एलजीबीटीआई: भेदभाव व नफ़रत के ख़िलाफ़ एकजुटता का आहवान

कोविड-19 महामारी के दौरान एलजीबीटीआई समुदाय के साथ भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं.
Matheus Affonso
कोविड-19 महामारी के दौरान एलजीबीटीआई समुदाय के साथ भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं.

एलजीबीटीआई: भेदभाव व नफ़रत के ख़िलाफ़ एकजुटता का आहवान

मानवाधिकार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कोविड-19 महामारी के दौरान एलजीबीटीआई लोगों के साथ भेदभाव और नफ़रत की घटनाओं पर क्षोभ ज़ाहिर करते हुए उनके आज़ाद व समान अधिकारों के साथ जीवन के अधिकार के प्रति समर्थन जताया है. यूएन प्रमुख ने 'होमोफ़ोबिया, बाइफ़ोबिया और ट्राँसफ़ोबिया के ख़िलाफ़ अन्तरराष्ट्रीय दिवस' पर एलजीबीटीआई समुदाय के लिए गरिमामय जीवन सुनिश्चित करने और हिंसा व यातना से संरक्षण की पुकार लगाई है. 

रविवार, 17 मई, को यह दिवस ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब दुनिया वैश्विक महामारी कोविड-19 की विकराल चुनौती से जूझ रही है. इस संकट के दौरान लैस्बियन, गे, बाइसैक्सुअल, ट्राँसजेन्डर और इन्टरसैक्स लोगों को नाज़ुक हालात का सामना करना पड़ रहा है.

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यह दिवस इसी समुदाय के लोगों के प्रति नफ़रत या नापसन्दगी यानि फ़ोबिया के विरोध में मनाया जाता है.  

यूएन प्रमुख ने कहा कि एलजीबीटीआई समुदाय के लोग पहले से पूर्वाग्रहों, हमलों और हत्याओं का सामना करते रहे हैं लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उन्हें कलंकित किया जा रहा है और उनके लिए स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के रास्ते में भी अवरोध खड़े हो गए हैं. 

“ऐसी भी रिपोर्टें हैं कि पुलिस कोविड-19 के लिए जारी आदेशों का ग़लत इस्तेमाल एलजीबीटीआई लोगों और संगठनों को निशाना बनाने में कर रही है.”

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने ज़ोर देकर कहा है कि जैसे-जैसे महामारी फैल रही है, यूएन एलजीबीटीआई समुदाय के साथ होने वाले अन्यायों और अन्य अन्यायों को भी उजागर करता रहेगा. 

उन्होंने सभी से एक साथ मिलकर भेदभाव के ख़िलाफ़ खड़े होने और एलजीबीटीआई समुदाय के लिए गरिमा व समान अधिकारों के साथ आज़ाद जीवन सुनिश्चित करने के लिए समर्थन ज़ाहिर करने की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रमुख मिशेल बाशेलेट ने भी आगाह किया है कि कोरोनावायरस संकट ने एलजीबीटीआई समुदाय के लिए हालात को पहले से भी विकट बना दिया है. 

“एलजीबीटीआई लोगों को अक्सर अतिरिक्त कलंक, भेदभाव और हिंसा का सामना करना पड़ता है, मेडिकल सेवाएँ हासिल करने में और तालाबन्दी के दौरान ख़ुद अपने परिवारों में भी, जो शायद सबसे दुख की बात है. कुछ स्थानों पर उन्हें वायरस के फैलने का ज़िम्मेदार बताकर बलि का बकरा भी बनाया जा रहा है.”

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने अन्तरराष्ट्रीय दिवस की थीम के सन्दर्भ में सभी लोगों से नफ़रत के ख़िलाफ़ खड़ा होने का आग्रह किया और एलजीबीटीआई समुदाय के साथ भेदभाव व हिंसा के इर्द-गिर्द फैली चुप्पी को तोड़ देने की अपील की है. 

उन्होंने होमोफ़ोबिक, ट्राँसफ़ोबिक और बाइफ़ोबिक रवैयों और प्रचारों का विरोध करने की पुकार लगाई है जिनका दुनिया भर में इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जीवन पर विनाशकारी असर पड़ा है.