कोविड-19: स्कूली आहार बंद होने से 37 करोड़ बच्चों पर संकट

29 अप्रैल 2020

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया के अनेक देशों में भुखमरी से पीड़ित लोगों की संख्या में बढ़ोत्तरी होने की आशंका से चिंता व्याप्त है. तालाबंदी के कारण स्कूल भी बंद हैं जिसके कारण करोड़ों बच्चे प्रभावित हुए हैं, ख़ासकर वो बच्चे जो अपने भोजन के लिए स्कूलों में मिलने वाले आहार पर निर्भर थे. संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने सरकारों से ऐसे 37 करोड़ बच्चों की स्वास्थ्य व पोषण संबंधी ज़रूरतों का ध्यान रखे जाने की अपील की है जिसके अभाव में उनके भविष्य पर हानिकारक असर होगा. 

यूएन एजेंसियों का मानना है कि कोविड-19 संकट से बच्चों की पौष्टिक आहार व स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है क्योंकि बड़ी संख्या में बच्चों के लिए सेहतमंद आहार का एकमात्र स्रोत स्कूली भोजन ही है.

विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक डेविड बीज़ली ने बताया, “दुनिया भर में लाखों बच्चों के लिए स्कूलों में मिलने वाला आहार ही उनका दिन में एकमात्र भोजन है. इसके बिना वे भूखे रह जाएंगे, उनके बीमार पड़ने, स्कूलों से बाहर हो जाने और ग़रीबी से निकल पाने का एक अच्छा मौक़ा खो जाने का जोखिम है.”

उन्होंने तत्काल कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत पर बल देते हुए कहा कि इसके अभाव में भुखमरी के कारण तबाही जैसे हालात पैदा हो जाएंगे. 

यूएन एजेंसियों के मुताबिक स्कूलों में मिलने वाला आहार लड़कियों के लिए विशेष रूप से अहम है. बहुत से निर्धन देशों में, भोजन मिलने की निश्चितंता के कारण जीवन-यापन में संघर्ष कर रहे बहुत से अभिभावक अपनी बेटी को स्कूल भेजने के लिए तैयार हो जाते हैं.

इससे लड़कियों को घरेलू काम का भारी बोझ सहने या कम उम्र में ही शादी कर दिए जाने से छुटकारा भी मिलता है. 

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष की कार्यकारी निदेशक हेनरीएटा फ़ोर के मुताबिक “स्कूल केवल पढ़ने-लिखने की जगह भर से कहीं बढ़कर हैं. कई बच्चों के लिए यह सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण की जीवन-रेखा है.”

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“अगर हमने सबसे निर्बल बच्चों के लिए जीवनदायिनी सेवाओं का दायरा बढ़ाने के प्रयास अभी नहीं किए तो कोविड-19 के कारण इसके तबाही लाने वाले नतीजे कई दशकों तक महसूस किए जाएंगे.”

सेहतमंद आहार का स्रोत

अनेक निर्धन देशों में बच्चे स्कूलों में मिलने वाले आहार के साथ-साथ टीकाकरण सहित अन्य स्वास्थ्य व पोषण सेवाओं से भी लाभान्वित होते हैं जो स्कूलों के माध्यम से सुनिश्चित किए जाते हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश द्वारा हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में दर्शाया गया था कि स्कूल बंद होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चों को आहार नहीं मिल पा रहा है. 

विश्व खाद्य कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) इस चुनौती पर पार पाने के लिए सरकारों के साथ मिलकर काम कर रहे है ताकि संकटकाल में स्कूलों से वंचित बच्चों को सहारा उपलब्ध कराया जा सके.

68 देशों में सरकारों और यूएन एजेंसी ने स्कूली आहार के विकल्प के तौर पर बच्चों को घर के लिए राशन, वाउचर या नक़दी देना शुरू किया है.

एक साझीदारी के तहत यूएन खाद्य कार्यक्रम और यूएन बाल कोष सरकारों को मदद प्रदान करेंगी ताकि आने वाले महीनों में स्कूल  खुलने के बाद बच्चों के लिए स्कूल में मिलने वाले भोजन, स्वास्थ्य व पोषण कार्यक्रम फिर शुरू किए जा सकें. 

इससे अभिभावकों को बच्चों को फिर स्कूल भेजने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा.

इसके अलावा यूएन एजेंसियों ने एक ऑनलाइन स्कूल आहार मैप तैयार किया है जिसके ज़रिए स्कूल में मिलने वाले भोजन की ज़रूरत महसूस करने वाले बच्चों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है.  

इस पहल के तहत शुरुआत में 30 निम्न आय वाले या नाज़ुक हालात का सामना कर रहे देशों में एक करोड़ बच्चों को मदद मुहैया कराई जाएगी और इसके लिए 60 करोड़ डॉलर की राशि जुटाने की अपील की गई है.

 

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