कोविड-19: मानव तस्करी के पीड़ितों के लिए बढ़ा जोखिम

6 मई 2020

कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिए तालाबंदी, यात्राओं पर पाबंदियाँ, संसाधनों में कटौती और अन्य तरह के उपायों के कारण मानव तस्करी के शिकार लोग और ज़्यादा शोषण के जोखिम में घिर रहे हैं. मादक पदार्थों व अपराध पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यालय (UNODC) का कहना है कि संगठित आपराधिक गुट महामारी से उपजे हालात का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं.

एजेंसी द्वारा किए गए नए विश्लेषण में नज़र आता है कि महामारी का संकट मानव तस्करी के शिकार लोगों को चौतरफ़ा तौर पर प्रभावित कर रहा है.

 यूएनओडीसी की कार्यकारी निदेशक ग़ादा फ़ाथी वली का कहना है, “कोविड-19 के कारण सीमित आवागमन, क़ानून लागू करने में लगने वाले संसाधनों को कहीं और ख़र्च किया जाना, और सामाजिक व सार्वजनिक सेवाओं की कटौती के कारण, मानव तस्करी का शिकार होने वाले लोगों को बचने या कहीं से मदद मिल सकने की बहुत कम संभावना है.”

चूँकि बहुत से देशों ने महामारी के कारण अपनी सीमाएँ बन्द कर दी हैं, इस कारण; मानव तस्करी के शिकार कुछ लोग तो अपने घरों को वापिस नहीं लौट सकते.

© UNICEF/UN045727/Pirozzi
हर साल हज़ारों पुरुष, महिलाएँ और बच्चे मानव तस्करी का शिकार होते हैं जोकि मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होेन के साथ-साथ गंभीर अपराध भी है. कज़ाख़्स्तान की एक 18 वर्षीय लड़की की तस्वीर, जिसे घर में काम करने का वादा करके यौनकर्मी बनने को मजबूर कर दिया गया.

कुछ अन्य क़ानूनी प्रक्रिया में देरी का सामना कर रहे हैं, साथ ही उन्हें मिलने वाली सहायता और संरक्षण में भी कटौती हो रही है जिसके सहारे उन्हें बेहतरी की उम्मीद रहती है. कुछ प्रभावितों के लिए तो आगे भी अपने मालिकों द्वारा शोषण और अनदेखी के ख़तरे में जी रहे हैं.

यूएनओडीसी के इस अपराध से संबंधित विभाग के मुखिया इलॉयज़ चैटशी का कहना है, “मानव तस्करी दरअसल हमारे समाजों और अर्थव्यवस्थाओं की नाकामी का नतीजा है जिनमें सबसे कमज़ोर लोगों की सुरक्षा नहीं की जा सकती.” 

“संकट के इस दौर में उन्हें अतिरिक्त दंड भुगतने के लिए नहीं छोड़ दिया जाना चाहिए.”

बच्चों को नए शोषण का जोखिम

संगठन का कहना है कि उसके साझीदार संगठनों से ख़बर मिली है कि महामारी के कारण अब ज़्यादा बच्चों को खाने-पीने की चीज़ों और धन की ख़ातिर सड़कों पर धकेला जा रहा है, जिससे उनके शोषण का ख़तरा बढ़ रहा है.

स्कूल बन्द होने के कारण करोड़ों बच्चों के लिए ना केवल शिक्षा बाधित हुई है, बल्कि उनके रहने के ठिकाने व भोजन का सहारा भी छिन गया है.
संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में बताया कि दुनिया भर में लगभग 37 करोड़ बच्चों को स्कूलों से मिलने वाला भोजन बन्द हो गया है, जोकि उनको पोषण स्रोत का एक मात्र भरोसेमन्द सहारा होता है.

इस बीच संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने महामारी के दौरान बाल संरक्षण सेवाओं को मज़बूत करने की तात्कालिकता पर ज़ोर दिया है.

बाल यौन शोषण व उनकी बिक्री के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र की विशेष रैपोर्टेयर मामा फ़ातिमा सिंगहातेह ने डर व्यक्त करते हुए कहा है कि बच्चों के ख़िलाफ़ हिंसा में बढ़ोत्तरी, यौन शोषण व प्रताड़ना के नए तरीक़ों में बढ़ोत्तरी होने के कारण दुनिया भर में लखों-करोड़ों बच्चों व युवाओं के लिए जीवन भर के लिए बेहद ख़तरनाक नतीजे होंगे.

मामा फ़ातिमा सिंगहातेह का कहना है कि कोविड-19 महामारी से पहले भी लगभग छह करोड़ 60 लाख बच्चे बहुत ही जर्जर सामाजिक व आर्थिक परिस्थितियों में रहने को मजबूर थे. 

बाल यौन शोषण के लिए...

मामा फ़ातिमा सिंगहातेह का कहना है कि यात्रा प्रतिबंधों ने बाल यौन शोषण व दुर्व्यवहार के नए तरीक़ों को जन्म दिया है, मसलन, डिलीवरी या ड्राइव थ्रू सेवाएँ. इसके अलावा बाल यौन गतिविधियाँ दिखाने वाली ग़ैर-क़ानूनी वैबसाइटों देखने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है.

उनका कहना है कि बच्चों को यौन गतिविधियों में शामिल होने के लिए बहलाने-फुसलाने के विकल्प के तौर पर अब बाल यौन गतिविधियाँ वेबसाइटों पर दिखाने का सहारा लिया जा रहा है.

ध्यान दिला दें कि संयुक्त राष्ट्र के सभी स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ यूएन के स्टाफ़ नहीं होते हैं, उनका पद मानद होता है और उन्हें उनके काम के लिए संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से कोई वेतन भी नहीं मिलता है.

संगठित अपराध को फ़ायदा

यूएनओडीसी ने आगाह करते हुए कहा है कि महामारी से उपजे हालात ने संगठित अपराध के लिए फ़ायदे के कुछ नए अवसर पैदा कर दिए हैं.

संगठन के पदाधिकारों का कहना है, “तस्कर अब और भी ज़्यादा सक्रिय हो सकते हैं और ऐसे लोगों की तलाश बढ़ा सकते हैं जो पहले की तुलना में कमज़ोर परिस्थितियों में हैं, क्योंकि वायरस के कारण लगी पाबन्दियों में ऐसे लोगों की आमदनी का ज़रिया बन्द हो गया हो.”

“हम ये भी जानते हैं कि नाज़ुक परिस्थितियों का सामना करने वाले लोगों को वायरस का संक्रमण होने की ज़्यादा संभावना होता है, और उनके बीमार होने पर उन्हें स्वास्थ्य सेवाएँ भी अक्सर उपलब्ध नहीं होती हैं.”

महामारी के गहराने के माहौल में यूएनओडीसी ने अपने वैश्विक साझीदारों और फ़ील्ड दफ़्तरों के ज़रिए स्थिति पर लगातार निगरानी की गतिविधियाँ भी बढ़ाई हैं.

 

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