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कोविड-19: ग़रीबों और कमज़ोर समूहों पर असंगत प्रभाव

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में तालाबन्दी के दौरान अपने परिवार का पेट पालने के लिए, बिना किसी सुरक्षा के ख़तरनाक प्लास्टिक कचरे की छँटनी करता एक बारह वर्षीय लड़का.
© UNICEF/Parvez Ahmad
बांग्लादेश की राजधानी ढाका में तालाबन्दी के दौरान अपने परिवार का पेट पालने के लिए, बिना किसी सुरक्षा के ख़तरनाक प्लास्टिक कचरे की छँटनी करता एक बारह वर्षीय लड़का.

कोविड-19: ग़रीबों और कमज़ोर समूहों पर असंगत प्रभाव

एसडीजी

 संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा है कि कोविड-19 महामारी का सबसे अधिक प्रभाव ग़रीब लोगों, कामकाजी ग़रीबों, महिलाओं और बच्चों, विकलांग व्यक्तियों व हाशिये पर धकेले हुए कमज़ोर समूहों पर असंगत रूप से पड़ रहा है. उन्होंने मंगलवार को यूएन महासभा को सम्बोधित करते हुए ये बात कही.

संयुक्त राष्ट्र की ये वर्चुअल उच्च स्तरीय बैठक, ग़रीबी ख़त्म करने पर नीतिगत संवादों की श्रृंखला की पहली कड़ी थी और इससे महासभा के अध्यक्ष, तिजानी मुहम्मद-बाँडे की पहल, ग़रीबी उन्मूलन गठबन्धन का आधिकारिक उदघाटन भी हुआ.

यूएन महासचिव ने कहा कि महामारी ने संरचनात्मक असमानताओं, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण की कमी जैसी चुनौतियों को सामने लाकर खड़ा कर दिया है, जिसके परिणामस्वरूप समाजों को भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है.

लोगों को ध्यान में रखा जाए 

ग़रीबी उन्मूलन, स्थाई विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र के 2030 एजेण्डा के केन्द्र में है और यही पहला सतत विकास लक्ष्य भी है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने याद दिलाया कि दशकों की प्रगति के बावजूद, ग़रीबी और भुखमरी अब भी बढ़ रही है. 

आर्थिक सुधार योजनाओं में अनौपचारिक क्षेत्र के जोखिम वाले श्रमिकों को प्राथमिकता देना; सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों की रक्षा, विशेषकर जिन्हें महिलाएँ चला रही हों व सार्वभौमिक सामाजिक संरक्षण का विस्तार शामिल किया जाना चाहिए.

महासचिव ने बचाव और पुनर्बहाली पैकेज का आकार वैश्विक अर्थव्यवस्था के कुल मूल्य के 10 प्रतिशत से अधिक के बराबर रखे जाने का भी प्रस्ताव रखा.

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने बेहतर अन्तरराष्ट्रीय सहयोग का आहवान किया; ख़ासतौर पर वित्तीय सहायता प्रदान करके व विदेशी ऋण से राहत देकर या उसकी नियमित वापसी स्थगित करके, विकासशील देशों को अधिक समर्थन देने और अर्थव्यवस्थाओं को समावेशी और हरित विकास के रास्ते पर अग्रसर करना चाहिए.

बुल्गारिया में कूड़ा बीनते बच्चे और वयस्क. (फाइल फोटो), कोविड-19 महामारी का असर ग़रीब लोगों पर ज़्यादा पड़ा है.
© UNICEF/UN039294/Popov
बुल्गारिया में कूड़ा बीनते बच्चे और वयस्क. (फाइल फोटो), कोविड-19 महामारी का असर ग़रीब लोगों पर ज़्यादा पड़ा है.

'मानवता की अन्तरात्मा पर एक धब्बा'

महासभा अध्यक्ष तिजानी मोहम्मद बाँडे ने बैठक को सम्बोधित करते हुए ग़रीबी को "मानवता की अन्तरात्मा पर कलंक" क़रार दिया और कहा कि ये कलंक युद्ध और संघर्ष भड़काने में सबसे अहम भूमिका निभाता है व सतत विकास लक्ष्य हासिल करने के रास्ते में "सबसे बड़ी बाधा" है.

उन्होंने कहा कि अध्ययन से पता चला है कि महामारी के कारण आर्थिक गतिविधियों में आई तेज़ गिरावट से 85 करोड़ से भी अधिक लोगों के ग़रीबी के गर्त में धकेले जाने का जोखिम पैदा हो गया है. 

उन्होंने कहा कि ग़रीबी उन्मूलन के लिए गठबन्धन (The Alliance for Poverty Eradication), सभी सम्भव कोणों से ग़रीबी के सवाल का हल निकालने के लिए बनाया गया है और ये नेटवर्किंग, सूचना का आदान-प्रदान और सहयोग बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगा.

महासभा अध्यक्ष ने ये भी रेखांकित किया कि ये गठबन्धन ग़रीबी समाप्त करने के लिए संयुक्त राष्ट्र का पहला समूह है और उस चुनौती का सामना करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करेगा, जो उनके शब्दों में "स्थाई, जटिल और बहु-पक्षीय" है.