जलवायु समस्या के समाधान का हिस्सा है टिकाऊ जल प्रबंधन

22 मार्च 2020

रविवार, 22 मार्च, को ‘विश्व जल दिवस’ (World Water Day) पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक अहम रिपोर्ट दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और उनके असर को कम करने के लिए जल संसाधानों के इस्तेमाल के तरीक़ों में बड़ा बदलाव आवश्यक है. नई रिपोर्ट में बढ़ते जल संकट और कृषि व उद्योगों में जल के दक्षतापूर्ण उपयोग के लिए ठोस प्रयासों की पुकार लगाई है.
 

यूएन रिपोर्ट में पेश योजना में असरदार कार्रवाई के लिए तीन बातों को अहम बताया गया है: जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के लिए लोगों को तैयार करना; आजीविका के साधनों की सहन-क्षमता बढ़ाना; और जलवायु परिवर्तन के कारकों को कम करना. 

संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने, यूएन वॉटर के सहयोग से ‘World Water Development Report 2020’ नामक इस रिपोर्ट को तैयार किया है जिसमें आगाह किया गया है कि विश्व को अगले कई दशकों तक जल असुरक्षा और जलवायु परिवर्तन, दो बड़े संकटों का सामना करना पड़ेगा.

इन चुनौतियों पर पार पाने के लिए इस रिपोर्ट में नीति-निर्धारकों के लिए ज़रूरी औज़ारों और जानकारी का उल्लेख है जिनके ज़रिए जल संबंधी टिकाऊ नीतियों को बनाया जा सकता है और निवेश बढ़ाकर उन्हें अमल में लाया जा सकता है. 

यूनेस्को की महानिदेशक ऑड्री अज़ोले ने कहा कि, “जल ऐसा शब्द है जो कभी-कभार ही अंतरराष्ट्रीय जलवायु समझौतों में दिखाई देता है, लेकिन वह खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा उत्पादन, आर्थिक विकास और ग़रीबी उन्मूलन जैसे अहम विषयों में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है.”

उन्होंने सचेत किया कि जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में अब तक हुए वैश्विक प्रयास महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप नहीं रहे हैं और इसीलिए जल की संभावनाओं की भी तलाश करनी चाहिए.

जल समस्या का नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा हो सकता है और इसके ज़रिए जलवायु परिवर्तन की रफ़्तार में कमी लाने और सहन-क्षमता बढ़ाने में सफलता हासिल की जा सकती है. 

विश्व जल दिवस पर अपने संदेश में यूएन महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने सभी हिस्सेदारों से जलवायु कार्रवाई का स्तर व दायरा बढ़ाने और जल संसाधनों की टिकाऊ क्षमता बढ़ाने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा है कि सभी को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी. 

उन्होंने ध्यान दिलाया कि वैश्विक तापमान में बढ़ोत्तरी को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से दुनिया एक बेहतर स्थिति में होगी और जल संकट को हल करना भी संभव हो सकेगा. 

“जल ऐसा प्राथमिक ज़रिया है जिससे हम जलवायु व्यवधानों को महसूस करते हैं – चरम मौसम की घटनाओं जैसे सूखा और बाढ़ से लेकर ग्लेशियरों का पिघलना, पानी में खारापन और समुद्री जलस्तर का बढ़ना.” इससे स्वास्थ्य और उत्पादकता पर दुष्प्रभाव होता है और अस्थिरता व अशांति का ख़तरा बढ़ जाता है. 

लेकिन उन्होंने ध्यान दिलाया कि समाधान भी स्पष्ट है: समुचित जल भंडारण की व्यवस्था और आधारभूत ढांचा तैयार करने से जल के इस्तेमाल को दक्ष बनाया जा सकता है. जलवायु जोखिमों से निपटने में हर स्तर पर जल प्रबंधन ज़रूरी है. 

 

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