कोविड-19 से निपटने में फ़लस्तीनियों के साथ भेदभाव स्वीकार्य नहीं

19 मार्च 2020

संयुक्त राष्ट्र के एक मानवाधिकार विशेषज्ञ ने इसराइल, फ़लस्तीनी प्राधिकरण और हमास से आग्रह किया है कि उन्हें ग़ाज़ा, पश्चिमी तट और पूर्वी येरूशेलम में सभी फ़लस्तीनी लोगों को भी कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिए उनके स्वास्थ्य का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए अपनी अंतरराष्ट्रीय क़ानूनी ज़िम्मेदारियाँ भली-भाँति तरीक़े से निभाएँ.

1967 से ही इसराइल द्वारा क़ब्ज़ा किए हुए फ़लस्तीनी इलाक़ों में मानवाधिकार स्थिति के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष रैपोर्टेयर माइकल लिंक ने कहा है कि “चौथे जिनीवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 56 में वर्णित क़ानूनी दायित्व में ये अनिवार्य बनाया गया है कि एक इसराइल को एक क़ब्ज़ा करने वाली ताक़त के रूप में क़ब्ज़ा किए हुए इलाक़ों में सभी लोगों को संक्रामक बीमारियों और महामारियों की रोकथाम के लिए सभी ज़रूरी व संभव उपाय किए जाएँ.

मानवाधिकार विशेषज्ञ का कहना है कि सभी ज़िम्मेदार प्राधिकरणों – इसराइल, फ़लस्तीनी प्राधिकरण और हमास की ये ज़िम्मेदारी है कि वो इस महामारी की रोकथाम व इलाज के लिए किसी के भी साथ कोई भेदभाव किए बिना सार्वजनिक स्वास्थ्य के ठोस उपाय करें और ज़रूरी स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराएँ.

माइकल लिंक ने कहा, “इसराइल, फ़लस्तीनी प्राधिकरण और हमास सभी को इस महामारी की रोकथाम और इस पर क़ाबू पाने के प्रयासों में मानवाधिकारों पर आधारित रुख़ को प्रमुखता देनी होगी.”

“गरिमा के अधिकार के अंतर्गत ये ज़रूरी है कि इन तीनों ताक़तों के आधीन रहने वाले तमाम लोगों को किसी भेदभाव के बिना ही स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों और इलाज में भी बराबरी सुनिश्चित हो.”

विशेष मानवाधिकार विशेषज्ञ ने कुछ चिंतित अंदाज़ में ये भी कहा कि इसराइल के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 का मुक़ाबला करने के लिए जागरूकता फैलाने के इरादे से जो शुरूआती साहित्य प्रकाशित किया, वो लगभग विशिष्ट रूप से हीब्रू भाषा में था, और अरबी भाषा में कोई सूचना नहीं प्रकाशित की गई.

ये गंभीर असंतुलन आपत्तियाँ दर्ज कराए जाने के बाद संभवतः दूर किया जा रहा है, मगर इस घटनाक्रम से सभी के साथ समानता वाला बर्ताव करने का मुद्दा और उजागर होता है.

'मानवाधिकार हर हाल में सुनिश्चित हों'

माइकल लिंक ने कहा, “मानवाधिकारों पर किसी भी तरह का प्रतिबंध चाहे वो स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता या आवागमन पर पाबंदी – वो सभी बिल्कुल न्यायसंगत, आनुपातिक और होने चाहिए, और उतनी ही अवधि के लिए लागू होने चाहिए, जो बहुत ज़रूरी हो और वो भी बिना किसी भेदभाव के.”

विशेष रैपोर्टेयर ने इससे पहले भी कहा था कि इसराइल ने अपने क़ब्ज़े वाले इलाक़े में रहने वाले फ़लस्तीनी लोगों के स्वास्थ्य पाने के अधिकार सुनिश्चित करने में अपनी अंतरराष्ट्रीय ज़िम्मेदारियों का “बड़े पैमाने” पर उल्लंघन किया है.

मरीज़ों और स्वास्थ्यकर्मियों के आवागमन पर लगे व्यापक प्रतिबंधों के कारण पहले ही फ़लस्तीनी लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बाधित हुई है. कोविड-19 के संदर्भ में, जहाँ लक्षण ज़्यादा गंभीर होने से मरीज़ की हालत बहुत तेज़ी से बिगड़ती है, तो उसे अस्पताल पहुँचाने में किसी भी तरह की देरी घातक साबित हो सकती है.

माइकल लिंक ने कहा, “मैं ख़ासतौर पर ग़ाज़ा में कोविड-19 के आशंकित प्रभाव को लेकर बहुत चिंतित हूँ. वहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था तो ये महामारी फैलने से पहले भी बहुत जर्जर अवस्था में थी. वहाँ आवश्यक दवाओं का भंडार बहुत ही कम है. ग़ाज़ा में पीने योग्य पानी के प्राकृतिक स्रोत बड़े पैमाने पर संक्रमित हो चुके हैं.”

“वहाँ की बिजली व्यवस्था जब-तब बिजली आपूर्ति करती है. पूरे ग़ाज़ा पट्टी क्षेत्र में बहुत ही भीषण सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के बीच अत्यंत ग़रीबी मौजूद है.”

माइकल लिंक का कहना था कि ग़ाज़ा की आबादी पहले ही बहुत नाज़ुक हालात में रह रही है, कुपोषण बढ़ रहा है, ग़ैर-संचारी बीमारियों की रोकथाम के उपाय भी बहुत कमज़ोर हैं, घनी आबादी और ख़स्ता हाल में बस्तियाँ, एक ऐसी वृद्ध आबादी जिसे चिकित्सा देखभाल सुविधाएँ हासिल नहीं हैं और ऐसे में धूम्रपान की बहुत उच्च दर ने हालात को और ख़राब बना दिया है.

विशेष रैपोर्टेयर का कहना था कि ग़ाज़ा क्षेत्र में अगर किसी बड़ी बीमारी के फैलने से वहाँ के स्वास्थ्यकर्मियों पर बहुत ज़्यादा ज़ोर पड़ जाएगा जोकि पहले से भी भारी दबाव वाली परिस्थितियों में काम कर रहे हैं.

इन स्वास्थ्यकर्मियों को पिछले लगभग एक दशक के दौरान तीन बड़े पैमाने वाले सैनिक आक्रमणों की स्थित में ज़रूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाएँ मुहैया कराने के भारी दबाव से गुज़रना पड़ा है. इसके अलावा ग्रेट मार्च ऑफ़ रिटर्न नाम प्रदर्शनों के दौरान हताहतों को भी चिकित्सा सेवाएँ मुहैया करानी पड़ीं. 

उनका ये भी कहना है कि संबंधित प्राधिकरणों और सरकारों को महामारी से निपटने के प्रयासों के दौरान नस्लभेद, अन्य (बाहरी) लोगों से नफ़रत, पूर्वाग्रह, असहिष्णुता या किसी अनय् तरह के भेदभाव की घटनाओं पर तुरंत ध्यान देना होगा.

 

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