आईसीसी जाँचकर्ताओं पर अमेरिका द्वारा प्रतिबन्ध लगाने का फ़ैसला ‘खेदजनक’

13 जून 2020

अन्तरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) के कामकाज की निगरानी करने वाली ‘असेम्बली ऑफ़ स्टेट पार्टीज़’ के अध्यक्ष ओ-गॉन क्वॉन ने अमेरिकी सरकार के उस फ़ैसले को ख़ारिज किया है जिसमें अफ़ग़ानिस्तान में कथित युद्धापराधों की जाँच कर रहे आईसीसी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कड़े प्रतिबन्ध लगाए जाने की बात कही गई है. उन्होंने ताज़ा घटनाक्रम पर खेद जताते हुए कहा कि ऐसे फ़ैसलों से दण्डमुक्ति के ख़िलाफ़ और सामूहिक अत्याचारों की जवाबदेही तय करने के प्रयास कमज़ोर पड़ेंगे. 

उल्लेखनीय है कि गुरुवार को अमेरिकी विदेश मन्त्री माइक पोम्पेयो, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओब्रायन, रक्षा मन्त्री मार्क एस्पर और अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने अपने निर्णय की जानकारी देते हुए उन आईसीसी अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने की घोषणा की थी जो अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका सहित सभी पक्षों द्वारा किए गए कथित युद्धापराधों की जाँच कार्य में जुटे हैं.

अमेरिकी सरकार ने आईसीसी अधिकारियों के परिवारजनों के ख़िलाफ़ वीज़ा सम्बन्धी पाबन्दियों की भी बात कही है. 

अफ़ग़ानिस्तान में युद्धापराध के आरोपों की आईसीसी द्वारा जांच की ज़िम्मेदारी मुख्य अभियोजक फ़तू बेन्सूडा के पास होगी जिन्होंने नवंबर 2017 में पहली बार कोर्ट के प्री-ट्रायल चैम्बर में अपील दायर की थी.

उस समय उनके कार्यालय ने गम्भीर अपराधों और अति गम्भीर अपराधों के लिए ज़िम्मेदार नज़र आने वाले दोषियों पर राष्ट्रीय स्तर पर प्रासन्गिक कार्रवाई की अनुपस्थिति का हवाला दिया था.  

आईसीसी: ‘स्वतन्त्र और निष्पक्ष’

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने आईसीसी को ‘ग़ैरजवाबदेह अन्तरराष्ट्रीय कुलीन वर्ग का एक राजनैतिक औज़ार क़रार’ था. 

लेकिन ‘असेम्बली ऑफ़ स्टेट पार्टीज़’ के अध्यक्ष ओ-गॉन क्वॉन ने आईसीसी की स्वतन्त्रता और निष्पक्षता को दोहराते हुए कहा कि कोर्ट का सन्चालन रोम सम्विधि के तहत स्थापित प्रणाली के अनुसार किया जाता है. 

इस प्रणाली में स्पष्ट है कि अत्याचार सम्बन्धी अपराधों की जाँच, मुक़दमे और न्याय प्रक्रिया का अधिकार-क्षेत्र सबसे पहले सदस्य देशों के ही पास है.

आईसीसी न्याय पाने की अन्तिम आस है और राष्ट्रीय न्यायिक प्रक्रियाओं की ही पूरक है. 

उन्होंने कहा कि कोर्ट और ‘असेम्बली ऑफ़ स्टेट पार्टीज़’ ने एक समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत की है जिसका लक्ष्य रोम सम्विधि को मज़बूत करना और अत्याचार सम्बन्धी अपराधों के मामलों में असरदार ढँग से जवाबदेही सुनिश्चित करना है. 

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) ने गुरुवार को अमेरिकी निर्णय पर खेद व्यक्त किया था. उच्चायुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने रूपर्ट कोलविल ने जिनीवा में पत्रकारों को बताया था कि इससे आईसीसी द्वारा की जा रही जाँच और न्यायिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ेगा. 

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आईसीसी की स्वतन्त्रता और बिना किसी हस्तक्षेप के उसके काम करने की क्षमता की गारण्टी दी जानी होगी ताकि बिना किसी अनुपयुक्त प्रभावों, प्रलोभनों, दबावों, धमकियों मामलों की जाँच और सुनवाई हो सके. 

यूएन मानवाधिकार प्रवक्ता ने कहा कि मानवाधिकार हनन और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय राहत क़ानूनों के गम्भीर उल्लंघनों के पीड़ितों और उनके परिजनों के पास सच जानने और इन्साफ़ पाने का अधिकार है.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड

समाचार ट्रैकर: इस मुद्दे पर पिछली कहानियां

अफ़ग़ानिस्तान में कथित युद्धापराधों व मानवता के विरुद्ध अपराधों की जांच को हरी झंडी

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने अफ़ग़ानिस्तान और उसकी सीमा के बाहर कथित युद्धापराधों और मानवता के विरुद्ध कथित अपराधों के मामलों की जांच के लिए अनुमति दे दी है. आईसीसी जजों ने इस तरह की जाँच को वीटो करने वाले अपने एक पुराने फ़ैसले को सर्वसहमति से पलटते हुए अफ़ग़ान सुरक्षा बलों, तालिबान और अमेरिकी सैन्यकर्मियों पर लगे युद्धापराधों की जाँच को शुरू करने के पक्ष में फ़ैसला दिया है. 

रोहिंज्या के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच के लिए आईसीसी की हरी झंडी

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय आईसीसी ने रोहिंज्या समुदाय के लोगों के मामले में कथित तौर पर मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों की जाँच के लिए हरी झंडी दे दी है. इनमें मुख्य रूप से रोहिंज्या लोगों के विस्थापन का मामला है जिसकी वजह से 2016 से अब तक म्याँमार से लाखों रोहिंज्या लोग सुरक्षा की तलाश में पड़ोसी देश बांग्लादेश पहुँचे चुके हैं जो वहाँ शरणार्थी हैं. रोहिंज्या शरणार्थियों की संख्या छह से 10 लाख के बीच बताई जाती है.