कोविड-19: धीमे व सावधानी से निकलना होगा लॉकडाउन से

13 अप्रैल 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन कोविड-19 महामारी के प्रकोप का मुक़ाबला करने के लिए अनेक देशों में लागू किए गए लॉकडाउन यानी तालाबंदी को धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीक़े से हटाने की रणनीति पर देशों के साथ मिलकर काम कर रहा है. ध्यान रहे कि तालाबंदी के तहत लोगों को अपने घरों में ही रहने को कहा गया है. एजेंसी के मुखिया टैड्रॉस ऐडहेनॉम घेबरेयेसेस ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में तालाबंदी को एकदम से हटाने के ख़िलाफ़ आगाह भी किया. 

उन्होंने कहा, “सभी की तरह, विश्व स्वास्थ्य संगठन भी चाहता है कि पाबंदियाँ हट जाएँ.”

“लेकिन साथ ही ये भी ध्यान रहे कि पाबंदियाँ एक झटके में हटाने से वायरस के फिर से तेज़ी से सिर उठाने के हालात बन सकते हैं. अगर सही तरीक़े से इंतज़ाम नहीं किए गए तो पीछे हटने या आगे बढ़ने का रास्ता समान रूप से ख़तरनाक़ हो सकता है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुखिया ने छह बिन्दुओं पर ख़ासतौर से विचार करने का प्रस्ताव रखा है. इनमें संक्रमण पर नियंत्रण करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएँ व चिकित्सा सेवाएँ समुचित मात्रा में उपलब्ध होना शामिल है.

दीर्घ अवधि की स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं जैसी व्यवस्थाओं में भी कोविड-19 के संक्रमण के ख़तरों को कम से कम करना होगा. साथ ही कामकाज के स्थानों, स्कूलों और अन्य ज़रूरी स्थानों पर भी रोकथाम के असरदार उपाय लागू करने होंगे.  

उन्होंने कहा, “संक्रमण के बाहरी स्थानों से आने पर रोक लगे और इन सब से ज़्यादा ज़ोर देने वाली बात है कि तमाम लोग व समुदाय पूरी तरह से जागरूक हों और तालाबंदी हटाए जाने के बाद के हालात के लिए पूरी तरह तैयार हों.”

“इस महामारी का ख़ात्मा करने की मुहिम में हर एक व्यक्ति की अहम भूमिका है.”

'ख़तरे की घंटी'

इस बीच कुछ देशों से ख़बरें आ रही हैं कि उनके यहाँ स्वास्थ्यकर्मियों की 10 प्रतिशत से ज़्यादा संख्या कोरोनावायरस से संक्रमित हो गई है. टैड्रॉस ने इस घटनाक्रम को “ख़तरे की घंटी” क़रार दिया है.

चीन, इटली, सिंगापुर, स्पेन और अमरीका से मिले आँकड़े बताते हैं कि ऐसे कुछ संक्रमण स्वास्थ्य सेवाओं से बाहर के स्थानों पर हो रहे हैं, जैसेकि घरों या समुदायों में.

स्वास्थ्य सेवाओं में संक्रमण के कारकों में कोविड-19 के संक्रमण की देर से पहचान होना और प्रशिक्षण व साँस से संबंधित लक्षणों को समझकर उनका इलाज करने अनुभव की कमी होना भी एक महत्वपूर्ण घटक है. 

बहुत से स्वास्थ्यकर्मी बड़ी संख्या में मरीज़ों का इलाज कर रहे हैं, उन्हें लंबी पालियाँ करनी पड़ती हैं और आराम करने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है. 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने कहा कि हालाँकि सबूतों से पता चलता है कि स्वास्थ्यकर्मी जब सही तरीक़े से बचाव उपकरण (पीपीई) पहनते हैं तो संक्रमण को रोका जा सकता है. 

“इससे इस दलील की अहमियत और भी ज़्यादा बढ़ जाती ह कि स्वास्थ्यकर्मियों को फ़ेस मास्क, दस्ताने, गाउन और अन्य बचाव उपकरण व सामग्री आसानी से उपलब्ध हों जिनकी उन्हें अपना असरदार व सुरक्षित तरीक़े से करने के लिए ज़रूरत होती है.”

विश्व स्वास्थ्य संगठन ज़रूरी सामान व स्वास्थ्य उपकरणों की आपूर्ति के मामले में देशों गकी मदद कर रहा है. साथ ही ज़रूरी सामान की उपलब्धता और वितरण बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है. 

अफ्रीका में भी कोरोनावायरस

टैड्रॉस ने कहा कि एक तरफ़ जबकि कोविड-19 से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले स्पेन व इटली जैसे योरोपीय देशों में इस महामारी के मामले कुछ कम हो रहे हैं, दूसरी तरफ़ ये जानलेवा वायरस अफ्रीका के ग्रामीण इलाक़ों में फैल रहा है. 

इस वायरस के संक्रमण के झुंडों व सामुदायिक स्तर से इसके फैलाव के मामले 16 से ज़्यादा अफ्रीकी देशों में पाए गए हैं. इसके कारण स्थानीय स्वास्थ्य प्रणालियों पर बहुत ज़्यादा बोझ पड़ने वाला है, जोकि पहले से ही बहुत ज़्यादा कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, “जी20 देशों की हाल ही में हुई बैठक में अफ्रीका के लिए ठोस समर्थन व्यक्त किया गया था. हालाँकि अफ्रीका में कोविड-19 के मामले अभी संख्या में तो कम हैं लेकिन बढ़ रहे हैं, इसलिए वहाँ के देशों के लिए ये समर्थन तेज़ किया जाना चाहिए.”

 

♦ समाचार अपडेट रोज़ाना सीधे अपने इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ किसी विषय को सब्सक्राइब करें
♦ अपनी मोबाइल डिवाइस में यूएन समाचार का ऐप डाउनलोड करें – आईफ़ोन iOS या एंड्रॉयड