15 लाख अफ़ग़ान ख़ानाबदोशों पर मुसीबत

30 जून 2020

अफ़ग़ानिस्तान में तालाबन्दी तीन महीनों के लिए और बढ़ा दी गई है, जिससे वहाँ के ख़ानाबदोश लोगों के स्वास्थ्य और आजीविका के लिए एक बड़ा ख़तरा पैदा हो गया है. आवाजाही पर प्रतिबन्ध लगने के कारण वो शहरों के बाज़ारों में अपने उत्पाद बेचने के लिये नहीं जा पा रहे हैं. ऐसे में कृषि विकास के लिए अन्तरराष्ट्रीय कोष (आईएफ़एडी) और सामुदायिक पशुधन व कृषि परियोजना (सीएलएपी) की एक संयुक्त परियोजना के तहत घी जैसे भण्डार योग्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने में मदद कर रही है, जिसे बाज़ार खुलने पर ज़्यादा बेचा जा सकता है. इसके अलावा कोविड-19 की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं और परिवारों को मास्क व साबुन सहित स्वच्छता और स्वास्थ्य सुरक्षा किट भी प्रदान किए गए हैं...

 

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समाचार ट्रैकर: इस मुद्दे पर पिछली कहानियां

हिंसा और अस्थिरता से जूझते अफ़ग़ानिस्तान की आज़ादी के 100 वर्ष

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र मिशन (UNAMA) के प्रमुख तादामीची यामामोतो ने कहा है कि स्वाधीनता के 100 वर्ष पूरे कर रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए यह एक अहम क्षण है और आने वाले दिनों में चुनावों से शांति स्थापना की दिशा में प्रगति होने की आशा है. लेकिन देश पर हिंसा और अस्थिरता का संकट अब भी मंडरा रहा है और हाल के दिनों में अफ़ग़ानिस्तान में आतंकी हमलों में आम लोगों को निशाना बनाया गया है जिसकी संयुक्त राष्ट्र ने कड़े शब्दों में निंदा की है.

अफ़ग़ानिस्तान: रमज़ान में आम लोगों को 'जानबूझकर बनाया गया निशाना'

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र ने सभी पक्षों से आग्रह किया है कि हिंसा में आम लोगों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और  उनकी रक्षा के दायित्व  को पूर्ण रूप से निभाया जाना चाहिए. रमज़ान के पवित्र महीने में चरमपंथियों के हमलों में राजधानी काबुल में ही 100 से ज़्यादा आम नागरिकों की मौत हो गई जिसकी यूएन ने निंदा की है.