कोविड-19: हिन्साग्रस्त क्षेत्रों में आम लोगों के समक्ष एक नया ख़तरा

27 मई 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने बुधवार को सुरक्षा परिषद को सम्बोधित करते हुए कहा कि हिन्सा में फँसे मासूम लोगों के सामने कोविड-19 के रूप में अब एक नया और घातक ख़तरा पैदा हो गया है. उन्होंने चेतावनी जारी करते हुए बताया कि कोरोनावायरस विश्व में पहले से मौजूद भंगुरताओं को और भी गम्भीर बना रहा है.  यूएन प्रमुख ने हिन्सक संघर्षों में आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक योजना भी पेश की है.

यूएन प्रमुख ने हिन्सक संघर्षों में आम नागरिकों की सुरक्षा के विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ़्रेन्सिन्ग में कहा कि कोरोनावायरस व्यापक पैमाने पर मानवीय पीड़ा का सबब बन गया है और पहले से ही कमज़ोर स्वास्थ्य प्रणालियों, अर्थव्यवस्थाओं और समुदायों पर बोझ बढ़ा है.

उन्होंने कहा, “कोविड-19 ना सिर्फ़ बीमारी और मौत फैला रहा है, यह लोगों को ग़रीबी और भुखमरी में भी धकेल रहा है.” कुछ मामलों में तो यह दशकों के दौरान हुई प्रगति की दिशा को भी पलट रहा है.

कुछ देशों में ऐहतियाती क़दमों के मद्देनज़र सेवाओं की सुलभता कम हुई है और दमनकारी उपाय अपनाये गये हैं. इन वजहों से सबसे निर्बलों की रक्षा करना पहले से भी ज़्यादा कठिन हो गया है, ख़ासतौर पर हिन्सक संघर्ष वाले इलाक़ों में. 

इसके अलावा, कोविड-19 से शरणार्थियों और घरेलू विस्थापितों के लिए भी ख़तरा है जो भीड़-भाड़ वाले शिविरों और समुदायों में रहने को मजबूर हैं जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं और साफ़-सफ़ाई की समुचित व्यवस्था नहीं होती. 

उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर महामारी के कारण युद्धरत पक्षों को ऐसे समय में कार्रवाई तेज़ करने का मौक़ा दिखाई दे रहा है जब अन्तरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान कहीं और केन्द्रित है या फिर इन हालात में अपनी स्थिति को और मज़बूत कर सकते हैं. 

“दोनों ही परिदृश्यों में हिन्सा में बढ़ोत्तरी हो सकती है और हमेशा इसकी क़ीमत आम लोग चुकाते हैं.”

UNMISS/Nektarios Markogiannis
वर्ष 2019 में दस हिन्सक संघर्षों में 20 हज़ार से ज़्यादा आम लोग हताहत हुए.

शान्तिरक्षा अभियानों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने ध्यान दिलाया कि ‘ब्लू हैलमेट्स’ दुनिया भर में हिन्साग्रस्त क्षेत्रों में फँसे लोगों की रक्षा का सबसे असरदार उपाय हैं.

यूएन शान्तिरक्षक स्वास्थ्य सेवाओं और मानवराहतकर्मियों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं और राहत केन्द्रों तक पहुँच सुनिश्चित करने के काम में जुटे हैं. 

महासचिव गुटेरेश ने दुख जताया कि अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के पालन में प्रगति कम ही दिखाई दी है. दस हिन्सक संघर्षों में 20 हज़ार से ज़्यादा आम लोग हताहत हुए हैं; वर्ष 2019 में हज़ारों बच्चे लड़ाई के दौरान भर्ती किये गये; लाखों की संख्या में विस्थापित लोग, महिलाएँ व लड़कियाँ यौन व लिंग-आधारित हिन्सा का शिकार हैं. 

आम नागरिकों की सुरक्षा पर निराशाजनक तस्वीर पेश करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्सा का विकलाँग व्यक्तियों पर अन्य लोगों के मुक़ाबले ज़्यादा असर होता है. साथ ही यह वैश्विक भुखमरी का शिकार लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी का भी मुख्य कारण है.  

“मानवीय राहतकर्मियों और सम्पत्तियों के ख़िलाफ़ हिन्सा की बड़े पैमाने पर रिपोर्टें मिली.”

“इस महीने काबुल में वैश्विक स्वास्थ्य सँकट के दौरान एक जच्चा-बच्चा अस्पताल पर हमला हुआ और यह सदस्य देशों के लिए और भी ज़रूरी हो जाता है कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव तत्काल लागू किये जाएँ और हिन्सक संघर्ष में स्वास्थ्य देखभाल के प्रावधानों की रक्षा हो.”

यूएन प्रमुख ने अपने सम्बोधन को समाप्त करते हुए हिन्सक संघर्षों की रोकथाम, निपटारे और उनकी संख्या में कमी लाने के लिए और ज़्यादा प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया. साथ ही अन्तरराष्ट्रीय क़ानून और जवाबदेही को सुनिश्चित किये जाने पर भी ज़ोर दिया. 

उन्होंने कहा कि टिकाऊ राजनैतिक समाधान ही वो एकमात्र रास्ता है जिससे आम लोगों की रक्षा की जा सकती है.

वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए  चार-सूत्री योजना पेश की:  

- आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए शहरी इलाक़ों में हिन्सा से निपटने की रणनीति व तरीक़ों की समीक्षा व पुनर्विचार करना
- हथियारबन्द ड्रोन के इस्तेमाल पर अन्तरराष्ट्रीय क़ानून के पालन को सर्वोपरि रखना 
- घातक स्वचालित शस्त्र प्रणालियों से उपजे क़ानूनी और नैतिक पहलुओ से निपटना 
- नागरिकों के लिए अहम बुनियादी ढाँचों पर साइबर हमले में डिजिटल टैक्नॉलॉजी के दुर्भावनापूर्ण इस्तेमाल से निपटा जाना 

 

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