कोविड-19: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट का अनुमान

थाईलैंड में बैंकॉक हवाई अड्डे का एक दृश्य.
UN Women/Ploy Phutpheng
थाईलैंड में बैंकॉक हवाई अड्डे का एक दृश्य.

कोविड-19: अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट का अनुमान

स्वास्थ्य

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) का ताज़ा विश्लेषण दर्शाता है कि वर्ष 2020 में विमान कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में  डेढ़ अरब तक की गिरावट का सामना करना पड़ सकता है. यूएन एजेंसी की ताज़ा जानकारी में विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण हवाई यातायात पर पड़ने वाले आर्थिक असर को भी आँका गया है. 

हालात सामान्य होने की स्थिति में विश्व भर की एयरलाइन्स उड़ानों में वर्ष 2020 में दो अरब से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय यात्री सफ़र करते – यानी प्रतिदिन 57 लाख यात्री. लेकिन कोविड-19 संकट की वजह से हवाई यातायात पर अभूतपूर्व असर पड़ा है और विमान कंपनियों को अपनी उपलब्ध सीटों की संख्या में 49 से 72 फ़ीसदी तक की कटौती करनी पड़ सकती है. 

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इन हालात में विमान कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से मिलने वाले राजस्व में 198 से लेकर 273 अरब डॉलर तक का नुक़सान उठाना पड़ सकता है.

मॉन्ट्रियल स्थित अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन ने अपने आँकड़े हाल ही में जारी किए हैं. संगठन के मुताबिक कोविड-19 से हवाई यातायात पर पड़ने वाले असर पर फ़रवरी 2020 से नियमित  रूप से ताज़ा जानकारी देनी शुरू की गई और ताज़ा आँकड़े हालात की सबसे स्पष्ट तस्वीर बयान करते हैं. 

193 सदस्य देशों वाली यूएन की विशेषीकृत एजेंसी कोविड-19 संकट के दौरान हवाई यातायात योजना बनाने वालों, नियामकों और संचालकों को कोविड-19 से उपजे हालात में लगातार दिशा-निर्देश मुहैया करा रही है. 

एजेंसी की महासचिव फ़ान्ग लियु ने बताया, “आज के ताज़ा विश्लेषण में, विश्लेषण की अवधि को और तीन महीने बढ़ाकर दिसंबर 2020 तक किया गया है, व राजस्व में कटौती को आँकने के लिए हवाई भाड़ा संबंधी ज़्यादा विश्वसनीय डेटा का इस्तेमाल किया गया है.”

उड्डयन संगठन ने आगाह किया है कि ये आँकड़े अनुमान नहीं हैं बल्कि कई संभावित रास्तों या नतीजों की ओर इशारा करने वाले परिदृश्य हैं. 

एजेंसी के मुताबिक विमान सेवाओं पर वास्तविक असर अनेक कारकों पर निर्भर करेगा – इनमें महामारी फैलने की अवधि और उसकी व्यापकता के अलावा उससे निपटने के लिए उठाए जा रहे क़दमों, सरकारी सहायता, आर्थिक हालात और हवाई यात्रा के लिए उपभोक्ताओं में विश्वास अहम हैं.

अभी तक की जानकारी के मुताबिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र की एयरलाइन सेवाओं के लिए कोविड-19 महामारी ने वर्ष 2003 में फैली सार्स महामारी की भीषणता को पीछे छोड़ दिया है. सार्स महामारी से राजस्व में छह अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी.

उस दौरान संकट से पहले के स्तर तक वापसी करने में हवाई यातायात उद्योग को महज़ छह महीनों का समय लगा था.     

इस महामारी के ना फैलने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में छह करोड़ 70 लाख का इज़ाफ़ा होने की संभावना थी. वर्ष 2019 में विमान कंपनियाँ अपनी सीट क्षमता में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि करने की योजना पर काम कर रही थीं.  

मांग में सबसे ज़्यादा कमी योरोप में गर्मी की छुट्टियों के दौरान दर्ज होने की संभावना है जिसके बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र का नंबर है. 

टास्क फ़ोर्स

अपने विश्लेषण के साथ-साथ यूएन एजेंसी ने इस सप्ताह कोविड-19 ‘Aviation Recovery Task Force’ के गठन की भी घोषणा की है जिसकी ज़िम्मेदारी सरकारी व निजी विमान कंपनियों के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं व नीतियों की शिनाख़्त करना और सिफ़ारिशें जारी करना होगी. 

यह टास्क फ़ोर्स सभी उपलब्ध सरकारी व उद्योग के आँकड़ों का इस्तेमाल करके नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पनपी तात्कालिक चुनौतियों से निपटने के लिए समाधान तैयार करेगी. साथ ही कोविड-19 संकट के गुज़र जाने के बाद के लिए प्राथमिकताओं का ख़ाका पेश किया जाएगा.

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन की परिषद के अध्यक्ष सल्वातोरे शियाचितानो ने टास्क फ़ोर्स की पहली बैठक के बाद कहा कि अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन का असरदार ढंग से उबरना कोविड-19 के बाद विश्वव्यापी आर्थिक पुनर्बहाली को सहारा देने के लिए ज़रूरी है. 

“अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन ने अतीत में अनेक संकटों का सामना किया है जिनसे ये फिर अपनी पहली जैसी स्थिति में आने में कामयाब रही, यह ICAO की सामयिक पहलों से संभव हो पाया.”

“अगर अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन जल्द और प्रभावी ढंग से फिर शुरू नहीं हुआ तो पिछले कई दशकों की प्रगति पूरी तरह मिट सकती है.”

ICAO की नई टास्क फ़ोर्स में परिषद सदस्य, और सभी प्रमुख हवाई ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री एसोसिएशन के महानिदेशक शामिल हैं.

साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व पर्यटन संगठन सहित कई अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय प्रशासकों को भी इसमें प्रतिनिधित्व हासिल है.