कोविड-19: उथलपुथल भरी दुनिया में ‘बहाव का रुख़ मोड़ने’ की पुकार

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कोविड-19 प्रभावितों के लिए राहत वितरण.
UN Women/Fahad Kaizer
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कोविड-19 प्रभावितों के लिए राहत वितरण.

कोविड-19: उथलपुथल भरी दुनिया में ‘बहाव का रुख़ मोड़ने’ की पुकार

एसडीजी

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि दुनिया मौजूदा समय में विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 सहित अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है जिनसे निपटने के लिए ठोस, निडर व व्यवहारिक समाधानों की आवश्यकता है. यूएन प्रमुख ने मंगलवार को टिकाऊ विकास पर संयुक्त राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण अन्तरराष्ट्रीय मंच की बैठक में उम्मीद जताई कि कोरोनावायरस संकट के व्यापक असर के बावजूद बेहतर ढँग से पुनर्बहाली सम्भव है.

महासचिव गुटेरेश ने माना कि दुनिया वर्ष 2030 तक टिकाऊ विकास लक्ष्य हासिल करने के रास्ते से दूर हटती नज़र आ रही है. उन्होंने मंगलवार को उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच के मन्त्रिस्तरीय खण्ड के आरम्भिक सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा, “हमारी दुनिया में खलबली मची हुई है.”

उन्होंने चिन्ता ज़ाहिर करते हुए कहा कि निर्धनता के ऊँचे स्तर, तेज़ी से बदतर होते जा रही जलवायु आपदा, गहराई से व्याप्त लैंगिक असमानता, और वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता में गहरी खाई के बीच कोविड-19 एक और भारी वैश्विक चुनौती के रूप में उभरा है.

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कोविड-19 के संक्रमण के एक करोड़ 20 लाख से ज़्यादा मामलों, पाँच लाख 50 हज़ार से ज़्यादा मौतों, करोड़ों रोज़गार ख़त्म होने और वर्ष 1870 के बाद प्रति व्यक्ति आय में देखी गई तेज़ गिरावट समस्या की विकरालता को प्रदर्शित करती है.  

“26 करोड़ से ज़्यादा लोग इस वर्ष के अन्त तक अल्पकाल के लिए खाद्य असुरक्षा का शिकार हो सकते हैं – यह संख्या इस संकट से पहले जोखिम का सामना करने वालों लोगों की दोगुनी है.”

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संकट की गम्भीरता को किसी भी तरह से कम करके नहीं आँका जाना चाहिए. इस महामारी का सबसे ज़्यादा असर निर्बलतम समूहों पर हो रहा है.

तब्दीली लाने का समय

यूएन प्रमुख ने देशों के बीच और देशों के भीतर विषमताओं, सुदृढ़ निवेश के अभाव और पर्यावरण के प्रति बेपरवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वजहों से कोविड-19 संकट का और भी ज़्यादा विनाशकारी असर हो रहा है. 

उन्होंने भरोसा जताया कि टिकाऊ विकास लक्ष्यों को अब तक गम्भीरता से ना लिये जाने के बावजूद हालात को बदल पाना अब भी सम्भव है.

“2030 एजेण्डा और टिकाऊ विकास लक्ष्यों के साथ हमारे पास एक सतत और एकजुट करने वाली दूरदृष्टि है. बेहतर जवाबी कार्रवाई और पुनर्बहाली के लिये हमारे निर्णयों को दिशा दिखाने वाला फ़्रेमवर्क.” 

यूएन प्रमुख ने स्पष्ट किया कि दुनिया अब पहले की व्यवस्थाओं में फिर नहीं लौट सकती और इसलिये टिकाऊ विकास लक्ष्यों से प्रेरित समाधान अपनाए जाने होंगे.

उन्होंने उच्चस्तरीय राजनैतिक मंच से अनुभव बाँटने, सफल साबित हुए प्रयासों को समझने और बहुपक्षीय कार्रवाई के लिए नए सिरे से संकल्प लेने का आग्रह किया ताकि वैश्विक स्तर पर बदलाव लाना सम्भव हो सके.

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उच्चस्तरीय राजनैतिक फ़ोरम का लक्ष्य देशों को बेहतर ढँग से उबरने, अपने अनुभव साझा करने और वैश्विक लक्ष्यों को पाने में पेश आने वाली चुनौतियों को दूर करने के रास्तों पर चर्चा करने का एक मंच प्रदान करना है. 

बहुआयामी चुनौतियाँ 

आर्थिक एवँ सामाजिक परिषद (ECOSOC) की अध्यक्ष मोना जुऊल ने महामारी को ना सिर्फ़ मानव स्वास्थ्य के लिये ख़तरा बताया बल्कि विविध आयामों को प्रभावित करने वाला एक संकट भी क़रार दिया.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 से प्रगति को झटका लगा है उसके मद्देनज़र जवाबी कार्रवाई को टिकाऊ विकास एजेण्डा के अनुरूप बनाना होगा और उसकी मदद से ही सामाजिक व आर्थिक प्रगति की रफ़्तार को तेज़ किया जा सकता है.

मोना जुऊल ने हालात में बेहतरी के लिए ज़रूरी क़दमों का ज़िक्र करते हुए बताया कि आर्थिक लाभों को साझा करना, सामाजिक संरक्षा कार्यक्रम नए सिरे से संगठित करना, सभी के लिये सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के वादे को पूरा करना, महिलाओं व लड़कियों को सशक्त बनाना और युवाओं की आवाज़ों को सुनना अहम है. 

संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद-बाँडे ने किसी को भी पीछे ना छूटने देने के लिए सामूहिक कार्रवाई तेज़ करने और हालात की कायापलट करने वाले रास्तों के निर्माण का आहवान किया है. 

यूएन महासभा अध्यक्ष ने सभी के लिये सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने, मानवाधिकारों की रक्षा करने, स्वास्थ्य व बुनियादी ढाँचे में निवेश को बढ़ावा देने और शिक्षा, स्वच्छ जल व साफ़-सफ़ाई को प्राथमिकता देने की आवश्यकता दोहराई है.

उन्होंने कहा कि प्रगति के लिये वित्तीय संसाधनों की ज़रूरत होगी जिसे बेहतर शासन प्रणाली, न्यायोचित टैक्स प्रणाली, और धन के ग़ैरक़ानूनी लेनदेन पर अंकुश लगाकर हासिल किया जा सकता है. 

महासभा अध्यक्ष ने ज़ोर देकर कहा कि मज़बूत राजनैतिक इच्छाशक्ति और सुदृढ़ संस्थाओं से ही टिकाऊ समाधान निकलते हैं. यह समय बेहतर पुनर्निर्माण, अपनी महत्वाकाँक्षा बढ़ाने और वैश्विक लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में तब्दील करने का है ताकि हमारी आकाँक्षाओं के अनुरूप भविष्य का सृजन हो सके.