कोविड-19: जवाबी कार्रवाई और वैश्विक एकजुटता में धर्मगुरुओं की अहम भूमिका

12 मई 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि वैश्विक महामारी कोविड-19 की आँच में झुलस रही दुनिया को राहत दिलाने में धार्मिक नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन चार प्रमुख क्षेत्रों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है जिनमें एकजुट कार्रवाई को बढ़ावा देने में धर्मगुरू अपना सहयोग दे सकते हैं. 

इस कार्यक्रम में यूएन महासभा के प्रमुख तिजानी मोहम्मद बांडे, एलायंस ऑफ़ सिविलाइज़ेशन्स के उच्च प्रतिनिधि मिगेल मोरतिनोस और जनसँहार की रोकथाम के लिए यूएन महासचिव के विशेष सलाहकार अडामा डिएंग सहित ईसाई, यहूदी और मुस्लिम धर्मगुरू शामिल हुए. 

यूएन प्रमुख ने कोविड-19 से निपटने में धार्मिक हस्तियों की भूमिका के विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मौजूदा संकट पहले की चुनौतियों से बिल्कुल अलग है.

“यह महज़ एक वैश्विक स्वास्थ्य आपदा ही नहीं है, यह एक मानवीय संकट है जिससे ज़िन्दगियों में उथल-पुथल मची है, आजीविकाएँ तबाह हो रही हैं और दुनिया भर में अविश्वास गहरा रहा है.”

उन्होंने कहा कि इस महामारी की विकरालता, विनाश और व्यवधान ने दर्शाया है कि हमें अक्सर विभाजित करने वाली भिन्नताएँ इसकी तुलना में कुछ भी नहीं हैं. 

“महामारी के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक भिन्नताओं के कोई मायने नहीं हैं. यह राष्ट्रीय सीमाओं की परवाह नहीं करती. हम सभी इसकी चपेट में आ सकते हैं और यही साझा निर्बलता ही हमारी साझा मानवता को प्रदर्शित करती है.”

महासचिव गुटेरेश ने कहा कि जवाबी कार्रवाई की नींव में वैश्विक एकजुटता को बढ़ावा देने में धार्मिक नेताओं की अहम भूमिका होगी.  

उन्होंने ध्यान दिलाया कि एचआईवी/एड्स से ईबोला तक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में धार्मिक नेताओं ने लोगों के मूल्यों, रवैयों, व्यवहारों और कार्यों को प्रभावित किया था

और इस बार भी अपनी भिन्नताओं को दरकिनार करते हुए एक साथ मिलकर काम करना होगा और साझा मूल्यों को कार्रवाई में बदलना होगा.

कार्रवाई के चार क्षेत्र

यूएन प्रमुख ने अपने सम्बोधन मे चार प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया जिनमें धार्मिक नेता समाधान सामने लाने और पुनर्बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं:

- ग़लत और हानिकारक संदेशों से निपटना, अहिंसा को बढ़ावा देना और सभी समुदायों से विदेशियों के प्रति नापसंदगी व डर, नस्लवाद और असहिष्णुता के हर रूप को ख़ारिज करने के लिए प्रोत्साहित करना,

- घरों में शान्ति क़ायम रखना. महिलाओं व लड़कियों के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा की निन्दा करना और साझेदारी, समानता, सम्मान और करुणा के साझा सिद्धान्तों को समर्थन देना. महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबर आवाज़ और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना,

- जानबूझकर या अनजाने में फैलाई गई ग़लत जानकारियों पर अपने नैटवर्क और पहुँच के ज़रिए रोक लगाने में मदद करना और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बढ़ावा देने के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम करना,

- करोड़ों छात्रों के लिए शिक्षा की निरन्तरता बरक़रार रखना और संगठनों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करना कि पढ़ाई-लिखाई जारी रह सके,

यूएन महासभा प्रमुख तिजानी मोहम्मद-बांडे ने अपने संबोधन मे कहा कि कोविड-19 के कारण ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र चर्चों, यहूदी उपासना स्थलों और मस्जिदों को बन्द करने के निर्णय लिए गए, लेकिन अनेक धार्मिक नेताओं ने हालात के अनुरूप बदलाव किए और ऑनलाइन माध्यम अपना लिए. 

उन्होंने बताया कि युवाओं के सहयोग से सोशल मीडिया पर ऐसे सन्देशों का प्रसार किया जा रहा है जिनसे रोकथाम के उपायों के प्रति जागरूकता बढ़ सके, जोकि प्रशंसनीय है. 

उन्होंने आगाह किया कि इस महामारी के कारण कुछ समूहों व समुदायों को कलंकित करने की कोशिशें हुई हैं और वे भेदभाव का भी शिकार हुए है.

इसकी तात्कालिक रोकथाम को ज़रूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि ख़तरा और दुश्मन वायरस है, ना कि लोग, उनका धर्म या फिर देश.

यूएन एलायंस ऑफ़ सिविलाइज़ेशन्स के उच्च प्रतिनिधि मिगेल मोरातिनोस ने वैश्विक एकजुटता के लिए महासचिव  की पुकार को दोहराते हुए कहा कि निर्बल जनसमूहों और हाशिएकरण का शिकार समुदायों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है. 

उन्होंने कहा कि अपने समुदायों की सेवा करने में धर्मगुरु पहली पांत में खड़े होते है और यह देखना सुखद है कि वे इस संकट के समय में नाज़ुक हालात में फँसे लोगों को मूल्यवान सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं.

कोविड-19 के दौरान लोग धार्मिक त्योहारों जैसे ‘पासओवर’, ‘ईस्टर’ और रमज़ान को तालाबंदी में घरों तक सीमित रहकर और आवश्यकतानुसार बदलाव लाकर मना रहे हैं.

ऐसे समय में सरकार और स्वास्थ्य संस्थान भी धार्मिक नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

 

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