भारत के पश्चिमी तटों पर चक्रवात निसर्ग की डरावनी दस्तक

4 जून 2020

भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्रों पर स्थित महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाक़ों में बुधवार को निसर्ग तूफ़ान ने डरावनी दस्तक दी. तूफ़ान के कारण कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई और कुछ घायल हो गए. मुम्बई, ठाणे, रायगढ़ समेत महाराष्ट्र के तटवर्ती ज़िलों के अलावा गुजरात के इलाक़ों में भी इस तूफ़ान का असर दिखाई दिया. 
 

हालाँकि मुम्बई पहुँचते हुए निसर्ग तूफ़ान की रफ़्तार धीमी हो गई और वो कोई बड़ा नुक़सान किए बिना ही देश की वित्तीय राजधानी से गुज़र गया. शहर में अनेक स्थानों पर पेड़ गिरे हैं लेकिन जान-माल के ज़्यादा नुक़सान की ख़बर नहीं है. 

सबसे पहले ये समुद्री तूफ़ान मुम्बई से 85 किलोमीटर दक्षिण में स्थित महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले के अलीबाग शहर के पास श्रीवर्धन-दिवे अगार से टकराया.

चक्रवात की रफ़्तार 100 से 120 किमी प्रति घण्टा थी. इसके बाद तेज़ हवाओं और भारी वर्षा के साथ ये तूफ़ान, महाराष्ट्र के पूर्वी ज़िले पुणे की ओर बढ़ गया.

सायक्लोन निसर्ग ज़मीन से टकराने से पहले गम्भीर चक्रवाती तूफ़ान में बदल गया था, लेकिन शाम तक इसकी गति कम होती गई और देर रात तक ये कमज़ोर पड़ गया. 

महाराष्ट्र के तटीय और आन्तरिक ज़िलों में तेज़ हवाओं के साथ भारी वर्षा हुई. हवा की गति 85-95 किमी प्रति घण्टा से लेकर 105 किलोमीटर प्रति घण्टे तक रहने के साथ-साथ तटीय इलाक़ों में समुद्र में लहरें उच्च ज्वार पर दिखीं.

माना जा रहा है कि मुंबई की ओर रुख़ करने वाला सवा सौ साल में ये पहला समुद्री तूफ़ान था.

मुम्बई में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) में आपदा प्रबन्धन के तकनीकी विशेषज्ञ श्रीदत्त कामत ने यूएन न्यूज़ हिन्दी  को बताया कि मध्यम बारिश और तेज़ हवाओं के कारण जगह-जगह पेड़ गिर गए और सम्पत्ति को हानि हुई है, लेकिन इसके अलावा मुम्बई शहर पर इसका बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ा है.

District Collector's Office, Raigad, India
भारत के पश्चिमी तटीय क्षेत्र में आए निसर्ग तूफ़ान से अनेक पेड़ गिर गए और सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचा

तूफ़ान से हानि 

महाराष्ट्र के रायगढ़ ज़िले में, अलीबाग, श्रीवर्धन, उरण और मुरुड़ तालुका में कई स्थानों पर पेड़, फ़सल और कच्चे घरों को नुक़सान पहुँचा. 

पुणे शहर सहित राज्य के अन्य हिस्सों में, अनेक पेड़ गिर गए और टिन की छतें उड़ गईं.

कुछ स्थानों से दीवार गिरने की सूचना भी मिली है. इसके साथ ही बिजली और मोबाइल संचार भी प्रभावित हुआ है.

सभी प्रभावित क्षेत्रों में बहाली की गतिविधियाँ चल रही हैं, जिसमें नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (एनडीआरएफ़), स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (एसडीआरएफ़) और अन्य बचाव दल साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चक्रवात से 4 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है और मुम्बई में सीमेण्ट के खम्भे की चपेट में आने से एक परिवार के 3 लोग घायल हो गए.

वहीं गुजरात में भी चक्रवात की चेतावनी जारी होने पर बचाव और राहत की तैयारियाँ की गई थीं, लेकिन वहाँ निसर्ग तूफ़ान का कोई ख़ास असर नहीं दिखाई दिया.

हालाँकि गुरुवार को दक्षिण गुजरात में भारी बारिश होने का पूर्वानुमान था. 

दोहरी मार 

महाराष्ट्र इस समय कोविड संकट का भी सामना कर रहा है. राज्य में कोविड-19 वायरस के संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं. ऐसे समय में चक्रवात निसर्ग राज्य के लिए एक दोहरी मार साबित हो सकता है.

नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स यानि एनडीआरएफ़ के अनुसार, लगभग एक लाख लोगों को तटीय इलाक़ों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया. 

मुम्बई में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) में आपदा प्रबन्धन के तकनीकी विशेषज्ञ श्रीदत्त कामत ने बताया कि रायगढ़, मुम्बई, ठाणे और पालघर ज़िलों से ही लगभग 50 हज़ार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया था जिनमें से 40 हज़ार लोग तो मुम्बई के ही थे क्योंकि महानगर में आबादी घनी होने के कारण बहुत सारे लोग समुद्र के बहुत नज़दीक रह रहे थे.

उन्होंने बताया कि मुम्बई के लिए ये एक नया अनुभव था क्योंकि यहाँ सवा सौ साल के बाद इस तरह का कोई तूफ़ान आया है.

उन्होंने कहा, “उड़ीसा और बंगाल तो हर साल इस तरह के तूफ़ानों का सामना करते हैं और वहाँ लोगों को मालूम है कि क्या करना है, लेकिन महाराष्ट्र में लोगों को पहले अन्य स्थानों पर जाने से हिचकिचाहट हुई, लेकिन बाद में स्थानीय नेताओं की मदद से ये कार्य सफलतापूर्वक कर लिया गया.” 

श्रीदत्त कामत ने बताया कि राज्य में सभी शरण स्थलों में कोविड-19 की रोकथाम के लिए सारे उपायों पर भी अमल किया जा रहा है. 

उन्होंने कहा, “हमने पूरी ऐहतियात बरती कि हर एक आश्रय स्थल में सामाजिक दूरी का पालन किया जाए. वहाँ लोगों को भेजने से पहले जगहों को कीटाणुरहित किया गया और हाथ धोने और साफ़-सफ़ाई का पूरा ध्यान रखा गया.” 

मुम्बई और उसके आसपास के इलाक़ों में गुरूवार (4 जून, 2020) सुबह से ही भारी बारिश हो रही थी जिससे सड़कों पर पानी भर गया था.

 

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