'किसी को भी पीछे ना छूटने देने का मंत्र, पहले से कहीं ज़्यादा अहम'

23 अप्रैल 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के व्यापक असर को कम करने के लिए गुरुवार को तीन-सूत्री वैश्विक कार्रवाई का आहवान किया है. विकास के लिए वित्तीय संसाधनों पर यूएन के मंच (Financing for Development Forum) के नए सत्र में उन्होंने सरकारों से आहवान किया है कि इतिहास बनाने वाले इस लम्हे पर एकजुट होना होगा.

कोविड-19 के संदर्भ में टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय संसाधन के इंतज़ाम के विषय पर ये फ़ोरम वेबकास्ट के ज़रिए आयोजित किया जा रहा है.

इस सत्र में यूएन महासचिव के अलावा संयुक्त राष्ट्र महासभा और आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) के प्रमुखों सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए.

महासचिव ने कहा कि इस ख़तरे की विकरालता वैश्विक स्तर पर समन्वित स्वास्थ्य कार्रवाई की अहमियत को रेखांकित करती है जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व में आगे बढ़ाना होगा. 

“विकासशील देशों को विशाल स्तर पर और तत्काल समर्थन की ज़रूरत है...यही समय है जब हमें किसी को भी पीछे ना छूटने देने का अपना संकल्प पूरा करना है.”

उन्होंने कहा कि जोखिम का सामना कर रहे देशों की मदद के लिए मिलजुल प्रयास करने होंगे, उनकी स्वास्थ्य प्रणालियों को मज़बूत बनाना होगा और संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए परीक्षण, संपर्कों का पता लगाने और संदिग्धों को अलग रखे जाने का इंतज़ाम करना होगा. 

यूएन प्रमुख के मुताबिक महामारी के विनाशकारी सामाजिक व आर्थिक नतीजों से निपटने के लिए एक व्यापक योजना की आवश्यकता होगी जिसके लिए सभी वित्तीय व मौद्रिक उपायों का उपयोग करना होगा.

उन्होंने एक ऐसे पैकेज की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है जो वैश्विक जीडीपी के दो अंक प्रतिशत में हो और घरों, लोगों व व्यवसायों तक इसका लाभ पहुँच सके.

जी-20 समूह द्वारा निर्धन देशों के लिए उनके क़र्ज़ की अदायगी पर फ़िलहाल रोक लगाया जाना पहला क़दम है लेकिन इसमें अन्य विकासशील देशों के लिए भी राहत मुहैया करानी होगी. 

उन्होंने कहा कि पहले से कहीं बेहतर व्यवस्था के साथ मौजूदा हालात से उबरना होगा.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने दिखाया है कि अर्थव्यवस्थाएँ किस तरह महिलाओं के अदृश्य श्रम से संचित होती हैं.

मौजूदा बहुपक्षीय फ़्रेमवर्कों की ख़ामियाँ इस महामारी में दिखाई दे रही हैं और आय व वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता में असमानताएँ स्पष्ट हो गई हैं. ऐसे में पुराने रास्ते पर वापस लौटना विकल्प ही नहीं है.

यूएन आर्थिक एवं सामाजिक परिषद की अध्यक्ष मोना जूल ने सहमति जताई कि टिकाऊ विकास के लिए वित्तीय संसाधन तैयारी व सहन-क्षमता के केंद्र में रखने होंगे.

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कोविड-19 से महिलाएँ व पुरुष अलग-अलग ढंग से प्रभावित हो रहे हैं और महिलाओं को बिना वेतन के ही ख़ुद से संबंधित व्यक्तियों की देखभाल करनी पड़ रही है. 

अग्रिम मोर्चे पर जुटे स्वास्थ्यकर्मियों में भी उनका प्रतिनिधित्व ज़्यादा है और इसलिए सामाजिक व आर्थिक राहत योजना में लैंगिक मुद्दों का भी ख़याल रखा जाना होगा.

यूएन महासभा के प्रमुख तिजानी मोहम्मद-बांडे ने कोविड-19 को बहुपक्षवाद, वैश्विक नागरिकता और एकजुटता के प्रति इस पीढ़ी के संकल्प का सबसे बड़ा परीक्षण बताया है.  

उन्होंने कहा कि कोई भी देश इसके आर्थिक प्रभावों से नहीं बच पाया है लेकिन विकासशील देश सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे. इसलिए अदीस अबाबा एजेंडा के सात मुख्य बिंदुओं के अनुरूप सबसे संवेदनशील देशों व समुदायों की मदद के लिए तेज़ी से प्रयास किए जाने होंगे.

 

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