कोविड-19 से मुक़ाबले में महिलाओं व लड़कियों की भलाई पर हो ध्यान

9 अप्रैल 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा है कि लैंगिक समानता व महिलाधिकारों के क्षेत्र में पिछले दशकों के दौरान अथक मेहनत से जो प्रगति हासिल की गई है, वो कोविड-19 महामारी के कारण ख़तरे  में पड़ती नज़र आ रही है. यूएन प्रमुख की ये स्पष्ट चेतावनी एक ऐसे नीति दस्तावेज़ में पेश की गई है जिसमें ये विवरण दिया गया है कि मौजूदा महामारी के कारण किस तरह पहले से मौजूद असमानताएँ और भी ज़्यादा गहरी हो रही हैं.

इन असमानताओं के और ज़्यादा बढ़ने से महिलाओं और लड़कियों पर महामारी का असर कहीं ज़्यादा हो रहा है. 

महासचिव ने इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के मौक़े पर एक वीडियो संदेश में कहा, “मैं तमाम देशों की सरकारों का आहवान करता हूँ कि वो कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के सभी प्रयासों में महिलाओं और लड़कियों को केंद्रे में रखें.”

“इस पहल की शुरुआत होती है महिलाओं को नेत्रियों को ज़्यादा प्रतिनिधित्व व निर्णय लेने की क्षमताओं वाले स्थानों में उनकी मौजूदगी बढ़ाकर.” 
कोविड-19 के परिणाम

ये महामारी एक ऐसे वर्ष में सामने आई है जब दुनिया महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता पर बीजिंग प्लैटफ़ॉर्म फॉर एक्शन की 25वीं वर्षगाँठ मना रही है.

कोविड-19 का संक्रमण पृथ्वी के लगभग हर कोने में पाया गया है. दिसंबर 2019 में चीन के वूहान प्रान्त में इस वायरस के संक्रमण का पहला मामला सामने आने के बाद से इसके संक्रमण के लगभग 15 लाख मामले और 85 हज़ार लोगों की मौत होने की ख़बरें हैं.  

यूएन प्रमुख ने कहा कि इस महामारी से वैसे तो हर एक इंसान प्रभावित है लेकिन इसके महिलाओं और लड़कियों पर इसके सबसे ज़्यादा असर हो रहे हैं जो हर क्षेत्र में हैं – स्वास्थ्य से लेकर अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक संरक्षा तक. 

एंतोनियो गुटेरश ने कहा, “दुनिया भर में लगभग 60 फ़ीसदी महिलाएँ अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में कामकाज करती हैं, जिन्हें कम मेहनताना मिलता है, उनके पास धन की बचत कम होती है, और उनका ग़रीबी के गर्त में चले जाने का बहुत ज़्यादा जोखिम होता है. जैसे-जैसे बाज़ारों में गिरावट आती है और व्यवसाय बंद होते हैं, लाखों-करोड़ों महिलाओं के कामकाज व आजीविकाएँ ख़त्म हो जाती हैं.”

किसी अफ्रीकी देश में एक महिला अपनी बेटी के साथ एक स्वास्थ्य केंद्र पर कोविड-19 से बचाव के लिए एहतियाती उपाय करती हुई.
© UNICEF/Frank Dejongh
किसी अफ्रीकी देश में एक महिला अपनी बेटी के साथ एक स्वास्थ्य केंद्र पर कोविड-19 से बचाव के लिए एहतियाती उपाय करती हुई.

“महिलाएँ एक तरफ़ तो आमदनी वाला कामकाज व रोज़गार गँवा रही हैं, उसके साथ ही उनका ऐसा कामकाज बढ़ गया है जिसमें उन्हें धन की तो कोई आय नहीं होती, बल्कि स्कूल बंद होने से अपने बच्चों व बुज़ुर्गों की देखभाल की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है. ये माहौल अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है और इसका असर महिलाओं के अधिकारों और उनके अवसरों को गँवाने में बहुत बड़ा कारक साबित हो रहा है.”

उन्होंने कहा कि अनेक देशों में जबरन तालाबंदी होने और आवागमन पर पाबंदी लगाने से महिलाएँ लैंगिक हिंसा का भी सामना कर रही हैं क्योंकि वो अपने दुर्व्यवहारी साथी के साथ घर में सीमित रहने को मजबूर हैं, जबकि मौजूदा समय में सहायता सेवाएँ या तो बाधित हैं या बिल्कुल ही उपलब्ध नहीं हैं.

महिलाओं व लड़कियों पर हो ध्यान

महासचिव ने कहा कि कोविड-19 महामारी ना केवल वैश्विक स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए एक विशाल चुनौती है बल्कि ये इंसानियत की भावना का भी एक इम्तेहान है, और बहुत ज़रूरी है कि इस महामारी के बाद एक बेहतर दुनिया उभरकर सामने आए.

उन्होंने कहा, “इस महामारी का एकजुट मुक़ाबला करने, तेज़ी से उबरने और हर किसी के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकार सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है.”

यूएन प्रमुख ने तमाम देशों की सरकारों से आग्रह करते हुए कहा कि महामारी से उबरने के प्रयासों में महिलाओं और लड़कियों के कल्याण पर ख़ास ध्यान दिया जाए, उन्हें नेत्रियाँ बनाने के सात-साथ निर्णय निर्माण प्रक्रिया में भी बराबरी के साथ शामिल किया जाए.

उन्होंने कहा, “अर्थव्यवस्था को बचाने और उसमें जान फूँकने के प्रयासों में महिलाओं पर विशेष ध्यान रहे, जिनमें नक़दी स्थानान्तरण से लेकर अग्रिम धनराशि व क़र्ज़ देने के मामलों में भी. अवैतनिक देखभाल कामकाज को मूल्यवान व सेवा और अर्थव्यवस्था को अहम योगदान के रूप में पहचान मिले.”

घरेलू हिंसा क़तई स्वीकार्य नहीं

इस बीच 124 सदस्य देशों के राजदूतों और पर्यवेक्षकों ने कोविड-19 महामारी के कारण पैदा हुए माहौल में महिलाओं के ख़िलाफ़ घरेलू हिंसा में बढ़ोत्तरी के मामलों पर ध्यान देने की महासचिव की पुकार पर ध्यान देते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.  

इन देशों ने लैंगिक हिंसा की रोकथाम और प्रभावितों को सहायता देने के मुद्दे को राष्ट्रीय उपायों के एक हिस्से के रूप में शामिल करने का संकल्प व्यक्त किया है.

इन देशों के राजदूतों ने यूएन प्रमुख को लिखे पत्र में कहा है, “घरेलू हिंसा को क़तई स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसकी ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा है.”

पत्र में कहा गया है कि इस संकट में महिलाएँ केवल पीड़ित भर नहीं हैं, बल्कि वो कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के प्रयासों में प्रमुख भूमिका निभा रही हैं.

“स्वास्थ्य सेवाओं में अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में लगभग 70 प्रतिशत महिलाएँ हैं. अवैतनिक कामकाज करने वालों में ज़्यादा संख्या महिलाओं की ही है और सभी देशों में टिकाऊ विकास में महिलाएँ बहुत महत्वपूर्ण योगदान करने वाली हस्तियाँ हैं.”

पत्र में कहा गया है, “इसलिए हमें सुनिश्चित करना होगा कि महामारी का मुक़ाबला करने के तमाम प्रयासों और निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी हो. यही एक मात्रा तरीक़ा है – सभी के लिए बेहतर भविष्य निर्माण का.”

 

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