एड्स को बच्चों के लिये 'बेवजह मौत' का कारण बनने से रोकना होगा

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बच्चों में एचआईवी के नए संक्रमणों से बचाने के लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे हैं.
© UNICEF/Karin Schermbrucker
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक बच्चों में एचआईवी के नए संक्रमणों से बचाने के लक्ष्य पूरे नहीं हो रहे हैं.

एड्स को बच्चों के लिये 'बेवजह मौत' का कारण बनने से रोकना होगा

स्वास्थ्य

एचआईवी के ख़िलाफ़ लड़ाई का नेतृत्व करने वाली संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनएड्स ने मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी करके कहा है कि एचआईवी के ख़िलाफ़ वैश्विक लड़ाई में प्रगति के बावजूद बच्चों में इसकी रोकथाम की कार्रवाई पीछे रह गई है.

यूएनएड्स की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि एड्स से सम्बन्धित बीमारियों से बच्चों की "अनावश्यक रूप से मौतें हो रही हैं", जबकि सरल व सस्ते उपचार से ही उनका जीवन बचाया जा सकता है.

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यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयीमा ने कहा, "बहुत सारे तरीक़े मौजूद हैं, इतने सारे बच्चों में नए एचआईवी संक्रमणों की रोकथाम की जा सकी है, एचआईवी के साथ जीने वाले इतने सारे बच्चे स्वस्थ हैं, लेकिन बहुत से अन्य बच्चों को इस सुविधा से वंचित होते देखना वाक़ई एक त्रासदी है." 

"हम ये क़तई स्वीकार नहीं कर सकते कि हज़ारों बच्चे अब भी एचआईवी से संक्रमित हैं और हर साल एड्स से सम्बन्धित बीमारियों से बच्चों की मौतें हो रही हैं."

एड्स मुक्त रहें

यूएनएड्स ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट ‘स्टार्ट फ्री, स्टे फ्री, एड्स फ्री’ लक्ष्य की दिशा में प्रगति का एक आकलन पेश किया है.

2016 में, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी, यूएनएड्स और एड्स के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति की आपातकालीन राहत योजना (PEPFAR) में इसके लिए रूपरेखा तैयार की गई थी.

यह रिपोर्ट तीन अवधारणाओं के आधार पर बनाई गई है: कि शिशुओं को एचआईवी-मुक्त पैदा होने का अधिकार है; बच्चों, किशोरों और युवा महिलाओं को रोकथाम उपायों के ज़रिये एचआईवी से मुक्त रहने का हक़ है; और जो बच्चे व युवा वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, उन्हें निदान, इलाज और देखभाल की सुविधाओं व सेवाओं की उपलब्धता का अधिकार है ताकि वे एड्स-मुक्त रह सकें.

सदस्य देशों ने इन लक्ष्यों के अनुरूप 2018 तक 14 वर्ष और उससे कम उम्र के बच्चों में संक्रमण की दर 40 हज़ार से कम करने और इस वर्ष 20 हज़ार से कम करने पर सहमति व्यक्त की थी.

हजारों नए संक्रमण

आँकड़ों से पता चलता है कि 2019 में लगभग एक लाख 50 हज़ार बच्चों में ताज़ा संक्रमण मिला था. जबकि इस संख्या में 2010 के बाद से 52 प्रतिशत की कमी देखी गई है, लेकिन फिर भी 2018 के लक्ष्य से ये चार गुना है.

एचआईवी के साथ जीने वाली 85 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को 2019 में एण्टी-रैट्रोवाइरल उपचार (एआरवी) मिला, लेकिन अध्ययन से पता चलता है कि सभी को इन सेवाओं की उपलब्धता असमान है, यानि बच्चे अब भी संक्रमण का शिकार हो रहे हैं.

सभी देशों ने 2020 तक एचआईवी संक्रमित 14 लाख बच्चों को एण्टी-रैट्रोवाइरल उपचार मुहैया कराने का आहवान किया. साल 2019 में एण्टी-रैट्रोवाइरल उपचार केवल 9 लाख 50 हज़ार बच्चों को ही मिल पाया था.

लक्ष्य अब भी पहुँच में हैं

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा, "एड्स से ग्रसित बच्चों के असरदार इलाज के रास्ते में एक बड़ी बाधा, उपयुक्त बाल चिकित्सा सूत्रों वाली एचआईवी दवाओं की कमी का होना है, जिससे सभी बच्चों को पूर्ण इलाज नहीं मिल पाता."

उन्होंने कहा, “कमज़ोर समूहों के लिए सेवाओं तक पहुँच को मज़बूत करने के लिए सामुदायिक सहभागिता, बेहतर सेवा वितरण और कलंक व भेदभाव से निपटते हुए आगे बढ़ना चाहिये."

यूएनएड्स ने इस हताशाभरी ख़बर के बावजूद कहा है कि दुनिया अब भी ‘स्टार्ट फ्री, स्टे फ्री, एड्स फ्री’ लक्ष्य हासिल करने की प्रतिबद्धता पूरी करने की कोशिश कर सकती है.

यूएनएड्स की कार्यकारी निदेशक विनी ब्यानयीमा ने कहा, “हम बेहतर कार्रवाई कर सकते हैं. हमें बेहतर प्रयास करने चाहिये. हम जानते हैं कि बच्चों का जीवन कैसे बचाया जा सकता है और एचआईवी संक्रमण को आगे फैलने से किस तरह रोका जा सकता है. मैं माँग करती हूँ कि हम कोई क़सर बाक़ी ना छोड़ें. प्रयासों में किसी भी तरह की कमी करना शर्मनाक होगा.”