कोविड-19: पुख़्ता व्यवस्था के अभाव में वैश्विक कार्रवाई लड़खड़ाने की आशंका 

20 अप्रैल 2020

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय राहत एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों ने 35 करोड़ डॉलर की रक़म जुटाने के लिए एक साझा अपील जारी की है जिसका इस्तेमाल कोविड-19 का जोखिम झेल रहे समुदायों तक पहुंचाने के लिए वैश्विक राहत केंद्रों (Global aid hubs) पर पुख़्ता इंतज़ाम किए जाएंगे. यूएन एजेंसियों ने आगाह किया है कि ज़रूरी राहत सेवाओं के अभाव में असरदार वैश्विक कार्रवाई में बड़ी रुकावट का सामना करना पड़ सकता है. 

ब्रिटेन के ‘द गार्डियन’ अख़बार में रविवार को प्रकाशित एक ख़त में विश्व स्वास्थ्य संगठन, विश्व खाद्य कार्यक्रम, मानवीय राहत मामलों में यूएन के समन्वय कार्यालय सहित यूएन एजेंसियों के अन्य शीर्ष अधिकारियों ने ध्यान दिलाया है कि सामान ले जाने वाले विमानों की उड़ानें रद्द होने से आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं और ज़रूरतमंद देशों तक मदद पहुँचाना मुश्किल हो रहा है. 

इस समस्या से निपटने के लिए वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाक़ों में तेज़ गति से कर्मचारियों की संख्या और आपूर्ति बढ़ाने के लिए अपील जारी की गई है. 

महामारी के उन देशों में फैलने की आशंका से चिंता गहरी हो रही है जहाँ स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता कोविड-19 से निपटने के लिए बेहद कमज़ोर है.

इससे वहाँ बीमारी को पैर पसारने का मौक़ा मिल सकता है और फिर उसके दुनिया में नए सिरे से फैलने की आशंका बढ़ जाएगी. 

उन्होंने आगाह किया कि मानवीय राहत एजेंसियाँ ऐसे इलाक़ों में काम करती हैं जहाँ वायरस पर क़ाबू पाना मुश्किल साबित हो सकता है.

यह समझना होगा कि कोई भी व्यक्ति तब तक सुरक्षित नहीं है जब तक हर व्यक्ति सुरक्षित नहीं है. 

“यह सिर्फ़ करुणा और सहानुभूति दिखाने की बात नहीं है, यह हमारे अपने हितों की भी बात है.”

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) को अपनी यातायात व इंतज़ाम संबंधी सेवाओं का दायरा विस्तृत रूप से बढ़ाना होगा. इसमें UN Humanitarian Air Service भी शामिल है जो सभी राहतकर्मियों को उपलब्ध है. 

उनका मंतव्य योरोप में उन दो कमर्शियल हवाई यातायात केंद्रों का इस्तेमाल करना है जो फ़िलहाल सक्रिय हैं और संकटग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय राहतकर्मियों को अफ़्रीका व मध्य पूर्व के देशों में परिवहन के लिए प्रयोग किए जा सकते हैं.

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इसके अलावा इसका उद्देश्य उन सात फ़ील्ड अस्पतालों में ज़रूरी सामग्री को पहुंचाना है जिनका इस्तेमाल संक्रमित राहतकर्मियों का इलाज करने के लिए  किया जा रहा है.

विकराल चुनौती

योरोपीय संघ सहित अन्य वैश्विक संगठनों में पिछले कुछ महीनों के दौरान आम सहमति बन पाना मुश्किल साबित हुआ है, और ऐसे में देशों को कोविड-19 की चुनौती से निपनटे के लिए ख़ुद ही रास्तों की तलाश करनी पड़ी है.

इसी पृष्ठभूमि में यूएन एजेंसियों की ओर से यह अपील जारी की गई है. 

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश 25 मार्च को वैश्विक मानवीय राहत कार्रवाई ‘Global Humanitarian Response Plan’ के तहत दो अरब डॉलर की रक़म जुटाने की अपील जारी कर चुके हैं. 

लेकिन अभी इस योजना के लिए 55 करोड़ डॉलर की धनराशि का ही संकल्प लिया गया है.

उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को दी जाने वाली धनराशि तब तक रोके जाने की बात कही है जब तक महामारी के शुरुआती चरण में संगठन द्वारा उठाए गए क़दमों की समीक्षा पूरी नहीं हो जाती. 

साझा ख़त में कोरोनावायरस को दूसरे विश्व के बाद मानवता के लिए सबसे विकट चुनौती बताया गया है – एक ऐसी चुनौती जो हदों में नहीं बंधी है, जिससे कोई देश या महाद्वीप अछूता नहीं है और जो बिना किसी भेद के निशाना बनाती है. 

ख़त में कहा गया है कि एक अदृश्य शत्रु के ख़िलाफ़ इस दौड़ में सभी देशों को लड़ाई में शामिल होना होगा लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये कार्रवाई एक ही स्थान से शुरू हो.

कोविड-19 सेवाओं का व्यापक दायरा

  • अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर मदद के लिए केंद्रों की समुचित व्यवस्था करना
  • हवाई और जहाज़रानी कार्गो सेवाएँ प्रदान करना
  • यात्री विमान सेवा उपलब्ध कराते समय वायरस ना फैलने देने के उपाय सुनिश्चित करना
  • अग्रिम मोर्चे पर डटे स्वास्थ्यकर्मियों को चिकित्सा कारणों से यात्रा में मदद करना
  • उपचार केंद्रों का निर्माण संभव बनाना
  • वास्तविक समय (रीयल टाइम) में आँकड़े एकत्र करना

विमान उड़ानों के रद्द होने और आपूर्ति मार्गों में व्यवधान आने से उन देशों पर भारी असर हुआ है जहाँ सबसे नाज़ुक हालात में लोग रह रहे हैं और जो माहमारी से निपटने के लिए मानवीय राहत की आपूर्ति पर निर्भर हैं.

“यह सभी के हित में है कि वायरस को बेरोकटोक फैलने, ज़िंदगियों व अर्थव्यवस्थाओं को तबाह होने से बचाने और वायरस को दुनिया भर में परिक्रमा करने से रोका जाए.”

यूएन एजेंसी के प्रमुखों ने भरोसा दिलाया है कि वैश्विक मानवीय राहत समुदाय की ओर से विश्व खाद्य कार्यक्रम द्वारा मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं से निर्बल व निर्धन समुदायों के लिए तेज़ गति से असरदार कार्रवाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी. 

उन्होंने कहा कि दुनिया में हर किसी को इस ख़तरे का सामना करना पड़ रहा है और इसलिए राहत पहुँचाने वाले हर क़दम की गति बढ़ानी होगी ताकि लोगों की ज़िंदगियाँ बचाई जा सकें.

पत्र के अंत में उन्होंने ध्यान दिलाया है कि यही वो घड़ी है जब एक सथ मिलकर आगे बढ़ना होगा, ताकि अनावश्यक पीड़ाओं की रोकथाम हो सके और सभी के लिए एक बेहतर भविष्य के निर्माण के वादे को पूरा किया जा सके. 

 

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