'मज़बूत नेतृत्व व ठोस नीतियों' से करोड़ों का रोज़गार बचाना संभव

18 मार्च 2020

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने कोविड-19 के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते संकट के बादलों के बीच रोज़गार बचाए रखने के लिए अनेक उपाय सुझाए हैं. यूएन एजेंसी ने कहा है कि अगर सरकारों ने जल्द क़दम उठाए तो कार्यस्थलों पर कर्मचारियों का ख़याल रखने, अर्थव्यवस्था को स्फूर्ति प्रदान करने और लाखों-करोड़ों लोगों का रोज़गार बचाना संभव हो सकेगा. 

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने विश्वव्यापी महामारी से उपजे आर्थिक व श्रम संकट के कारण दुनिया भर में बेरोज़गारी बढ़ने की आशंका जताई है और कहा है कि इन हालात को टालने के लिए वैश्विक स्तर पर एक समन्वित, नीतिगत कार्रवाई करने की ज़रूरत होगी.

उसी तरह जैसेकि वर्ष 2008 में वित्तीय संकट के बाद बेरोज़गारी से निपटने के उपाय किए गए थे.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय रायडर ने कहा कि, “अब यह महज़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं है, यह एक बड़ा श्रम बाज़ार और आर्थिक संकट है जिसका लोगों पर भारी असर पड़ रहा है.”

“2008 में दुनिया ने वैश्विक वित्तीय संकट के दुष्परिणामों से निपटने के लिए असाधारण एकुजटता दिखाई थी और उसके ज़रिए बदहाल स्थिति को टालने में मदद मिली. हमें उसी प्रकार के नेतृत्व और सकंल्प की आवश्यकता है.”

यूएन एजेंसी की ‘COVID-19 and the world of work: Impacts and responses’ नामक नई रिपोर्ट में तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित व्यापक क़दम तत्काल उठाने पर बल दिया गया है: कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा; अर्थव्यवस्था व रोज़गार क्षेत्र में स्फूर्ति लाना; और रोज़गार व वेतन संबंधी मदद प्रदान करना.

इन उपायों के तहत सामाजिक संरक्षण सुनिश्चित करना, लोगों के रोज़गारों की सुरक्षा करना और उन्हें वित्तीय व टैक्स संबंधी राहत प्रदान करना अहम होगा. 

“इस तरह के संकट के दौर में हमारे पास दो प्रमुख औज़ार हैं जो क्षति को कम करने और जनता का भरोसा बहाल करने में काम आ सकते हैं.” 

यूएन एजेंसी प्रमुख गाय रायडर ने पहला औज़ार सामाजिक संवाद बताया जिसके तहत कर्मचारियों, नियोक्ताओं (Employers) और उनके प्रतिनिधियों के साथ संपर्क क़ायम करना महत्वपूर्ण है.

इससे लोगों में भरोसा पैदा क़ायम करने और इस संकट पर पार पाने में मदद मिलेगी. 

दूसरा औज़ार अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के तहत नीतिगत कार्रवाई है जिससे टिकाऊ और न्यायसंगत ढंग से उबरने में मदद मिलेगी.

कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए यूएन एजेंसी ने घरों से काम करने; काम के घंटों में बदलाव कर उन्हें लचीला बनाने; बीमारी के कारण सवेतन छुट्टियों की संख्या बढ़ाने; और कार्यालयों में ज़रूरी सवालों की मदद के लिए हॉटलाइन और वेबसाइटों की व्यवस्था करने की भी पैरवी की है.

साथ ही हर प्रकार के भेदभाव और बहिष्करण पर लगाम कसने को अहम माना गया है. 

स्कूलों व छोटे बच्चों के देखभाल केंद्रों के बंद होने की स्थिति में कामकाजी कर्मचारियों को सहारा देने के इरादे से व्यवस्था करना भी ज़रूरी होगा. 

अर्थव्यवस्था में प्राण फूंकना

ब्याज़ दरों में कटौती करने जैसी सक्रिय वित्तीय व मौद्रिक नीतियों के सहारे अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने और नए रोज़गार पैदा करने में मदद मिलेगी. 

सामाजिक सुरक्षा में योगदान के लिए टैक्स में छूट देने, ऋण अदायगी कि क़िस्तों की समय सीमा बढ़ाने और स्वास्थ्य सहित अन्य विशिष्ट क्षेत्रों को वित्तीय सहारा उपलब्ध कराने से आर्थिक प्रभाव कम किया जा सकता है. 

यूएन एजेंसी के मुताबिक रोज़गार व आय संबंधी मदद के लिए सामाजिक सहायता और मुआवज़े की व्यवस्था का ध्यान रखना होगा.

कई देशों में वित्तीय समर्थन और टैक्स में छूट की शुरुआत की गई है और इसका दायरा छोटे व्यापारियों और प्रभावित कंपनियों के लिए भी बढ़ाया गया है. 

इससे विश्वव्यापी महामारी के दुष्प्रभावों को कम करने और फिर से अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी लेकिन यूएन एजेंसी ने हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने और जल्द से जल्द उपाय करने की अहमियत को भी रेखांकित किया है. 

 

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