कोविड-19: चीन के अनुभव से सीखने होंगे सबक 

17 मार्च 2020

ऐसे समय जब दुनिया के कई देशों, विशेषकर योरोप में, संक्रमितों व मृतकों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, पहले इस बीमारी के केंद्र रहे चीन में कोविड-19 के नए मामलों में गिरावट देखी गई है.  विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यूएन न्यूज़ के साथ एक विशेष बातचीत में कहा है कि वायरस पर क़ाबू पाने में चीन के अनुभव से वे सभी देश सबक सीख सकते हैं जो फ़िलहाल इस विश्वव्यापी महामारी के संकट से जूझ रहे हैं.

चीन में विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि डॉक्टर गॉडेन गेलिया के मुताबिक यह दर्शाता है कि देश में कोविड-19 महामारी रुख़ मोड़ दिया गया है. 

उन्होंने चीन की राजधानी बीजिंग में यूएन न्यूज़ को बताया, “यह एक ऐसी महामारी है जिस पर उस समय नियंत्रण पा लिया गया जब वो बढ़ रही थी और फिर उसे रोक दिया गया. हमारे पास जो आँकड़े हैं उनसे यह पूरी तरह स्पष्ट है और यही आमतौर पर दिखाई दे रहा है.”

डॉक्टर गेलिया ने कहा, “सबसे बड़ा निष्कर्ष यही है कि चीन ने दिखाया है कि महामारी की दिशा को मोड़ा जा सकता है.”

उनके मुताबिक सामान्यतः इस तरह की महामारी के मामलों में पहले बहुत तेज़ी से बढ़ोत्तरी होती है और संक्रमण के मामले एक चरम बिंदु तक पहुंचते हैं, फिर लोगों के संक्रमित होने के बाद संक्रमणों में स्वाभाविक रूप से कमी आने लगती है. लेकिन ऐसा चीन में नहीं हुआ है.

डॉक्टर गेलिया ने कहा कि यह एक महामारी थी जिसे चीन में उस समय रोकने में सफलता मिल गई जब वह बढ़ रही थी. ऑंकड़ों से यह बिल्कुल स्पष्ट है और समाज को परखने से भी यह बात सामने आई है.   

डॉक्टर गेलिया ने चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग से मिले सहयोग की सराहना करते हुए बताया कि जल्द और नियमित रूप से संवाद बने रहने से वायरस की जैनेटिक श्रंखला के बारे में जानकारी प्राप्त करने और टेस्ट किटें तैयार करने के बारे में जानकारी मिली.

 “इसलिए यह एक बड़ा सबक है कि किसी महामारी की स्वाभाविक रफ़्तार से मामले इतने ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएं कि स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने लगें. क़ाबू पाने का यह तरीक़ा एक ऐसा सबक है जिससे अन्य देश सबक सीख सकते हैं और अपने यहां रणनीति में हालात के अनुरूप बदलाव ला सकते हैं. 

एक अन्य अहम सबक राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों का होना है.

डॉक्टर गेलिया ने पहले से तैयारी रखने और सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ सुलभ बनाने की आवश्यकता को रेखांकित किया है.

साथ ही उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि घबराने की ज़रूरत नहीं है और फैलाव को टालने के लिए बताए गए उपायों का पालन करना ज़रूरी है – जैसे हाथों को अच्छी तरह से साबुन से धोना, अपनी खॉंसी या छींक को बॉंह मोड़कर ढक लेना, सामाजिक जीवन में दूरी बरतना और अगर संभव हो तो घर में ही सीमित रहते हुए कामकाज करना.

उन्होंने कहा कि भले ही इन बातों को लोगों ने कई बार सुना हो, लेकिन इन्हें बार-बार दोहराने की ज़रूरत है. यही एक रास्ता है. फ़िलहाल हमारे पास यही ज़रिया है. उस पर अमल कीजिए. 

अंतरराष्ट्रीय एमरजेंसी से विश्वव्यापी महामारी

कोविड-19 उन कोरोनावायरस समूहों का एक नया प्रकार है जिनसे श्वसन तंत्र से संबंधित संक्रमण जैसे MERS या SARS होते हैं.  

विश्व स्वास्थ्य संगठन  31 दिसंबर 2019 से ऐसे मामलों की निगरानी करता रहा है, यही वो समय है जब वूहान में अज्ञात कारणों से न्यूमोनिया के मामले पहली बार सामने आए थे. वूहान मध्य चीन के हुबेई प्रांत का सबसे बड़ा शहर है.

डॉक्टर गेलिया ने बताया कि शुरुआती दिनों में तीन सवालों के जवाब ढूंढना बेहद ज़रूरी था: वायरस किस तरह फैल रहा है, उसकी गंभीरता क्या है और उस पर क़ाबू पाने के क्या उपाय हैं.

पहले तीन हफ़्तों में यूएन एजेंसी ने स्थानीय स्तर पर महामारी की जांच के लिए गठित टीम के साथ मिलकर काम किया.

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के नेटवर्क से भी मदद ली गई, जोखिम दूर करने के लिए संदेश तैयार किए गए और मीडिया व साझीदार संगठनों की मदद से उनका प्रसार किया गया.

डॉक्टर गेलिया और उनकी टीम ने शहर में तालाबंदी से ठीक पहले 20-21 जनवरी को वूहान का दौरा किया. उस समय स्वास्थ्य सेवाओं पर ज़्यादा बोझ नहीं था लेकिन एक महीने बाद जब चीन और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों का एक साझा मिशन वहां पहुंचा तो स्थिति बदल चुकी थी. 

उन्होंने कहा कि वूहान की जनता ने इस तालाबंदी की एक बड़ी क़ीमत चुकाई है और इससे चीन के बाक़ी हिस्सों और शेष दुनिया को तैयारी के लिए समय मिल गया.

“लेकिन उसे रोकने के लिए उठाए गए क़दम प्रभावी थे और उनसे चीन असरदार ढंग से महामारी को फैलने से रोकने के प्रयासों में सफल रहा.”

उन्होंने बताया कि महामारी का आकार और हुबेई से बाहर इन मामलों की कम संख्या ऐसे क़दमों की सफलता व उनके प्रभाव को बयान करती है.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के प्रमुख डॉक्टर टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने अंतरराष्ट्रीय आपात समिति की दो बैठकों के बाद 30 जनवरी को कोविड-19 को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी घोषित कर दिया था.

इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक ‘रिसर्च ब्लूप्रिंट’ तैयार किया और टेस्ट किटें व निजी सुरक्षा सामग्रियाँ अन्य देशों में भेजना शुरू कर दिया.

यूएन एजेंसी ने पिछले सप्ताह कोविड-19 को विश्वव्यापी महामारी के रूप में परिभाषित किया और यह पहली बार है जब किसी कोरोनावायरस की वजह से ‘पैन्डेमिक’ यानी विश्व व्यापी महामारी की घोषणा हुई है.

“जब आप यह देखते हैं कि अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य एमरजेंसी की घोषणा 30 जनवरी को हुई थी और अब हम मध्य-मार्च में बात कर रहे हैं. यह समझना बेहद महत्वपूर्ण है कि ऐसा कोई भी देश जिसने तैयारयों की आवाज़ों को अनसुना किया है, उसे अब तेज़ी से प्रयास करने की ज़रूरत है.”

ऑंकड़े दर्शाते हैं कि चीन में कोविड-19 संक्रमणों की संख्या अब ढलान पर है और वहां इस बीमारी पर क़ाबू पाने के लिए जो सबक सीखे गए हैं, विश्व स्वास्थ्य संगठन उन्हें अन्य देशों के साथ साझा करने की दिशा में अग्रसर है.

 

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