कोविड-19; साइबर सुरक्षा को पुख़्ता बनाने के उपायों पर चर्चा

12 मई 2020

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया एक बड़े संकट से जूझ रही है और इस माहौल में ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भरता बढ़ी है लेकिन साइबर अपराध और बाल शोषण जैसे ख़तरे भी पैदा हो गए हैं. इनकी गंभीरता के मद्देनज़र कोविड-19 के दौरान ऑनलाइन माध्यमों पर बचाव व सुरक्षा के विषय पर अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) ने हाल ही में एक वेबिनार आयोजित की जिसमें डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाने, ऑनलाइन माध्यमों पर सुरक्षा बढ़ाने और युवा पीढ़ी को साइबर जोखिमों से बचाने के समाधानों पर चर्चा हुई. 

संगठन का कहना है कि साइबर ख़तरे नए नहीं हैं लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान समाज, अर्थव्यवस्था और बच्चों के लिए इन जोखिमों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. 

साइबर अपराधी इस संकट का इस्तेमाल धोखेबाज़ी और फ़र्जी गतिविधियाँ चलाने, निजी जानकारी चुराने और धन की उगाही करने में कर रहे हैं. इससे सरकारों, कम्पनियों, मीडिया केन्द्रोंऔर विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित संयुक्त राष्ट्र की अन्य एजेंसियों के कामकाज पर भी असर हुआ है.  

टैक्नॉलजी कम्पनियों का कहना है कि उनके नैटवर्क में धोखे से निजी जानकारी चुराने के मामलों में तेज़ी आई है.

गूगल और अन्य सोशल मीडिया कम्पनियों का कहना है कि प्रतिदिन कोविड-19 सम्बन्धी करोड़ों Malware (कंप्यूटर या सर्वर को क्षति पहुँचाने वाला सॉफ़्टवेयर) ईमेल और स्पैम संदेशों की जानकारी मिल रही है. 

साथ ही ऑनलाइन माध्यमों पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में भी तेज़ी आई है. अमेरिका में लापता और शोषित बच्चों के राष्ट्रीय केन्द्र के पास पहुँचने वाले ऑनलाइन बाल शोषण के संदिग्ध मामलों की संख्या दोगुनी हो गई है.   

अन्तरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) में निदेशक डोरीन बोग्डान-मार्टिन ने संदेह जताया कि मामलों की वास्तविक संख्या अभी सामने ही नहीं आ पाई है.

“अनेक देशों में उनके नैटवर्क से गुज़रने वाली हानिकारक सामग्री की निगरानी करने की तकनीकी और मानवीय क्षमता ही नहीं है.”

“क्या हम एक ऐसे भविष्य की कल्पना कर सकते हैं जिसमें हमारा पलड़ा भारी हो, या फिर हम साइबर अपराध और ऑनलाइन दुर्व्यवहार को जड़ से उखाड़ कर फेंक सकें.”

साइबर सुरक्षा के समाधान

डिजिटल सहयोग मामलों पर यूएन महासचिव के सलाहकार और अवर महासचिव फ़ैबरित्ज़ियो हॉक्सचाइल्ड का मानना है कि डिजिटल सुरक्षा पर नकारात्मक असर हम सभी पर असर डालता है, ख़ासतौर पर सबसे निर्बलों व बच्चों पर.

“यह समय हरसम्भव क़दम उठाने का है ताकि बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षित रखा जा सके. वायरस सीमाओं की परवाह नहीं करता है और ऑनलाइन अपराधी भी सीमाओं का सम्मान नहीं करते. इसलिए हमें सीमाओं से परे जाकर एक साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है.”

इस वेबिनार में शिरकत करने वाले प्रतिनिधियों ने साइबर अपराधों से निर्बल जनसमूहों की रक्षा करने, महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को बचाने और कमज़ोरियाँ दूर करने के लिए क्षमता निर्माण की अपील की है. 

बच्चों के साथ ऑनलाइन दुर्व्यवहार के साथ अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए शिक्षा अभियानों में निवेश करने और क़ानून एजेंसियों को मज़बूत बनाने की पैरवी की गई है. 

साइबर सुरक्षा से जुड़ी इन चुनौतियों के बावजूद विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतरी के प्रयासों के नतीजे भी नज़र आ रहे हैं. 

डिजिटल सेवाओं के ज़रिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी एकत्र व साझा करने, घरों से काम करने और शारीरिक सम्पर्क को सीमित रखने और संकट का सामना करने में मदद मिली है.  

कोविड-19 के दौरान साइबर जोखिमों से निपटने के लिए बहुत से ठोस प्रयास भी किए गए हैं जिनके बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है.  

साइबर माध्यमों का इस्तेमाल सरकारें इस वायरस के बारे में जानकारी लोगों तक पहुँचाने, बीमारी के फैलाव पर अपडेट देने और साइबर जगत में पनपते जोखिमों के प्रति आगाह करने में कर सकती हैं.

उदाहरण के तौर पर, मॉरिशस ने अपनी रिपोर्टिंग प्रणाली को दुरुस्त किया है व जागरूकता अभियान का दायरा बढ़ाया है; और आम लोगों तक साइबर सुरक्षा एलर्ट पहुँचाए जा रहे हैं. 

इसके अलावा मॉरिशस अपने दिशानिर्देशों और काम करने के बेहतर तरीक़ों में ज़रूरतों के मुताबिक लगातार बदलाव कर रहा है .

 

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