कोविड-19: नर्सें हैं स्वास्थ्य प्रणाली का आधार, हरसंभव मदद की पुकार

भारत में एक स्वास्थ्य केंद्र में महिला का मेडिकल परीक्षण.
© UNICEF/Ashima Narain
भारत में एक स्वास्थ्य केंद्र में महिला का मेडिकल परीक्षण.

कोविड-19: नर्सें हैं स्वास्थ्य प्रणाली का आधार, हरसंभव मदद की पुकार

स्वास्थ्य

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 से लड़ाई में नर्सें अग्रिम मोर्चे पर डटी हैं लेकिन निजी बचाव सामग्री और परीक्षणों की भारी क़िल्लत और उन पर काम का अभूतपूर्व भार दर्शाता है कि वे कितने नाज़ुक हालात में काम कर रही हैं. मंगलवार, 7 अप्रैल, को ‘विश्व स्वास्थ्य दिवस’ पर यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने स्वास्थ्य प्रणालियों में नर्सों के अनूठे योगदान को रेखांकित किया है और यूएन महासचिव ने स्वास्थ्यकर्मियों की कड़ी मेहनत के लिए आभार जताया है. 

यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने नर्सों, दाइयों, तकनीकी मददगारों, चिकित्सा सहायकों, डॉक्टरों, ड्राइवरों, सफ़ाई कर्मचारियों और प्रशासकों सहित अन्य लोगों को अपने संबोधन में कहा कि वे हमें सुरक्षित रखने के लिए दिन-रात अथक काम कर रहे हैं. 

“आज हम पहले से कहीं ज़्यादा आप सभी के आभारी हैं. आप हर समय अपनी ज़िंदगी को जोखिम में डाल कर काम करते हैं ताकि इस महामारी से होने वाले वाले विध्वंस का मुक़ाबला किया सके.”

मंगलवार को इस दिवस पर ‘State of the World’s Nursing Report’ नामक एक रिपोर्ट भी जारी की गई है जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन, ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ नर्सेज़’ और ‘नर्सिंग नाउ’ ने साझा रूप से तैयार किया है.

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इस रिपोर्ट में वैश्विक स्वास्थ्य कार्यबल के इस अहम हिस्से को मज़बूत बनाने की तत्काल ज़रूरत को रेखांकित किया गया है.

191 देशों में नर्सों व दाइयों के कामकाज और योगदान पर अपनी तरह की यह पहली रिपोर्ट है.

इस रिपोर्ट में उनके हिंसा का शिकार होने और डराए-धमकाए जाने पर चिंता जताई गई है और संरक्षण के लिए विशेष उपायों की ज़रूरत को रेखांकित किया गया है. 

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने कहा है कि नर्सें किसी भी देश की स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ हैं.

“आज नर्सें कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई के अग्रिम मोर्चे पर डटी हैं. यह रिपोर्ट हमें उनकी अनूठी भूमिका की तरफ़ ध्यान दिलाती है और हमें नींद से जगाने वाली पुकार है कि उन्हें ज़रूरी मदद सुनिश्चित की जाए ताकि वे दुनिया को स्वस्थ रख सकें.”

स्वास्थ्य सेवाओं का आधार

विश्व भर में कुल स्वास्थ्यकर्मियों की आधे से ज़्यादा संख्या नर्सों की है और स्वास्थ्य प्रणाली में उनका अहम योगदान है. 

हमेशा की तरह कोविड-19 और अन्य सभी स्वास्थ्य चुनौतियों से मुक़ाबले में उनकाअहम योगदान होता है. 

रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक स्तर पर नर्सों व दाइयों की कमी है. दुनिया भर में कुल नर्सों की संख्या दो करोड़ 79 लाख है जिनमें एक करोड़ 93 लाख पेशेवर नर्स हैं. 

स्टाफ़ की कमी के कारण स्वास्थ्यकर्मियों के लिए मौजूदा महामारी के फैलाव के दौरान स्वास्थ्य जोखिम बढ़े हैं.

साथ ही नर्सिंग प्रतिनिधियों का मानना है कि इससे टिकाऊ विकास लक्ष्यों के तहत वर्ष 2030 तक सभी के लिए स्वास्थ्य को हासिल करने के प्रयासों को भी झटका लगा है. 

वर्ष 2030 तक नर्सों की मौजूदा संख्या में कम से कम 60 लाख की वृद्धि करने की बात कही गई है.

फ़िलहाल दुनिया की 80 फ़ीसदी से ज़्यादा नर्सें विश्व आबादी के महज़ 50 फ़ीसदी लोगों को सेवाएं प्रदान कर रही हैं. 

विश्व भर में नर्सिंग स्टाफ़ का एक बड़ा हिस्सा फ़िलिपींस और भारत से आता है.

हॉवर्ड कैटन ने बताया कि दोनों देशों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवाओं में कमी का अनुभव किया जा रहा है जिससे आने वाले वर्षों में विश्व में नर्सिंग स्टाफ़ की उपलब्धता और ज़्यादा प्रभावित हो सकती है.

इससे भी ज़्यादा चिंताजनक बात अफ़्रीका और लातिन अमेरिका में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी है; और दक्षिण-पूर्व एशिया और पूवी भूमध्यसागर का क्षेत्र भी इस चुनौती से अछूता नहीं है. 

स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर चिंता

स्वास्थ्यकर्मियों में कोविड-19 से संक्रमित होने का स्तर ख़तरे की घंटी का सबब है. आँकड़े दर्शाते हैं कि इटली में दो हफ़्ते पहले संक्रमण दर 9 फ़ीसदी और स्पेन में 14 फ़ीसदी आंकी गई है. 

इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ़ नर्सेज़ के प्रमुख और रिपोर्ट तैयार करने वाली टीम के सह-प्रमुख हॉवर्ड कैटन ने बताया कि चीन में दिसंबर 2019 में कोरोनावायरस का पहला मामला सामने आने के बाद अब तक 100 से ज़्यादा स्वास्थ्यकर्मियों की मौत हो चुकी है. 

वीडियो कॉंफ्रेंसिंग के ज़रिए पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया, “हमारा मानना है कि निजी बचाव सामग्री की कमी और आपूर्ति में मुश्किलें निसंदेह संक्रमण दर के ज़्यादा होने और कुछ मौतों के लिए ज़िम्मेदार हैं.”

इस विश्वव्यापी महामारी के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों पर हमलों में भी तेज़ी आई है.

रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञों ने बयान किया है कि किस तरह स्वास्थ्यकर्मियों को कोविड-19 के समाधान के बजाय संभावित जोखिम के रूप में देखा जाता है.

इस चुनौती पर पार पाने के लिए जनता में जागरूकता के प्रसार और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए उपाय अपनाने पर ज़ोर दिया गया है. 

ज़िम्बाब्वे में बचाव सामग्री के अभाव से चिंतित नर्सों के हड़ताल पर जाने की रिपोर्टें मिली हैं क्योंकि उनमें भय पनप रहा है.

विशेषज्ञों ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कोविड-19 के परीक्षण को बेहद आवश्यक बताया है ताकि वे आश्वस्त हो कर काम पर लौट सकें.

उनका कहना है कि एक बड़ी संख्या ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों की है जो संक्रमित होने के संदेह या आशंका की वजह से काम पर नहीं जा रहे हैं.

इसलिए यह ज़रूरी है कि परीक्षण उपलब्ध कराने के लिए निवेश पर ज़ोर दिया जाए. 

टीम के सह-प्रमुख हॉवर्ड कैटन ने स्वास्थ्यकर्मियों के लिए दुनिया भर से मिले समर्थन व आभार संदेशों का स्वागत किया है.

उन्होंने कहा है कि अनेक देशों में लोगों ने ताली बजाकर एकजुटता का प्रदर्शन किया है जो दर्शाता है कि नर्सों के लिए रवैये में बदलाव आ रहा है. 

बेहतरी के उपाय 

नर्सिंग सेवाओं की बेहतर व्यवस्था करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सभी देशों के लिए उपायों की सिफ़ारिश की है जिनमें से कुछ निम्न प्रकार हैं:

- नर्सों को शिक्षा व रोज़गार के लिए फ़ंडिंग को बढ़ाया जाना
- स्वास्थ्यकर्मियों के बारे में डेटा एकत्र करने, उसका विश्लेषण करने की क्षमता को मज़बूत बनाना
- नर्सों को वैज्ञानिक, टैक्नॉलजी और समाज-विज्ञान से जुड़े विषयों में प्रशिक्षण प्रदान करना
- नए नेतृत्व पदों को सृजित करना और युवा नर्सों में नेतृत्व क्षमता विकसित करना
- नर्सों में उनकी संभावनाओं के अनुरूप ज़िम्मेदारियां निभाने के लिए ज़रूरी माहौल सुनिश्चित करना
- कामकाज के हालात को बेहतर बनाना और पर्याप्त संख्या में स्टाफ़ की नियुक्त करना
- लैंगिक आवश्यकताओं के अनुरूप नीतियों को लागू किया जाना  
- नर्सिंग के क्षेत्र में नियामकों का आधुनिकीकरण होना और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य मानक स्थापित करना