कोविड-19: दुष्प्रचार व नफ़रत से टक्कर के लिए यूएन की नई पहल - 'Verified'

21 मई 2020

संयुक्त राष्ट्र ने कोविड-19 महामारी के दौरान फैलती झूठी सूचनाओं और नफ़रत सन्देशों पर लगाम कसने के इरादे से एक नई पहल शुरू की है. इस मुहिम के ज़रिए दुनिया भर में लोगों को सशक्त बनाया जाएगा ताकि वे सटीक सूचना साझा करके लोगों की ज़िन्दगियाँ बचाई जा सकें और वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा मिल सके.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने गुरुवार को ‘Verified’ यानि ‘प्रमाणिक’ मुहिम की शुरुआत की है जिससे डिजिटल माध्यमों पर भरोसेमन्द और सटीक जानकारी की मात्रा और पहुँच बढ़ाने के लिए ‘डिजिटल फ़र्स्ट रिस्पॉन्डर्स’ की एक टीम तैयार की जाएगी. 

“हम अपने वर्चुअल माध्यमों में अपनी जगह उन लोगों के लिए नहीं छोड़ सकते जो झूठ, डर और नफ़रत फैलाते हैं.”

“ग़लत जानकारी ऑनलाइन - मैसेजिन्ग ऐप, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के ज़रिये फैलती है. इसे फैलाने वाले लोग आधुनिक प्रोडक्शन तरीक़ों और सन्देश वाहक माध्यमों का सहारा लेते हैं.”

“वैज्ञानिकों और संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को इसका मुक़ाबला करने के लिए लोगों तक पहुँचना होगा और उन तक ऐसी जानकारी पहुँचानी होगी जिस पर वे भरोसा कर सकें.” 

विज्ञान, एकजुटता और समर्थन

‘वैरीफ़ाइड’ मुहिम के तहत सूचना तीन मुख्य थीमों के आधार पर प्रदान की जाएगी: 

  • विज्ञान – जीवन बचाने के लिए 
  • एकजुटता – स्थानीय और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 
  • समाधान – कोविड-19 से प्रभावित जनसमूहों को सहारा देने की पैरवी करने के लिए

इस पहल में उन पुनर्बहाली पैकेजों को बढ़ावा दिया जाएगा जो जलवायु संकट से निपट रहे हैं और निर्धनता, विषमता व भुखमरी के मूल कारणों को दूर करने में जुटे हैं. 

दुनिया भर में लोगों को ‘सूचना वॉलन्टियर्स’ के तौर पर इस मुहिम का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया है ताकि वे अपने परिवारों और समुदायों के साथ भरोसेमन्द सामग्री शेयर करें और उनके साथ सम्पर्क बनाए रखकर सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें. 

इन वॉलन्टियर्स को ‘डिजिटल फ़र्स्ट रिस्पॉन्डर्स’ कहा गया है यानि डिजिटल माध्यमों पर चुनौतियों से निपटने के लिए पहली पाँत में खड़े कार्यकर्ता.

इन वॉलन्टियर्स को हर दिन सोशल मीडिया पर आसानी से शेयर की जा सकने वाली प्रमाणिक सामग्री भेजी जाएगी.

इसमें संक्षिप्त और सरल सन्देश होंगे जिसमें ग़लत जानकारी और धारणाओं को तथ्यों के आधार पर दूर किया जाएगा. 

‘वैरिफ़ाइड’ मुहिम में यूएन एजेंसियों के अलावा, नागरिक समाज संगठन, व्यवसाय और मीडिया संगठन भी शामिल हैं जो विश्वसनीय और सटीक सामग्री शेयर करेंगे और सोशल मीडिया मंचों पर नफ़रत और नुक़सानदेह सूचनाएँ हटाएँगे. 

वैरिफ़ाइड मुहिम का नेतृत्व यूएन का ग्लोबल कम्यूनिकेशन्स विभाग कर रहा है और यूएन न्यूज़ इसी विभाग का हिस्सा है. 

इसे ‘पर्पज़’ (Purpose) टीम के सहयोग से शुरू किया गया है जो दुनिया का एक अग्रणी समाजिक उपक्रम (Social mobilization) संगठन है. साथ ही इसे IKEA फॉउन्डेशन और ल्युमीनेट का भी समर्थन हासिल है. 

यूएन कम्यूनिकेशन विभाग की प्रमुख और अवर महासचिव मलीसा फ़्लेमिन्ग के मुताबिक अनेक देशों में ग़लत सूचनाएँ डिजिटल माध्यमों से फैल रही हैं जो महामारी पर जवाबी कार्रवाई के रास्ते में बाधा खड़ी कर रही हैं और अशान्ति फैला रही हैं. 

उन्होंने कहा कि व्यथित करने वाले ऐसे प्रयास हो रहे हैं जिनमें इस संकट का इस्तेमाल Nativism को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यक समूहों को निशाना बनाने में किया जा रहा है. इससे आर्थिक व सामाजिक जीवन में असर के सामने आने पर समाजों पर दबाव बढ़ेगा. 

यूएन विभाग की प्रमुख के मुताबिक ‘वैरीफ़ाइड’ मुहिम के ज़रिये इन रुझानों को पलटा जाएगा और मानवीयता को बढ़ावा देने, शरणार्थियों व प्रवासियों के योगदान को रेखांकित करने वाली सामग्री को प्रोत्साहन मिलेगा. इससे वैश्विक सहयोग की भावना को मज़बूती मिलेगी.

Verified_Hindi from Share Verified on Vimeo.

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लि/s यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एण्ड्रॉयड

समाचार ट्रैकर: इस मुद्दे पर पिछली कहानियां

कोविड-19: दुष्प्रचार व झूठी सूचनाएँ बन गई हैं - 'Disinfodemic'

दुनिया भर में निराधार और झूठ पर आधारित जानकारी की इतनी भरमार हो गई है कि बहुत से टिप्पणीकार अब उस ग़लत जानकारी की तूफ़ानी बौछार का हवाला देने लगे हैं. कोविड-19 महामारी से संबंधित ग़लत सूचनाओं व दुष्प्रचार के इस तूफ़ान को ‘डिस्इन्फ़ोडेमिक’ कहा गया है यानी ये भी किसी महामारी से कम नहीं है. 

नफ़रत की सूनामी से तत्काल निपटना होगा: यूएन प्रमुख

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नफ़रत और असहिष्णुता को एक ऐसा दैत्य बताया है जिसके कई सिर हैं और जिसमें से नफ़रत और हिंसा भरी सूनामी लहरें उफ़ान पर हैं. डिजिटल माध्यमों पर कट्टरता और नफ़रत के प्रसार पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इससे लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक स्थिरता को ख़तरा पैदा हो रहा है.