न प्रकार हैं:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोग से यमन सरकार और अन्सार अल्लाह के बीच एक साझा अभियान इकाई का गठन प्रस्तावित है ताकि पूरे देश में कोविड-19 के फैलाव से निपटने में असरदार और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए;

स्थानीय प्रशासन के उन कर्मचारियों के वेतन का भुगतान हो जो वर्ष 2014 से वेतन भुगतान डेटाबेस का हिस्सा हैं;  

हिंसक संघर्ष के मामलों में बन्द क़ैदियों और हिरासत में रखे गए लोगों को रिहा किया जाए, यमन में कोविड-19 और अन्य बीमारियों के कारण यह उपाय और भी ज़रूरी हो गया है;

विभिन्न गवर्नरेट में और उनके बीच मुख्य मार्गों को खोला जाना;

सना हवाई अड्डे को खोला जाना और कमर्शियल कंटेनर जहाज़ों और गैस व तेल लेकर आने वाले जहाजों के हुदायदाह बंदरगाह के ज़रिये प्रवेश पर लगी पाबंदियों में ढील देना. साथ ही यह सुनिश्चित करना कि सुरक्षा परिषद द्वारा हथियारों पर लगाए गए प्रतिबन्धों का पालन किया जाए;

और SAFER टैंकर की सुरक्षा सुनिश्चित करना जो पिछले पाँच वर्षों से रास इस्सा में फँसा हुआ है, और जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर तेल रिसाव और ज़्यादा फैलने का ख़तरा है. अगर ऐसा हुआ तो यह यमन और उसके पड़ोसी देशों के लिये एक भारी पर्यावरण आपदा होगी. 

मेरा कार्यालय इनमें से कुछ उपायों पर गहनता से काम करना जारी रखे हुए है और ऐसा मौजूदा बातचीत से अलग हटकर किया जा रहा है. इनमें SAFER मुद्दा भी है क्योंकि इन मुद्दों का कोई हल निकालना वास्तव में तत्काल ज़रूरत है. 

अगर सम्बन्धित पक्ष इन मानवीय ज़रूरतों को पूरा करने पर सहमत होते हैं तो इससे ना सिर्फ़ हर जगह यमनी लोगों की पीड़ा कम होगी बल्कि पक्षों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में एक अहम पड़ाव आएगा. 

सबसे आख़िरी और शायद सबसे अहम, घोषणापत्र में सभी पक्षों से तीन अहम बिन्दुओं पर आधारित शान्ति वार्ता को तत्काल शुरू करने का संकल्प लिया गया है. अतीत की हिंसा को रोकने और इस संघर्ष को स्थाई रूप से ख़त्म करने का यही एकमात्र रास्ता है. 

राजनैतिक क्षितिज के बग़ैर और राजनैतिक मार्ग पर प्रगति के बिना युद्धविराम और साझा घोषणापत्र में आपसी सहमति के उपाय ध्वस्त होते रहेंगे. हमने इसे यमन से पहले भी देखा है और हम इसे फिर नहीं होने देंगे.

©UNFPA
यमन के अमरान में घरेलू विस्थापितों के लियेए बनाया गया एक शिविर.

मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान आपसी सहमति के हमेशा कुछ बिन्दु होते हैं जिनके सहारे आगे बढ़ा जा सकता है. यमन इन मायनों में अलग नहीं है. हम पक्षों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे ताकि आपसी सहमति से आगे बढ़ने और पारस्परिक लक्ष्यों को हासिल करने व इस हिंसक संघर्ष के स्थाई अन्त का मार्ग प्रशस्त हो सके. 

संयुक्त राष्ट्र समावेशन को शान्ति निर्माण का एक मुख्य सिद्धान्त मानता है. आप विभिन्न पक्षकारों और महिलाओं व युवाओं सहित यमनी समाज के भिन्न समूहों के साथ किस तरह सम्पर्क व बातचीत कर रहे हैं? 

कोविड-19 के कारण हमें वर्चुअल माध्यमों का इस्तेमाल करना पड़ा है. इस वजह से समावेशन के नए औज़ारों को आज़माने का अवसर मिला है. ये अनुभव अनेक मायनों में आँख खोल देने वाला है. 

मार्च महीने में तालाबन्दी की शुरुआत से हमने एक डिजिटल समावेशन योजना शुरू की है. इस योजना के तहत हम विविध यमनी समूहों को नियमित रूप से शान्ति वार्ता में हुई प्रगति से अवगत कराते हैं और गोपनीयता भंग किये बिना हम हरसम्भव पारदर्शिता बरतते हैं. 

इन समूहों में महिलाएँ, यमनी नागरिक, अन्तरराष्ट्रीय संगठन, मीडियाकर्मी, और युवा नागरिक समाज कार्यकर्ता सम्मिल्लित हुए. 

हमने इन लोगों के साथ साझा घोषणापत्र के बिन्दुओं पर विचार-विमर्श किया और साथ ही उसे लागू करने की प्रक्रिया को समावेशी बनाने के तरीक़ों पर चर्चा की.  मसलन, एक बैठक में युद्धविराम को लागू करते समय लैंगिक नज़रिये से ज़रूरतों को समझने का प्रयास किया गया. 

हमने दो दिवसीय वर्चुअल इंटरएक्टिव परामर्श सत्रों का भी आयोजन किया जिसमें यमन के 650 नागरिकों ने शिरकत की – इनमें अधिकांश यमनी नागरिक समाज से थे. एक तिहाई से ज़्यादा प्रतिभागी महिलाएँ थीं और लगभग आधे युवा थे. यह पहली बार था जब मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई आयोजन हुआ. 

जिन लोगों से हमने बात की है उनमें अधिकाँश लोगों का मानना है कि राष्ट्रव्यापी युद्धविराम का तत्काल लागू होना बेहद आवश्यक है. उनका विश्वास है कि शान्ति प्रक्रिया फिर से शुरू होनी ज़रूरी है और यह बहुत पहले ही हो जाना चाहिये था.

ये भी पढ़ें - 'यमन के प्रति आशावान होने का अवसर'

साथ ही उन मानवीय राहत उपायों की अहमियत और ज़रूरत समझते हैं जिनका उल्लेख साझा घोषणापत्र में किया गया है. 

हमने लोकतान्त्रिक भविष्य सुनिश्चित करने के लिये गारण्टी की ज़रूरत के प्रति उनकी चिन्ताओं को सुना. यह भविष्य मानवाधिकारों, जवाबदेह शासन और समान नागरिकता के सिद्धान्तों पर आधारित होगा. 

और यमन में हिंसक संघर्ष के समाप्त ना होने से उपजी उनकी हताशा को भी हमने बड़ी स्पष्टता से सुना. 

हम इस हताशा को समझते हैं. ये डर और चिन्ताएँ भविष्य के लिये हमारी योजनाओं के केन्द्र में हैं. मैं इतनी बड़ी संख्या में यमन के लोगों की निरन्तर भागीदारी का आभारी हूँ. अपने देश के शान्तिपूर्ण भविष्य के लिये उनके प्रेरणादायी, साहसी और अथक प्रयासों से मैं बहुत प्रभावित हुआ हूँ.

हम डिजिटल माध्यमों से अपनी पहुँच को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, साथ ही ऑफ़लाइन भी स्थानीय समुदायों से सम्पर्क साधने और उन तक पहुँचने के विकल्प आज़मा रहे हैं – ख़ासकर उन तक जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है.

हम यमन में शान्ति पैरोकारों का नैटवर्क भी बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे हैं ताकि शान्ति एजेण्डा को आगे बढ़ाया जा सके, शान्ति प्रक्रिया के दौरान और फिर संक्रमण काल में भी.

इस घोषणापत्र का एक घटक युद्धविराम है. हमने हाल के समय में सैन्य संघर्ष को तेज़ होते देखा है, मारिब और अल जाफ़ गवर्नरेट सहित अन्य इलाक़ों में.  यही बात देश के दक्षिणी इलाक़ों के लिये भी सच है. हमारी समझ है कि आप इस मोर्चे पर सम्बन्धित पक्षों से बातचीत कर रहे हैं. फ़िलहाल लड़ाई के जारी रहने के बीच बातचीत के लिये क्या मायने बचे हैं?

सैन्य संघर्ष का जारी रहना हर बात को और भी मुश्किल बना रहा है. सभी पक्षों की तरफ़ के आम लोगों को इसकी एक बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ती है. 

यह स्थिति कोविड-19 के फैलाव से असरदार ढँग से निपटने की कार्रवाई को चुनौतीपूर्ण बनाती है और पिछले पाँच सालों में पहले ही बहुत कुछ सह चुकी जनता की मानवीय पीड़ा को और ज़्यादा गम्भीर बनाती है.

WFP/Ghassan Yousef
हुदायदाह बंदरगाह के ज़रिये विश्व खाद्य संगठन राहत पहुँचा रहा है.

मुझे निराशा है कि हमारी वार्ता के दौरान भी हम और ज़्यादा इलाक़ों पर क़ब्ज़े की मुहिम को प्रत्यक्ष तौर पर देखते हैं. और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महामारी के फैलने के बावजूद लड़ाई ना तो रुकी है और ना ही धीमी हुई है.

लेकिन दो बातें मुझे स्पष्टता से कहने दें. पहली, मारिब पर लगातार हमले अस्वीकार्य हैं. मुझे डर है कि इन हमलों से यमन में शान्ति की सम्भावनाएँ कमज़ोर होंगी.  
दूसरा, अपना रास्ता बदलने, शान्तिपूर्ण राजनीति के मार्ग और सैन्य संघर्ष के बजाय बातचीत से विवाद सुलझाने के प्रयासों पर वापिस लौटने में अभी देर नहीं हुई है. 

सभी पक्ष लगातार यह कहते हैं कि जैसे ही युद्धविराम समझौते पर सहमति बनेगी वे लड़ाई रोकने के लिये संकल्पित हैं. 

मैं उनसे उम्मीद करता हूँ कि वे युद्धविराम समझौते पर बातचीत के अपने शुरुआती संकल्प के अनुरूप बर्ताव करें और वार्ता के दौरान सक्रिय सैन्य अभियानों से परहेज़ करें.

यमनी प्रशासन के हज़ारों कर्मचारियों को सालों से वेतन नहीं मिला है. इससे यमन में पीड़ा और ज़्यादा गहरी हुई है, और कोरोनावायरस महामारी की वजह से आर्थिक दबाव इसे और बढ़ा रहे हैं. ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि उत्तर में ईंधन की कमी का संकट फैल रहा है. 

स्टॉकहॉम समझौते में ईंधन और तेल के अन्य उत्पाद भरे जहाज़ों के अल हुदायदाह बन्दरगाह से गुज़रने की अनुमति की बात कही गई थी. और कहा गया था कि बन्दरगाह के राजस्व से यमनी प्रशासन के कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाएगा. आप इस प्रावधान को लागू करने में हुई प्रगति का मूल्याँकन किस तरह करेंगे? 

पिछले वर्ष मेरे कार्यालय ने अस्थाई इन्तज़ाम के कुछ उपायों के लिये पक्षों के बीच मध्यस्थता की थी ताकि स्टॉकहॉम में लिये गए संकल्पों को पूरा करने में उनकी मदद की जा सके. 

इनमें हुदायदाह बन्दरगाह से एकत्र होने वाले राजस्व को हुदायदाह में स्थानीय शाखा के ज़रिये यमन के सैन्ट्रल बैंक तक पहुँचाना था जिससे हुदायदाह और यमन में अन्य इलाक़ों में स्थानीय प्रशासन के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान करने में मदद मिले.

इस अस्थाई इन्तज़ाम की शर्तों के तहत पक्षों ने सहमति जताई थी कि कस्टम, टैक्स और ईंधन व तेल के अन्य उत्पादों को लेकर आ रहे जहाज़ों से मिलने वाले अन्य राजस्वों को हुदायदाह में सैन्ट्रल बैंक की स्थानीय शाखा में जमा कराया जाएगा और फिर आपसी सहमति से तैयार प्रक्रिया के अनुरूप उसका वितरण किया जाएगा.         

दुर्भाग्यवश, इस साल के शुरू में अन्सार अल्लाह द्वारा एकतरफ़ा ढँग से इस धनराशि को निकाले जाने के बाद से इन इन्तज़ामों पर फ़िलहाल रोक लगी हुई है.

मैंने अन्सार अल्लाह से सुधारात्मक उपायों के लिये कहा है और इसमें उस धनराशि के इस्तेमाल सम्बन्धी दस्तावेज़ को मुहैया कराना भी है.  

हाल ही में मेरे रियाद दौर के बाद यमन सरकार ने मानवीय आधार पर चार जहाज़ों को अनुमति दे दी जो असाधारण था. साथ ही सरकार ने मेरे कार्यालय के साथ बातचीत की इच्छा ज़ाहिर की है ताकि समस्या का एक टिकाऊ समाधान निकल सके. मैं इस क़दम का बहुत स्वागत करता हूँ लेकिन इससे अस्थाई तौर पर ही राहत मिलेगी.

मेरा कार्यालय सम्बद्ध पक्षों के साथ मिलकर काम कर रहा है ताकि आगे बढ़ने का रास्ता पारस्परिक सहमति से तय किया जा सके. हुदायदाह बन्दरगाह से मिलने वाले राजस्व का इस्तेमाल यमन की जनता की भलाई के लिये होना चाहिए, स्थानीय प्रशासन के वेतन के भुगतान में योगदान के रूप में. 

इस अहम समय में, यमनी जनता की ईंधन तक आसान, बेरोकटोक और नियमित आपूर्ति जारी रखनी होगी. ईंधन की आपूर्ति में कमी या उसकी क़िल्लत के यमन में दैनिक जीवन और स्वास्थ्य क्षेत्र में गम्भीर मानवीय नतीजे होंगे. 

WFP/Mohammed Awadh
यमन के अदन में एक क्षतिग्रस्त घर.

यमन के भविष्य के लिये संयुक्त राष्ट्र की क्या परिकल्पना है?

हमारी दूरदृष्टि और यमन के लिये उम्मीद एक ऐसे स्थान पर पहुँचना है जहाँ यमनी जनता के पास अपने भविष्य के लिये ख़ुद फ़ैसला लेने के औज़ार होंगे और ये लोकतन्त्र, मानवाधिकार, जवाबदेह शासन व समान नागरिकता के ज़रिये किया जाएगा.  

हम ऐसी अन्तरिम अवधि के लिए प्रयासरत हैं जिससे आपसी सहमति और साझीदारी की भावना के साथ सत्ता में साझीदारी वाले राजनैतिक भविष्य का आगमन सम्भव हो सके.

जहाँ हिंसा का स्थान शान्तिपूर्ण संवाद ले, और जब यमनी समाज के सभी राजनैतिक व सामाजिक घटक एक दूसरे को स्वीकार करें और देश की साझा भलाई के लिये मिलकर काम करें.   

यह फ़िलहाल एक दूर का सपना दिखाई दे सकता है.

हिंसक संघर्ष के शुरू होने से अब तक व्यापक स्तर पर मानवाधिकारों का हनन, असहिष्णुता और बहिष्करण बढ़ा है. 

एक स्वास्थ्य राजनैतिक जीवन की बुनियादी नींव को बहुत ज़्यादा क्षति पहुँची है, राज्यसत्ता की संस्थाओं और उनमें जनता का भरोसा बहुत कमज़ोर हुआ है. इसके अलावा मीडिया की आज़ादी और नागरिक समाज की स्वतन्त्रता का क्षरण हुआ है.

साथ ही राजनैतिक विरोधियों, मीडियाकर्मियों को निशाना बनाए जाने का चिन्ताजनक रुझान बढ़ा है और हिंसा, नफ़रत व सम्प्रदायवाद का चलन बढ़ा है जो अस्वीकार्य है.  

लेकिन मैं यमन में मानवाधिकार और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से बहुत उत्साहित और प्रेरित हुआ हूँ. मुझे हमेशा उस शानदार उदाहरण का ध्यान आता है जिसे यमन ने राष्ट्रीय संवाद सम्मेलन में स्थापित किया था, जिसके नतीजे का उल्लेख यूएन के सहयोग से होने वाली शान्ति वार्ता में होता रहा है. 

एक समावेशी शान्तिपूर्ण अन्तरिम प्रक्रिया से संवाद को नए सिरे से शुरू करने में मदद मिलेगी, एक बार सहिष्णुता और स्वीकार्यता को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य पर निगाह रखते हुए बीते समय की पीड़ाओं को दूर किया जा सकेगा.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिये यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड