कोविड-19: पाबंदियां हटाने के लिए छह कसौटियों पर होगा निर्णय

13 अप्रैल 2020

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से निपटने के प्रयासों के तहत कई देशों में पिछले कई हफ़्तो से सामाजिक और आर्थिक पाबंदियां लागू हैं और अब इन पाबंदियों को हटाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि इस विषय में निर्णय लेते समय मानव स्वास्थ्य की रक्षा को सर्वोपरि रखना होगा. यूएन एजेंसी मंगलवार को छह नई कसौटियों की लिस्ट जारी करेगी जिसके तहत पाबंदियाँ हटाने का निर्णय लिया जा सकेगा.

दुनिया भर में कोरोनावायरस संक्रमण के अब तक 17 लाख 73 हज़ार मामलों की पुष्टि हो चुकी है और एक लाख 11 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है.

यूएन एजेंसी के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा कि हर समय कुछ नया सीखा जा रहा है और ताज़ा तथ्यों के अनुरूप रणनीति में बदलाव किए जा रहे हैं.

 “हमने कई बार पहले भी कहा है, यह एक नया वायरस है और कोरोनावायरस के कारण होने वाली पहली विश्वव्यापी महामारी है.”

“अनेक देशों से वायरस के बारे में जो तथ्य मिले हैं उनसे हमें एक स्पष्ट तस्वीर मिल रही है, यह वायरस किस तरह व्यवहार करता है, किस तरह इसे रोका जाए, और किस तरह इसका उपचार किया जाए.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन ये फ़ैसले लेने में देशों की मदद करने के उद्देश्य से मंगलवार को एक रणनीतिक परामर्श नए अपडेट के साथ जारी करेगा. 
इनमें उन छह कसौटियों का ज़िक्र होगा जिनके आधार पर पाबंदियों को हटाने का निर्णय लिया जा सकेगा. 

-    संक्रमण के फैलाव पर क़ाबू पा लिया गया हो
-    हर मामले का पता लगाने, परीक्षण करने, संक्रमितों को अलग रखने और उपचार करने, और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने के लिए स्वास्थ्य प्रणाली तैयार हो
-    स्वास्थ्य केंद्रों और नर्सिंग होम जैसे स्थानों पर महामारी फैलने का जोखिम कम किया जाए
-    कार्यस्थलों, स्कूलों और अन्य स्थानों पर रोकथाम के उपायों का प्रबंधन हो
-    अन्य देशों से आने वाले संक्रमणों के जोखिम से निपटने का प्रबंध हो
-    नए सामान्य हालात के अनुरूप जीवन में बदलाव लाने के लिए लोग व समुदाय शिक्षित व सशक्त हों

महानिदेशक घेबरेयेसस ने कहा है कि हर देश में ऐसे व्यापक उपाय लागू करने होंगे जिनसे संक्रमण की रफ़्तार में कमी आए और लोगों की ज़िंदगियाँ बचाई जा सकें. 

उन्होंने कहा कि कुछ देशों में पहले से ही सामाजिक व आर्थिक जीवन में पाबंदियां लागू हैं जबकि अन्य देशों में जल्द ही ऐसी पाबंदियाँ लागू करनी पड़ सकती हैं. 
इनमें अफ़्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित निम्न और मध्यम आय वाले देश शामिल हैं.

मानव स्वास्थ्य की रक्षा को इन दोनों हालात में लिए जाने वाले सभी निर्णयों के केंद्र में रखना होगा और यह ध्यान रखना होगा कि वायरस किस तरह और कितनी तेज़ी से फैलता है. 

उन्होंने बताया कि कोविड-19 तेज़ी से फैलता है और घातक है – वर्ष 2009 के फ़्लू से 10 गुना ज़्यादा घातक है. 

“हम जानते हैं कि  नर्सिंग होम जैसे भीड़भाड़ भरे माहौल में यह आसानी से फैल सकता है...हम जानते हैं कि कुछ देशों में मामले हर 3-4 दिनों में दोगुने हो रहे हैं.”

लेकिन अंत में एक सुरक्षित और असरदार वैक्सीन के ज़रिए ही संक्रमण के मामलों को पूरी तरह क़ाबू में किया जा सकता है. 

जिन देशों में आबादी का एक बड़ा हिस्सा निर्धन है, वहाँ उच्च आय वाले देशों  के उपाय व्यावहारिक नहीं हैं जिनमें लोगों को घर पर रहने के आदेश और अन्य पाबंदियाँ शामिल हैं. 

“अनेक निर्धन लोग, प्रवासी और शरणार्थी पहले से ही भीड़भाड़ वाले हालात में कम संसाधनों और सीमित स्वास्थ्य देखभाल के उपायों के साथ रह रहे हैं.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने चिंता जताई कि रोज़ मज़दूरी से जीवन-यापन करने वाले लोगों के लिए तालाबंदी में रह पाना बेहद मुश्किल है.

दुनिया भर से मिली रिपोर्टें दर्शाती हैं कि बहुत से लोगों को भोजन भी नहीं मिल पा रहा है. 

तालाबंदी के कारण एक अरब 40 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं जिससे उनकी शिक्षा पर असर पड़ा है, अनेक बच्चों के लिए स्कूलों में मिलने वाले भोजन पर असर पड़ा है जबकि अन्य पर दुर्वयव्यहार का ख़तरा मंडरा रहा है. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कोविड-19 के ख़िलाफ़ कार्रवाई में मानवाधिकारों का ख़याल रखा जाना होगा, विशेषकर नाज़ुक हालात में रह रहे लोगों का. 

 

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