कोविड-19: कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आहवान 

28 अप्रैल 2020

देशों पर विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण लागू की गई तालाबंदी व अन्य सख़्त पाबंदियाँ हटाने के लिए दबाव बढ़ रहा है जिससे वायरस के फिर से उभरने की आशंका भी गहरा रही है. इन्हीं चिंताओं के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने मंगलवार, 28 अप्रैल, को ‘कार्यस्थल पर सुरक्षा व स्वास्थ्य के विश्व दिवस’ (World Day for Safety and Health at Work) पर सरकारों से कार्यस्थलों पर कोविड-19 की रोकथाम के लिए समुचित प्रबंध करने का आग्रह किया है. 

संगठन के मुताबिक कर्मचारियों के बचाव व सुरक्षा में सभी नियोक्ताओं (Employers) व श्रम संगठनों की भी अहम भूमिका है और उन्हें इस ज़िम्मेदारी को पूरा करने में सक्रियता दिखानी होगी.

नियोक्ताओं से जोखिमों का मूल्यांकन करने और कार्यस्थलों पर बचाव व स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है ताकि कर्मचारियों के कोविड-19 से संक्रमित होने का ख़तरा कम किया जा सके. 

यूएन एजेंसी के मुताबिक नियंत्रण के अभाव में देशों को फिर से वायरस के तेज़ी से उभरने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. आवश्यक उपाय समय रहते अपनाकर कार्यस्थलों पर संक्रमण की दूसरी लहर (Second wave) के ख़तरे की रोकथाम संभव है. 

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर ने बताया, “हमारे संपूर्ण कार्यबल की सुरक्षा व स्वास्थ्य आज सर्वोपरि है. संक्रामक महामारी के फैलने के दौरान, हम अपने कर्मचारियों की सुरक्षा जिस तरह करते हैं उसी से समुदायों की सुरक्षा व व्यवसायों की सहन-क्षमता निर्धारित होगी.” 

“पेशेवर सुरक्षा व स्वास्थ्य उपाय अमल में लाकर ही हम कर्मचारियों, उनके परिवारों, और बड़े समुदायों की ज़िंदगियों की रक्षा कर सकते हैं, कामकाज जारी रखना सुनिश्चित कर सकते हैं और आर्थिक रूप से उबर सकते हैं.”

यूएन एजेंसी के मुताबिक जोखिम पर नियंत्रण पाने के उपायों में कर्मचारियों की ज़रूरतों के अनुरूप बदलाव करना अहम होगा, ख़ासकर अग्रिम मोर्चे पर डटे कर्मचारियों के लिए ऐहतियाती उपाय ध्यान में रखने होंगे.

इनमें स्वास्थ्यकर्मी, नर्सें, डॉक्टर, आपात स्थिति के लिए नियुक्त कर्मचारी और खुदरा भोजन व्यापार व साफ़-सफ़ाई व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं. 

श्रम संगठन ने सबसे नाज़ुक हालात का सामना कर रहे कर्मचारियों व व्यवसायों की ज़रूरतों को भी रेखांकित किया है, विशेषकर वे प्रवासी व घरेलू मज़दूर जो अनौपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं. 

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उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बचाव व सुरक्षा उपायों पर उन्हें शिक्षा व प्रशिक्षण मुहैया कराना होगा, निजी बचाव सामग्री व उपकरण ज़रूरत के अनुसार उपलब्ध कराने होंगे.

इसके समानांतर उनके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने व आजीविका के वैकल्पिक साधनों की उपलब्धता को संभव बनाने के प्रयास करने होंगे. 

यूएन एजेंसी ने बिना किसी व्यवधान के कार्यस्थलों पर सुरक्षित वापसी के लिए निम्न सिफ़ारिशें जारी की हैं:

- ख़तरों का आकलन किया जाए और सभी प्रक्रियाओं में निहित संक्रमण के जोखिमों की समीक्षा की जाए, कामकाज फिर शुरू होने पर भी ये समीक्षा जारी रखी जाए, 

- हर सैक्टर, कार्यस्थलों व कर्मचारियों की ज़रूरतों के अनुरूप जोखिम पर क़ाबू पाने के उपायों में बदलाव लाया जाए. इसके तहत कर्मचारियों, ठेकेदारों, ग्राहकों व अन्य लोगों के बीच शारीरिक दूरी बनाए रखना, कार्यस्थलों को हवादार बनाना और सतहों व अन्य स्थानों की नियमित साफ़-सफ़ाई के अलावा हाथ धोने की व्यवस्था अहम होगी, 

- ज़रूरत होने पर कर्मचारियों को नि:शुल्क निजी बचाव सामग्री व उपकरण मुहैया कराए जाएँँ,

- संक्रमण के संदिग्ध मामलों को अलग रखने के लिए इंतज़ाम किया जाएऔर उनके संपर्क में आने वाले लोगों का पता लगाया जाए, 

- सभी कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ,

-कार्यस्थलों पर बचाव व स्वास्थ्य सुरक्षा के बारे में ट्रेनिंग, शिक्षा व जानकारीपरक सामग्री प्रदान की जाए जिनमें स्वच्छता बनाए रखने की आदतों का पालन करने सहित कार्यस्थलों पर बचाव सामग्री व उपकरणों के इस्तेमाल पर जानकारी शामिल है.
 

 

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