पाबन्दियाँ हटाने में सावधानी, नहीं तो बढ़ सकता है विनाश

14 मई 2020

संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बाशेलेट ने कोविड-19 वायरस के फैलाव को नियन्त्रित करने के लिए लागू की गई पाबन्दियाँ और तालाबन्दी को हटाने के सम्भावित ख़तरों के प्रति आगाह किया है. ध्यान रहे कि कुछ देश ये पाबन्दियाँ और तालाबन्दी हटाने पर विचार कर रहे हैं.

मिशेल बाशेलेट ख़ुद भी एक डॉक्टर, स्वास्थ्य मन्त्री और अपने देश चिली की की राष्ट्राध्यक्ष रही हैं. उन्होंने साथ ही चिकित्सा संकट का सामना करते समय देशों के सामने दरपेश चुनौतियों को समझने की भी बात करते हुए ये भी कहा है कि अर्थव्यवस्थाओं को ढहने से बचाने के उपायों में कुल प्रक्रिया कितनी मुश्किल भरी हो सकती है. 

मिशेल बाशेलेट ने जिनीवा से पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए कहा, “तमाम देशों में स्वास्थ्य संकट, मानवाधिकार व आर्थिक संकटों की ज़रूरतों के बीच तालमेल बिठाना सभी नेताओं और सरकारों के लिए बहुत नाज़ुक, कड़वा और अति महत्वपूर्ण अनुभव होगा. इतिहास में उनका स्थान इसी से तय होगा कि वो आने वाले महीनों के दौरान कितना अच्छा या ख़राब काम करते हैं.”

“अगर उनकी प्रतिक्रिया किसी विशेष तबक़े के हित साधने पर आधारित रही – जिससे अन्य वंचित और निर्बल समुदायों के लोगों के बीच बीमारी फिर से सिर उठा सकती है तो – ये फिर से सभी को अपनी चपेट में ले लेगी.”

दूसरी लहर के ख़तरे

कोविड-19 ने पूरी पृथ्वी पर अरबों लोगों की ज़िन्दगी में उथल-पुथल मचा दी है, जिनमें अनगिनत कामकाजी लोग व छात्र शामिल हैं जो इस महामारी से अपनी ज़िन्दगी सुरक्षित रखने की कोशिशों के तहत अपने घरों तक महदूद होकर रह गए हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि गुरूवार को दुनिया भर में कोविड-19 के संक्रमण के 40 लाख से ज़्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, और लगभग दो लाख 90 हज़ार लोगों की मौत हुई है.

मिशेल बाशेलेट का कहना था, “अगर कोई देश तालाबन्दी से जल्दबाज़ी में बाहर निकलने की कोशिश करता है तो महामारी के संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हो जाने का भी ख़तरा है जिसे बहुत से लोगों की मौत हो सकती है, जोकि ऐहतियात बरतने के विकल्प की तुलना में ज़्यादा विनाशकारी साबित हो सकती है.”

उन्होंने कहा, “अगर समाजों को फिर से खोलने में कुछ गड़बड़ी हुई तो शुरू में की गई तालाबन्दी के दौरान दी गई विशाल क़ुर्बानियों के अच्छे परिणाम व्यर्थ जाएँगे. साथ ही, लोगों और अर्थव्यवस्थाओं को जो नुक़सान होगा, उस पर क़ाबू नहीं पा जा सकेगा, बल्कि वो कई गुना बढ़ेगा.”

WHO के दिशा-निर्देश अहम

यूएन मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा है कि तालाबन्दी हटाए जाने पर विचार करने में मुख्य रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा-निर्देशों का पालन होना चाहिए.

इनमें कहा गया है कि संक्रमण को रोकने पर ज़ोर रहना चाहिए और स्वास्थ्य सेवा प्रणालियाँ संक्रमण का पता लगाने, परीक्षण, एकान्तवास, हर मामले का इलाज और हर सम्पर्क को पता लगाने में सक्षम होनी चाहिए.

उन्होंने दक्षिण कोरिया, न्यूज़ीलैंड और जर्मनी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने इन दिशा-निर्देशों पर शुरू से ही अमल किया है.

हालाँकि मिशेल बाशेलेट ने भी कहा कि दक्षिण कोरिया और जर्मनी से ये सबक़ भी सीखा जा सकता है कि वहाँ तालाबन्दी और आपात उपायों में ढील दिए जाने के बाद कोविड-19 के संक्रमण के मामलों ने फिर सिर उठा लिया.
 

 

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