कोविड-19: WHO की रमदान गाइड

पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में लाहौर स्थित बादशाही मस्जिद का एक दृश्य.
UN Photo/Mark Garten
पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में लाहौर स्थित बादशाही मस्जिद का एक दृश्य.

कोविड-19: WHO की रमदान गाइड

स्वास्थ्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया भर में कोविड-19 से पैदा हुई असाधारण परिस्थितियों में मुसलमानों के पवित्र महीने रमदानन के दौरान रोज़ा (वृत) रखने और अन्य धार्मिक रीति-रिवाज़ पूरे करने के दौरान ऐहतियात बरते जाने के लिये कुछ नए दिशा-निर्देश व सिफ़ारिशें जारी की हैं.

ग़ौरतलब है कि रमदान महीने के दौरान दुनिया भर के मुसलमान ज़्यादातर मज़हबी रीति-रिवाज़ समूहों में करते हैं जिनमें शाम को रोज़ा पूरा होने पर इफ़्तार और नमाज़ों की अदायगी शामिल हैं. दिन की पाँच नमाज़ों के अलावा रमज़ान महीने के दौरान रात में भी विशेष नमाज़ अदा की जाती है जिसे तरावीह कहा जाता है.

इन्हीं को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नई सिफ़ारिशें जारी करते हुए कहा कि धार्मिक और सामाजिक बैठकें या समारोह रद्द करने पर गंभीरता से विचार होना चाहिये. दिशा निर्देशों में कहा गया है कि बड़े जलसों और सभाओं पर पाबंदी लगाने, उनमें संशोधन करे, उन्हें स्थगित करने, रद्द करने या फिर उनके आयोजन को मंज़ूरी देने के बारे में कोई भी फ़ैसले मानक आधारित जोखिम आकलन पर आधारित होने चाहिए.

जॉर्डन के एक प्राइमरी स्कूल के बच्चे कोविड-19 से बचाव के उपायों के तहत हाथ स्वच्छ रखने का प्रदर्शन करते हुए. रमज़ान में भी सफ़ाई पर ख़ास ध्यान देने की सिफ़ारिश की गई है.

ये फ़ैसले देशों के राष्ट्रीय प्राधिकारियों द्वारा कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा होनी चाहिये.

अगर सामाजिक व धार्मिक सभाओं या महफ़िलों को स्थगित करने का फ़ैसला लिया जाता है तो, यथासंभव, उनके वर्चुअल विकल्प मुहैया कराए जाने चाहिए, मसलन टैलीविज़न, रेडियो, डिजिटल प्लैटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया वग़ैरा...

अगर रमज़ान की महफ़िलें आयोजित करने की इजाज़त दी जाती है तो कोविड-19 महामारी के संक्रमण का जोखिम कम करने के उपाय लागू किए जाने चाहिये. रमदान के संदर्भ में कोविड-19 से बचने के लिए दूरियाँ क़ायम रखने व अन्य उपायों संबंधी प्राथमिक सूचना, जानकारी व अन्य सलाहों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों को मुख्य स्रोत समझा जाना चाहिए.

इन फ़ैसलों में धार्मिक हस्तियों को शामिल किया जाना चाहिये ताकि वो रमज़ान से संबंधित आयोजनों व घटनाओं के बारे में सही सूचना व जानकारी सक्रिय रूप से समुदायों में पहुँचा सकें. लिये गए फ़ैसलों के बारे में सटीक सूचना व जानकारी आमजन तक पहुँचाने के लिए ठोस संचार व संवाद नीति बहुत ज़रूरी है. दिशा-निर्देश बिल्कुल स्पष्ट होने चाहिये और लोगों को स्वस्थ बर्ताव व व्यवहार करने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते ठोस संचार नीति व भिन्न मीडिया मंचों का सहारा लिया जाना चाहिए. 

दूरियाँ व फ़ासले

  • इंसानों के बीच हर वक़्त कम से कम एक मीटर यानी लगभग तीन फ़ुट की दूरियाँ व फ़ासले रखने के नियम पर सख़्ती से अमल किया जाए.
  • ऐसे सांस्कृतिक व धार्मिक स्वीकृत अभिवादनों का प्रयोग किया जाए जिसमें इंसानों के बीच शारीरिक संपर्क शामिल ना हो, मसलन, हाथ या गर्दन व चेहरा हिलाकर अभिवादन करना और दिल के ऊपर हाथ रखकर अभिवादन का इज़हार करना.
  • रमज़ान से जुड़ी गतिविधियों के साथ जुड़े स्थानों पर लोगों को बड़ी संख्या में इकट्ठा ना होने दें, इनमें मनोरंजन के स्थान, बाज़ार और दुकानें.
  • जोखिम वाले समूह
  • जो लोग अस्वस्थ हैं या कोविड-19 के लक्षणों से पीड़ित हैं, उनसे सामाजिक व धार्मिक आयोजनों में शामिल नहीं होने का आग्रह करें. साथ ही लक्षणों के इलाज पर राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का पाल करें.
  • उम्रदराज़ लोगों व पहले से बीमारियों से पीड़ितों को भीड़ वाले आयोजनों में शामिल होने से मना करें. इनमें हृदय रोग, डायबिटीज़, साँस से संबंधित बीमारियाँ वग़ैरा शामिल हैं. इस तरह की स्वास्थ्य परिस्थितियों वाले लोगों को कोविड-19 का संक्रमण होने की बहुत ज़्यादा संभावना होती है, और मौत होने का भी ख़तरा है.

जलसों और महफ़िलों के लिये सलाह:

  • रमदान के दौरान होने वाली गतिविधियों – नमाज़, धार्मिक यात्राएँ और सामूहिक भोजन के आयोजन व दावतों में इन नियमों का पालन किया जाए...
  • जहाँ तक मुमकिन हो, इस तरह के आयोजन खुले स्थानों में आयोजित किए जाएँ, अगर बन्द स्थानों में आयोजित भी होते हैं, तो ये ध्यान रखा जाए कि वहाँ ताज़ा हवा का बहाव बिना रोक-टोक के हो. 
  • ऐसे आयोजन कम से कम वक़्त के लिए किए जाएँ ताकि शिरकत करने वालों को संक्रमण के कारणों से महफ़ूज़ रखा जा सके,
  • ऐसे आयोजन करें जिनमें लोग कम संख्या में शिरकत करें, भले ही ऐसे आयोजन एक से ज़्यादा करने पड़ें. ऐसा करना उन आयोजनों से बेहतर होगा जिनमें बड़ी संख्या में लोग शिरकत करें.
  • शिरकत करने वालों के बीच दूरियाँ बनाए रखने के नियमों पर सख़्ती से अमल किया जाए, बैठने व खड़े होने के दौरान भी. इनमें वुज़ू करने व नमाज़ अदा करने के स्थान भी शामिल है. साथ ही जहाँ जूते वग़ैरा रखे जाते हैं, वहाँ भी यही नियम लागू हों.
  • नमाज़ अदा करने और रमज़ान की गतिविधियों से जुड़े आयोजनों के स्थानों में आने वाले लोगों की संख्या पर नज़र रखी जाए कि एक वक़्त में वहाँ बहुत ज़्यादा भीड़ ना जमा हो जाए. यानी आने वालों और जाने वालों के बीच संतुलन रखा जाए जिससे एक वक़्त में वहाँ मौजूद लोगों की संख्या महफ़ूज़ स्तर पर बनी रहे जिससे लोगों के बीच समुचित फ़ासला बनाए रखने में आसानी हो. 
  • अगर ऐसे किसी आयोजन में किसी बीमार व्यक्ति की पहचान होती है तो उसके संपर्क में आने वाले अन्य लोगों का भी पता लगाकर मदद की जाए.

स्वच्छता का सख़्त ध्यान रहे

  • मुसलमान नमाज़ अदा करने से पहले वुज़ू करते हैं जिससे स्वास्थ्यपरक स्वच्छता बनाए रखने में मदद मिलती है. वुज़ू उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें मुसलमान हाथ, मुँह और पैर बहुत अच्छी तरह से धोते हैं और किसी भी तरह की गन्दगी शरीर या कपड़ों पर नहीं होनी चाहिए. साथ ही कुछ ये उपाय भी करने पर ग़ौर किया जा सकता है...
  • ये सुनिश्चित करें कि हाथ धोने की सुविधाओं में पानी और साबुन की समुचित व्यवस्था हो जिनमें अल्कोहॉल आधारित तरल पदार्थ भी शामिल हैं. मस्जिदों में दाख़िल होते और वहाँ से जाते वक़्त लोग उस अल्कोहॉल आधारित तरल पदार्थ अपने हाथों पर रगड़ लें.
  • एक बार इस्तेमाल करके फेंकने वाले टिश्यू पेपर और उन्हें फेंकने के लिए ऐसे कूड़ेदान भी रखें हों जिनका ढक्कन बन्द हो सकता है. साथ ही कूड़े को सुरक्षित तरीक़े से सही स्थान पर फेंकने की भी व्यवस्था होनी चाहिए.
  • नमाज़ अदा करने के लिए निजी चटाई, दरी या कारपेट का इस्तेमाल करने को बढ़ावा दिया जाना चाहिए.
  • सभी लोगों के बीच ज़रूरी दूरी व फ़ासला बनाए रखने, हाथ साफ़-सुथरे रखने, साँस लेने व छोड़ने के तरीक़ों और कोविड-19 को रोकने के बारे में नियम व दिशा-निर्देशों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें ताकि सभी को आसानी से नज़र आते रहें.

जल्दी-जल्दी सफ़ाई

  • मज़हबी सभाओं वाले स्थानों पर हर आयोजन के पहले और बाद में अच्छी तरह से सफ़ाई होनी चाहिए और सफ़ाई के लिए कीटाणु मारने वाले पदार्थों का इस्तेमाल होना चाहिए.
  • मस्जिदों के भीतर की सभी जगह और वुज़ू करने के स्थान अच्छी तरह से साफ़-सुथरे रहने चाहिए.
  • जिन स्थानों को बार-बार छुआ जाता है, उन्हें जल्दी-जल्दी कीटाणुनाशक पदार्थों से साफ़ करते रहें, मसलन दरवाज़ों के हैंडल, बिजली उपकरणों के बटन (स्विच), सीढ़ियों पर लगी पटियाँ जहाँ लोग अक्सर हाथ रखते हैं.

दान (चैरिटी)

  • रमज़ान के दौरान सदक़ा या ज़कात देते वक़्त भी दूरी और फ़ासला बनाने के नियमों पर सख़्ती से अमल हो. सदक़ा या ज़कात ऐसे लोगों को देने की व्यवस्था है जो लोग किन्हीं हालात की वजह से मुश्किलों या परेशानियों का सामना कर रहे हों.
  • इफ़्तार के दौरान डिब्बा या पैकेट बन्द भोजन वितरित करने पर ग़ौर करें. ये काम सुसंगठित संगठनों और संस्थानों द्वारा किया जा सकता है जो भोजन इकट्ठा करने, उन्हें पैकेटों में रखने, भंडार और उसे लोगों में वितरित करने की पूरी प्रक्रिया के दौरान नियमों का सख़्ती से पालन करें.

सेहत का ध्यान – रोज़ा (व्रत - Saum)

अभी रोज़ा रखे जाने की स्थिति व कोविड-19 के संक्रमण को जोखिम के बारे में कोई अध्ययन नहीं किया गया है. स्वस्थ व्यक्ति पिछले वर्षों की ही तरह इस रमज़ान महीने में भी रोज़ा (व्रत) रखने में समर्थ होने चाहिए. अलबत्ता, कोविड-19 के मरीज़ मज़हबी इजाज़तों और अपवादों का सहारा ले सकते हैं. मसलन, अगर बीमारी के कारण रोज़ा बीच में ही ख़त्म करने की ज़रूरत पड़े तो अपने डॉक्टर की सलाह के मुताबिक़ क़दम उठा सकते हैं, जैसाकि किसी अन्य बीमारी की वजह से करने की ज़रूरत पड़ती.

व्यायाम गतिविधियाँ

कोविड-19 महामारी के दौरान बहुत लोगों की गतिविधियों पर पाबंदियाँ लगी हुई हैं. अगर इन पाबंदियों में कुछ ढील की इजाज़त हो तो, शारीरिक कसरत या व्यायाम संबंधी गतिविधियों के दौरान भी दूरी व फ़ासला बनाए रखे और हाथ अच्छी तरह से साफ़-सुथरे रखना ना भूलें. शारीरिक व्यायाम व कसरत गतिविधियाँ खुले स्थानों के बजाय सीमित स्थानों पर हों तो बेहतर, साथ ही ऑनलाइन या वर्चुअल माध्यमों के ज़रिए भी कसरत गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है.

स्वस्थ ख़ुराक व पोषण 

रमज़ान के दौरान पोषण व शरीर में तरल पदार्थों की भरपूर उपलब्धता का ख़याल रखा जाना बहुत ज़रूरी है. लोगों को रोज़ाना ताज़ा व पौष्टिक भोजन खाना चाहिए, और ख़ूब पानी भी पीना चाहिए. ज़ाहिर सी बात है कि ऐसा सुहूर तक (तड़के) और शाम को रोज़ा ख़त्म होने के बाद ही किया जा सकता है.

तम्बाकू सेवन

वैसे तो तम्बाकगू सेवन किन्हीं भी हालात में मना किया जाता है, ख़ासतौर से रमदान के दौरान तो तंबाकू सेवन बिल्कुल भी नहीं होना चाहिये. अत्यधिक धूम्रपान करने वालों को शायद पहले से ही फेफड़ों की बीमारियाँ हों या उनके फेफड़ों की क्षमता बहुत हम हो चुकी हो, ऐसे  कोविड-19 का संक्रमण होने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है.

धूम्रपान करने के दौरान जब उंगलियाँ (और सम्भवतः दूषित सिगरेट) दोनों ही होटों को छूते हैं, जिससे कोरोनावायरस का संक्रमण साँस लेने की प्रणालियों में दाख़िल होने का जोखिम बहुत बढ़ जाता है. जब हुक्का वग़ैरा का भी इस्तेमाल किया जाता है तो अक्सर अनेक लोग उसका इस्तेमाल करते हैं जिससे भी वायरस के संक्रमित होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

मानसिक व मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य

  • इस वर्ष बहुत सी पाबंदियाँ लागू होने के बावजूद, लोगों को ये भरोसा दिलाया जा सकता है कि उनके मज़हबी अक़ीदे यानी आस्था सम्बन्धी गतिविधियाँ सामान्य रूप से की जा सकती हैं, जिनमें अपने धार्मिक विश्वास में बेहतरी की दुआ करना, अपने ईमान को बेहतर करना, इबादत करना, अपना भोजन व अन्य चीज़ें दूसरों के साथ मिलकर खाना व इस्तेमाल करना; और अन्य लोगों का ख़याल रखने जैसे अहकाम शामिल हैं. लेकिन इन सब गतिविधियों के दौरान समुचित दूरी व फ़ासला बनाए रखना बेहद ज़रूरी है. 
  • बीमारों के लिए विशेष नमाज़ अदा करना और उम्मीदों व सांत्वना और हमदर्दी के पैग़ाम फैलाना भी रमदान के दौरान अच्छा समझा जाता है, साथ ही आम लोगों के स्वास्थ्य का ख़याल रखना भी बहुत ज़रूरी है.

घरेलू हिंसा का सामना

तालाबन्दी वाले स्थानों पर, खासतौर से महिलाओं, बच्चों और निर्बलों के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा के मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. मज़हबी हस्तियाँ इस तरह की हिंसा के ख़िलाफ़ आगे आकर आवाज़ बुलन्द कर सकती हैं और पीड़ितों को मदद के लिए आवाज़ उठाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उनकी मदद भी की जा सकती है.