कोविड-19: भारत में वंचित समूहों के लिए UNFPA की आपात सेवा

1 मई 2020

भारत में भी कोविड-19 महामारी का सामना करने के प्रयासों के तहत पूरे देश में तालाबंदी लागू  है जिससे जनजीवन व्यापक रूप में प्रभावित हुआ है. भारत में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने बिहार राज्य में पटना नगर निगम (PMC) के साथ मिलकर गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों की मदद के लिए ‘वी-केयर’ नाम की सहायता सेवा शुरू की है. इसके तहत बिहार की राजधानी पटना में झुग्गियों में रहने वाले कमज़ोर तबके के लोगों को मुफ़्त आपातकाल यातायात और अन्य स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं. 

22 अप्रैल को पूजा ने अस्पताल में एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया लेकिन देशव्यापी तालाबंदी के कारण उसके माता-पिता परेशान थे कि वो अपनी बेटी और नवजात शिशु को घर वापस कैसे लेकर जाएँ. लॉकडाउन होने की वजह से परिवहन उपलब्ध नहीं था.

फिर अस्पताल में पूजा के अंकल की मुलाक़ात एक सामुदायिक ट्रेनर से हुई, जिसने उन्हें ‘वी-केयर हेल्पलाइन’ का नंबर दिया. उसके बाद आधे घंटे में ही 'वी-केयर' का वाहन उनके अस्पताल पहुँच गया और पूजा व उसके बच्चे को सुरक्षित घर पहुँचा दिया. वाहन में मौजूद स्वास्थ्य काउंसलर के साथ बात करते हुए अब पूजा के चेहरे पर राहत की मुस्कान थी.

Diksha Foundation/India
भारत में बिहार राज्य के पटना शहर में अपने नवजात शिशु के साथ आशा देवी.

24 अप्रैल को ‘वी-केयर’ हेल्पलाइन को शिव देवी के परिवार से घबराहट भरा फोन आया. 19 साल की शिव देवी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी और उसे तुरंत अस्पताल ले जाने की ज़रूरत थी, लेकिन तालाबंदी के कारण कोई भी यातायात सुविधा उपलब्ध नहीं थी.

‘वी-केयर’ ने 10 मिनट के अंदर वाहन भेजकर शिव देवी को अस्पताल पहुँचाया, जहाँ ऑपरेशन के बाद उसने अपने बच्चे को जन्म दिया. 

जन्म के बाद भी ‘वी-केयर’ के स्वास्थ्यकर्मी शिव देवी के पास रोज़ाना मिलने आते हैं और बच्चे की देखरेख संबंधी सलाह देते हैं.  

एक अभिनव पहल

कोविड-19 महामारी और उसके कारण हुई तालाबंदी से उत्पन्न अभूतपूर्व और अज्ञात चुनौतियों के लिए ‘वी-केयर’ एक अभिनव समाधान के रूप में सामने आया है.

शहरी क्षेत्रों में महामारी की रोकथाम के लिए ज़िम्मेदार मुख्य एजेंसी में से एक - पटना नगर निगम का उद्देश्य था -  इस परेशानी के दौर में, सेवाओं की उपलब्धता में कमी के मद्देनज़र, एक सोची-समझी, प्रभावी, और मानवीय रणनीति पर काम करना. 

संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के समर्थन से ‘वी-केयर’ सेवा शुरू हुई जो अब एक केंद्रित और लक्षित दृष्टिकोण लेकर ग़रीब बस्तियों और अन्य क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं,  वृद्धों, विकलांगों के परिवारों, स्वच्छता कर्मचारियों सहित बहुत से ज़रूरतमंदों तक पहुँच कर उन्हें परामर्श देने के अलावा घर के दरवाज़े पर ही सभी सुविधाएँ मुहैय्या करा रही है. 

 इसके लिए पटना नगर निगम ने छह वाहन दिए हैं जो यूएनएफपीए के विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और परामर्शदाताओं के नियंत्रण में काम करते हैं.

इसके स्वास्थ्यकर्मी हर रोज़ बस्तियों में घूमकर जागरूकता पैदा करते हैं, कमज़ोर तबके के परिवारों की सूची बनाई जाती हैं और उन्हें सेवाएँ प्रदान की जाती हैं.

पटना नगर निगम में एक समर्पित कॉम्बैट सेल भी बनाया गया है जो सूचना मिलने पर 20-25 मिनट के भीतर इन घरों में वाहन और सेवाएँ पहुंचने की गतिविधियों का समन्वय करता है.

गर्भवती महिलाओं के लिए वरदान 

यूएन जनसंख्या कोष की भारत में प्रतिनिधि अर्जेंटीना मातावेल पिक्किन कहती हैं,  “यूएनएफपीए ‘वी-केयर’ पहल के ज़रिए पटना नगर निगम के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक महत्वपूर्ण और जीवनरक्षक सेवाएँ उपलब्ध हों. इनमें प्रसव-पूर्व और प्रसव के दौरान की सेवाएँ और पूरी आपातकालीन प्रसूति देखभाल सेवाएँ शामिल हैं."

Diksha Foundation/India
भारत में बिहार के पटना शहर में यूएन जनसंख्या कोष द्वारा मुहैया कराई जा रही 'वी-केयर' एम्बुलेंस.

"हम जानते हैं कि तालाबंदी के कारण, महिलाओं को गर्भावस्था में परेशानी होने पर या प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुँचने में कठिनाई हो रही है. साथ ही, अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए आधुनिक गर्भ निरोधकों की आसान उपलब्धता भी बेहद ज़रूरी है."

उन्होंने बताया कि इस पहल से एक बड़े संकट के कारण उपजे दूसरे संकट से बचा जा सकता है. "अगर बच्चे को जन्म देते समय किसी महिला की मौत हो जाती है तो इससे न केवल उसकी ज़िन्दगी ख़त्म होती है बल्कि उसके अन्य बच्चों और पूरे परिवार पर तबाही टूट पड़ती है.” 

टीकाकरण और परामर्श सुविधा 

‘वी-केयर’ सुविधा के तहत ग़रीबों को अस्पताल पहुँचाने से लेकर, माँ की देखरेख और परामर्श व टीकाकरण तक का ध्यान रखा जा रहा है.

22 वर्षीय ख़ुशबू देवी की 9वें महीने में प्रसव पीड़ा शुरू होने पर सुबह उनके पति गुड्डू ने भी ‘वी-केयर’ हैल्पलाइन को फ़ोन करके अपनी पत्नी को अस्पताल पहुँचाने की गुहार लगाई.

अस्पताल पहुँचने के लगभग दो घंटे बाद ख़ुशबू ने अपने बच्चे को जन्म दिया. ‘वी-केयर’ के एक ट्रेनर ने दोपहर अस्पताल का दौरा कर ये सुनिश्चित किया कि माँ और बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा है.

फिर थोड़ी देर बाद उन्हें वापस घर ले जाने के लिए एक वाहन भी भेज दिया गया. ‘वी-केयर’ की टीम बच्चे के टीकाकरण और अन्य आवश्यक देखभाल सुनिश्चित करने के लिए परिवार के साथ लगातार संपर्क में है. 

वहीं पटना के गांधी मैदान में रहने वाली अठारह वर्षीय कंचन देवी ने 23 अप्रैल को सुबह 10 बजे पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था.

लेकिन ये पता चलते ही कि बच्चे का टीकाकरण नहीं किया गया है, कंचन को तुरंत ‘वी-केयर’ से जोड़ा गया. हैल्पलाइन पर फ़ोन आते ही माँ और बच्चे को टीका लगाने के लिए अस्पताल ले जाया गया. 

आशा की किरण 

झोंपड़-पट्टियों में रहने वाले लोगों के लिए कोविड-19 संकटकाल में तालाबंदी के कारण मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव हो गया है, ऐसे में यूएनएफपीए की 'वी केयर' नामक पहल, इन लोगों के लिए एक आशा की किरण बनकर आई है. 

जब आशा ने एक बच्ची को जन्म दिया, तो उनके पति अमित पिता बनने से बहुत खुश थे. लेकिन समस्या ये थी कि वो वापस अपने घर कैसे जाएंगे. तब पेशे से सफ़ाई कर्मी अमित को याद आया कि उसने कहीं 'वी केयर' सेवा के बारे में सुना था.

उन्होंने तुरंत हैल्पलाइन को कॉल किया और वहाँ से मदद मिलने पर अपनी पत्नी और बच्चे सहित सुरक्षित घर पहुँच गए.

लगभग 10 दिनों के अंदर ही 'वी केयर' सुविधा के ज़रिए झुग्गियों में लगभग 8000 ग़रीब परिवारों को लाभ और 23 से अधिक गर्भवती महिलाओं को महत्वपूर्ण जीवन रक्षक सेवाएँ मिली हैं.

इसके अलावा इस सेवा के माध्यम से प्रसव-पूर्व जाँच और 300 से अधिक अत्यंत ग़रीब महिलाओं को परामर्श भी दिया गया है. साथ ही अनचाहे गर्भ से बचने के लिए गर्भ निरोधकों की आपूर्ति भी की जा रही है.

पटना नगर निगम के आयुक्त हिमांशु शर्मा ने बताया, “हमें बहुत पहले से ही ये अहसास था कि झुग्गियों में शहरी ग़रीबों की एक बड़ी संख्या है, जिनकी बहुत अलग ज़रूरतें हैं, और इसके लिए वो ख़तरा उठाकर भी लॉकडाउन की अवहेलना करने पर मजबूर हो सकते हैं. फिर सार्वजनिक यातायात सेवाएँ बंद होने की वजह से उन्हें बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.” 

उन्होंने कहा, “ये एक अच्छा उदाहरण है कि कैसे कोविड-19 जैसे संकट में एक सम्मिलित दृष्टिकोण का उपयोग कर हम कर्मचारियों का बोझ कम कर सकते हैं और साथ ही परेटो सिद्धांत (Pareto Principle) अपनाकर वांछित परिणाम पाए जा सकते हैं. इसके अनुसार 20% कारणों से ही अक्सर 80% बुरे प्रभाव या परिणाम होते हैं. इसलिए उन 20% कारणों पर सही तरह से ध्यान केंद्रित करना ही सफलता की कुंजी है.”

 

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