कोविड-19: 'वैश्विक एकजुटता' से तय होगा साझा सफलता और विफलता का फ़ासला

18 मई 2020

वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए सभी देशों द्वारा एक व्यापक और समन्वित प्रयास की आवश्यकता है अन्यथा विफलता हाथ लगने का ख़तरा है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सोमवार को जिनीवा में विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली के सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेन्सिन्ग के ज़रिये सम्बोधित करते हुए यह बात कही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने भी आगाह किया है कि विश्व आबादी का अधिकांश हिस्सा अब भी इस वायरस से संक्रमित होने के जोखिम का सामना कर रहा है. 

विश्व स्वास्थ्य ऐसेम्बली विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्णय-निर्धारक संस्था है जिसका दो दिवसीय 73वाँ सत्र सोमवार को शुरू हुआ. कोविड-19 से निपटने के ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र इस सत्र का दो सप्ताह के बजाय दो दिन का वर्चुअल आयोजन किया गया है.

यूएन प्रमुख ने वर्चुअल ऐसेम्बली में हिस्सा ले रहे सदस्य देशों को सचेत किया कि कोरोनावायरस के ख़िलाफ़ प्रयासों में थोड़ी-बहुत एकजुटता के बावजूद वैश्विक स्तर पर जवाबी कार्रवाई में एकता कम ही देखने को मिली है. 

कुछ देशों ने कोरोनावायरस के इतनी तेज़ गति से दुनिया भर में फैलने की जाँच किए जाने की माँग उठाई है लेकिन यूएन प्रमुख ने कहा है कि ऐसा करना अभी जल्दबाज़ी होगी. 

“जो सबक़ सीखे जाएँगे, वे ऐसी ही चुनौतियों से असरदार ढंग से निपटने में ज़रूरी होंगे, जो भविष्य में उभर सकती हैं. लेकिन अभी वो समय नहीं है.”

“यह समय एकता, अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ एकजुटता से काम करने और इस वायरस व उसके तबाही भरे नतीजों को रोकने का है.”

उन्होंने चेतावनी भरे अन्दाज़ में कहा कि या तो इस महामारी से हम एक साथ मिलकर निपटने में सफलता मिलेगी या फिर दुनिया विफल हो जाएगी.

उनके मुताबिक इसी वजह से एक अति-सूक्ष्म वायरस ने भी हमें घुटनों के बल ला दिया है. महासचिव गुटेरेश ने ज़ोर देकर कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का स्थान कोई और नहीं ले सकता और उसे अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है. 

“अनेक देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफ़ारिशों को नज़रअंदाज़ किया है, जिसके परिणामस्वरूप यह वायरस दुनिया भर में फैल गया और ग्लोबल साउथ (दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित देश) का रुख़ कर रहा है, जहाँ इसका असर और भी विनाशकारी होगा; और मामलों के फिर से तेज़ी से उभरने और नई लहर उठने का जोखिम पहले से ही है.”

उन्होंने ध्यान दिलाया कि विरोधाभासी रणनीतियाँ अपनाए जाने से जलवायु परिवर्तन से निपटने में विश्व अब तक विफल रहा है. इसीलिए यह ज़रूरी है कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट के साथ आर्थिक व सामाजिक दंश को भी दूर करने के लिए उपाय किए जाएँ. 

“जब तक वायरस के फैलाव पर क़ाबू नहीं पाया जाएगा, अर्थव्यवस्था कभी बहाल नहीं होगी.” 

यूएन प्रमुख ने घरों और व्यवसायों को सहारा देने की पुकार लगाई है ताकि उन्हें संकट के समय में डूबने से बचाया जा सके. इस सिलसिले में जी-20 समूह के देशों से एक ऐसे राहत पैकेज का आग्रह किया गया है जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का कम से कम 10 फ़ीसदी हो.

कोरोनोवायरस संकट से मुक़ाबले करने में अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक और अन्य अन्तरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया है. 

निर्बलों को लक्षित सहारे की ज़रूरत 

यूएन प्रमुख ने कहा कि इस संकट के दौरान महिलाओं, वृद्धजनों, बच्चों, कम आय वाले श्रमिकों पर ज़्यादा असर हुआ है और इसलिए राहत प्रयासों में उनका विशेष ध्यान रखे जाने की ज़रूरत है. 

उनका मानना है कि विकसित देश ये प्रयास अपने बल पर सकते हैं लेकिन विकासशील देशों को ज़रूरी संसाधन मुहैया कराए जाने होंगे.  

महासचिव गुटेरेश ने उन सभी स्वास्थ्य व राहतकर्मियों का शुक्रिया अदा किया है जो इस महामारी के ख़िलाफ़ लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर डटे हैं. 

कोविड-19 संक्रमण के अब तक 45 लाख से ज़्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है और तीन लाख से ज़्यादा लोगों की जानें गई हैं. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रॉस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने सदस्य देशों को बताया कि यह संक्रमण जंगल में आग की तरह फैला है. शुरुआती अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि हर 10 में से एक या दो लोग ही अभी इस वायरस की चपेट में आए हैं और यह निष्कर्ष उनके शरीर में एंटीबॉडीज़ मिलने के आधार पर निकाला गया है. 

उन्होंने कहा कि बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में भी, संक्रमित आबादी का अनुपात 20 फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं है और अधिकतर स्थानों पर 10 फ़ीसदी से कम है, यानी विश्व आबादी के अधिकांश हिस्से पर अब भी इस वायरस से संक्रमित होने का जोखिम है. 

महानिदेशक घेबरेयेसस के मुताबिक कोई भी देश इस संक्रमण से अछूता नहीं रहा है – कुछ देशों ने तालाबन्दी में ढील देनी शुरू कर दी है जबकि अन्य देश कठिन समय की तैयारी कर रहे हैं.  

सतर्कता ज़रूरी

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने कहा कि देशों की - फिर से जीवन शुरू करने और काम पर लौटने की इच्छा को समझा जा सकता है लेकिन ऐसा करते समय सतर्क बने रहना आवश्यक है.

“क्योंकि हम दुनिया को तेज़ी से पटरी पर लौटते देखना चाहते हैं, हम देशों से सतर्कता के साथ आगे बढ़ने का आग्रह कर रहे हैं.” 

“जो देश संक्रमण के मामलों का पता लगाने और दबाने के लिए स्वास्थ्य तन्त्रों को तैयार किए बग़ैर जल्दबाज़ी करेंगे, वे अपनी ही पुनर्बहाली को क्षति पहुँचने का जोखिम उठाएँगे.”  

यूएन एजेंसी प्रमुख ने चिन्ता जताई है कि कोरोनावायरस के कारण मातृत्व और बाल मृत्यु दर, एचआईवी, मलेरिया, टीबी, ग़ैर-संचारी रोगों, मानसिक स्वास्थ्य और पोलियो जैसी चुनौतियों के ख़िलाफ दशकों से हुई प्रगति संकट में पड़ गई है. 

 

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