कोविड-19: संक्रमण के मामले जल्द छू सकते हैं एक करोड़ का आँकड़ा

24 जून 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि अगले हफ़्ते तक कोरोनावायरस से संक्रमितों की सँख्या एक करोड़ का आँकड़ा पार कर सकती है. उन्होंने कहा कि संक्रमण फैलने की तेज़ रफ़्तार महामारी के उपचार और वैक्सीन विकसित करने के प्रयासों के साथ-साथ ऐहतियाती उपायों की अहमियत के प्रति भी आगाह करती है ताकि बीमारी के फैलाव को रोकना और ज़िन्दगियों को बचाना सम्भव हो सके.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने  जिनीवा से पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि अब तक कोविड-19 के 91 लाख से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और चार लाख 70 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई हैं. 

इनमें संक्रमण के लगभग 40 लाख मामले पिछले महीने ही सामने आए हैं जबकि महामारी फैलने के पहले महीने में महज़ 10 हज़ार मामलों की पुष्टि हुई थी.

यूएन प्रमुख ने कहा कि ज़रूरतमन्द मरीज़ों को ऑक्सीजन देना उनकी ज़िन्दगी बचाने के सबसे असरदार उपायों में है. मेडिकल ऑक्सीजन ‘कॉन्सन्ट्रेटर’ के ज़रिये तैयार की जाती है जो वायु से ऑक्सीजन को निचोड़ कर उसे परिष्कृत करता है.

कोविड-19 संक्रमण से गम्भीर रूप से बीमार मरीज़ों द्वारा सामान्य रूप से साँस लेकर भी रक्तधाराओं में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच जाती है जिससे उन्हें साँस लेने में तक़लीफ़ होती है. इसके लिए उन्हें मदद की ज़रूरत होती है.

महामारी के शुरुआती दिनों से ही यूएन एजेंसी ने ऑक्सीजन की अहमियत पर ध्यान केन्द्रित किया है. सही समय पर मदद के अभाव में महत्वपूर्ण कोशिकाओं और अंगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती जिससे मौत हो सकती है. 

जीवनदायी ऑक्सीजन

कोविड-19 के फैलाव की गति तेज़ है और हर सप्ताह लगभग 10 लाख नए मामले सामने आ रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए दुनिया को प्रतिदिन छह लाख 20 हज़ार क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी – यानि क़रीब 88 हज़ार बड़े सिलेण्डर.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने बताया कि अनेक देशों के पास ऑक्सीजन के लिए ज़रूरी उपकरणों का अभाव है और 80 फ़ीसदी से ज़्यादा बाज़ार पर केवल कुछ ही कम्पनियों का नियन्त्रण है. 

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ऑक्सीजन की क़िल्लत से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य उन देशों के लिए ऑक्सीजन ख़रीद रहा है जिन्हें उसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है. इस सिलसिले में आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत के बाद 14 हज़ार ‘कॉन्सन्ट्रेटर’ की ख़रीदारी की गई है जिन्हें आने वाले दिनों में 120 देशों को भेजा जाएगा.

डेढ़ लाख से ज़्यादा ‘कॉन्सन्ट्रेटर’ अगले छह महीनों में उपलब्ध हो सकते हैं जिनकी क़ीमत लगभग दस करोड़ डॉलर होगी. साथ ही यूएन एजेंसी ने नौ हज़ार 800 से ज़्यादा ऑक्सीमीटर ख़रीदे हैं – ये एक ऐसा उपकरण है जिससे मरीज़ के ख़ून में ऑक्सीजन के स्तर को मापा जा सकता है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा कि अब कुछ देशों ने अपनी अर्थव्यवस्थाएँ खोलनी शुरू की हैं और ऐसे में यह सवाल अहम है कि बड़ी सभाएँ सुरक्षित ढँग से किस तरह आयोजित की जा सकती हैं. 

उदाहरण के तौर पर, सऊदी अरब ने वार्षिक हज यात्रा को शुरू करने का फ़ैसला किया है लेकिन यह यात्रा देश में ही रहने वाले और सीमित सँख्या में लोगों के लिए है.

उन्होंने कहा कि संक्रमणों का जोखिम कम करने के लिए यूएन एजेंसी के दिशानिर्देशों की मदद से इस सम्बन्ध में कई परिदृश्यों का विश्लेषण किया गया और उसके बाद ही यह निर्णय लिया गया है.  

यूएन एजेंसी के महानिदेशक ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इस फ़ैसले का समर्थन करता है और कि वह समझ सकते हैं कि अनेक लोगों को इससे निराशा होगी.

उनके मुताबिक यह एक और उदाहरण है जो दर्शाता है कि सभी देशों को स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए कुछ मुश्किल विकल्पों को चुनना होगा. 

 

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