कुवैत में प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा: रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर का ब्लॉग

3 जुलाई 2020

कुवैत में, संयुक्त राष्ट्र ने उस ज़ैनोफ़ोबिक बयानबाज़ी का मुक़ाबला करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें प्रवासी श्रमिकों पर कोविड-19 फैलाने का झूठा आरोप लगा था. कुवैत में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर  तारेक अलशेख ने इस ब्लॉग में विदेशी निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किये जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला है.

कुवैत की कुल आबादी में 70 प्रतिशत प्रवासी हैं. इन्हें निशाना बनाती नफ़रत की ज़ैनोफ़ोबिक भाषा में वृद्धि से न्यायविदों का एक समूह हरक़त में आया. एक शान्तिपूर्ण और स्थिर समाज के लिए इस सम्भावित ख़तरे से निपटने में अधिकारियों की मदद के लिए, मानव अधिकार के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) और रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर कार्यालय ने मिलकर एक मीडिया अभियान शुरू किया. इस विषय पर हमने कुवैत के अमीर के टैलीविज़न पर उस भाषण का भी स्वागत किया, जिसमें उन्होंने मतभेद दूर करने और ग़लत जानकारियाँ फैलाने के मुद्दे से निपटने पर ज़ोर दिया था.

कुवैत में महामारी के असर से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का ये एक उदाहरण है. हमारी जवाबी कार्रवाई को चार मुख्य क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है. पहला - आपूर्ति श्रृंखलाएँ मज़बूत करके, आर्थिक झटकों का मुक़ाबला करके व छोटे और मध्यम आकार के उद्यमों की मदद करके, हम अर्थव्यवस्था और समाज को तैयार करने में मदद कर रहे हैं. दूसरा - हम प्रवासी श्रमिकों समेत सभी कमज़ोर समूहों की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं. तीसरे - हम विभिन्न माध्यमों से शैक्षिक सामग्री बना रहे हैं  और चौथा, हम विकासात्मक व स्वास्थ्य मुद्दों का सामना करने में लगे हैं.

बेरोज़गारी और निर्वासन

Tarek Azmi Elsheikh
तारेक आज़मी अलशेख, कुवैत में संयुक्त राष्ट्र के रेज़िडेंट कोऑर्डिनेटर.

हम जिन बड़े आर्थिक मुद्दों का सामना कर रहे हैं, उनमें से एक बेरोज़गारी भी है. कुवैत में आने वाले अधिकाँश प्रवासी श्रमिकों के पास बहुत सीमित साधन हैं और महामारी के बाद तो उनमें से बहुत से बेराज़गार हो गए हैं.

बड़ी धनराशि इकट्ठा करके, प्रवासी श्रमिकों की मदद भी की जा रही है, जो कुवैती लोगों की उदारता को दर्शाता है. कुवैत के लोग मन्दी से प्रभावित लोगों को भोजन भी मुहैय्या करा रहे हैं. इण्टरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फॉर माइग्रेशन (IOM) और अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) जैसे संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न निकाय इस संकट से निपटने के तरीक़े खोजने के लिए कुवैती अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं.

हमने प्रवासियों की समस्या हल करने और महामारी के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों को कम करने के लिए दिशानिर्देश और सिफारिशें विकसित की हैं; और हमें यह कहते हुए प्रसन्नता हो रही है कि इनमें से अनेक को वहाँ के अधिकारियों ने अपनाया भी है. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और विश्व बैंक ने बाज़ार अस्थिरता का मुक़ाबला करने के लिए सामाजिक-आर्थिक सलाह भी प्रदान की है.

बेरोज़गारी में वृद्धि का एक परिणाम ये भी है कि अनेक प्रवासी श्रमिकों के पास अब वैध कार्य परमिट नहीं हैं, जिससे उन्हें अपने मूल देश वापस भेजा जा सकता हैं. संयुक्त राष्ट्र प्रवासन नेटवर्क के सदस्य - आईओएम, आईएलओ और ड्रग्स एण्ड क्राइम (यूएनओडीसी), यूएन वीमेन, ओएचसीएचआर और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) - इस मुद्दे पर समन्वित प्रयास कर रहे हैं, ताकि स्वैच्छिक तरीक़े से, अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून के तहत निर्वासन सुनिश्चित किया जा सके. 

आईओएम और यूएनएचसीआर अन्य भागीदारों के साथ मिलकर, प्रवासियों और कमज़ोर तबके के लोगों को भोजन और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) मुहैया करा रहे हैं. साथ ही,   स्वैच्छिक निर्वासित श्रमिकों के लिए केन्द्रों का निरीक्षण करने और घरेलू श्रमिकों सहित घरेलू हिंसा के शिकार लोगों की मदद करने में लगे हैं. 

‘आइए, हम नफ़रत को नकारें'

कुवैत के नागरिकों, देश में रहने वाले प्रवासी श्रमिकों और इस महामारी से निपटने में योगदान देने वाले सभी लोगों के लिए मेरा सन्देश यह है कि ये समय है - एकजुटता, कार्रवाई, मानवतावादी समर्थन और मानवाधिकारों का सम्मान करने का है.

हम इस नए दुश्मन को एकजुटता कि बिना नहीं हरा सकते. साथ ही, एक बुनियादी रणनीति पर समझौता भी बहुत ज़रूरी है, जिसपर संयुक्त राष्ट्र, सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

आइए, हम घृणा को अस्वीकार करें, मानवता की ओर अग्रसर हों, मानवाधिकारों का सम्मान करें और संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने जो कहा है उसे दोहराएँ: जीवित रहने का एकमात्र तरीक़ा है - साथ मिलकर काम करना.

 

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