सीरिया: मानवीय त्रासदी व बेइंतेहा तकलीफ़ों को रोकने की पुकार

15 मार्च 2020

सीरिया में मौजूदा गृहयुद्ध व ख़ून-ख़राबा दसवें वर्ष में दाख़िल हो चुका है और इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत ने इंसानों की भीषण तकलीफ़ों की तरफ़ ध्यान खींचते हुए कहा है कि इदलिब में हाल ही में दस लाख से भी ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं और मानवीय त्रासदी और ज़्यादा गहराती जा रही है.

सीरिया के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत गियर पैडरसन ने शनिवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि लगभग एक दशक के भीषण संघर्ष के दौरान सीरियाई लोगों को हुई बेइंतेहा तकलीफ़ों को महसूस कर पाना इंसानी बूते से बाहर है.

“लाखों सीरियाई पुरुषों व महिलाओं की ज़िन्दगी ख़त्म हो गई है. लाखों अन्य बंदी बनाए गए हैं, उन्हें अगवा कर लिया गया है या लापता हैं. मानवाधिकार उल्लंघन, अपराध, तबाही और मुसीबत असाधारण स्तर व पैमाने पर फैली है.”

उन्होंने कहा कि लगभग आधी आबादी को अपने घर छोड़ने पड़े हैं. साथ ही अब सीरियाई लोगों का भाग्य मध्य पूर्व क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रुख़ व कार्रवाई से जुड़ गया है. “संघर्ष की भीषणता व लंबी अवधि कूटनीति की सामूहिक नाकामी का एक सबूत है.”

शांति प्रयासों को समर्थन

गियर पैडरसन का कहना है कि सीरिया के क्रूर गृह युद्ध को ख़त्म करने के लंबे प्रयासों के बावजूद अब भी असाधारण स्तर के कूटनीतिक सहयोग व साहस की दरकार है और सभी पक्षों को सार्थक बातचीत शुरू करने की सख़्त ज़रूरत है.”  

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आहवान करते हुए कहा कि सीरियाई लोगों की मदद के लिए तात्कालिक महत्ता दिखाते हुए एक राजनैतिक समाधान तलाश करने में मदद की जाए, जिसे संयुक्त राष्ट्र का भी समर्थन हासिल है.

WHO Syria
सीरिया के अलेप्पो इलाक़े में हिंसा से बचकर भागे लोगों की मदद के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा चलाए गए छह सचल चिकित्सा केंद्रों में से एक पर लगी भीड़.

गियर पैडरसन ने कहा कि निष्कर्षतः सीरियाई लोगों की तकलीफ़ें असहनीय व इंसानियत को दहला देने वाली हैं और उन्हें तुरंत रोकना होगा. “तमाम सीरियाई लोगों की तकलीफ़ों को दूर करने और उनकी जायज़ उम्मीदों को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आपसी सहयोग करना ही होगा. हमें शांति स्थापित करनी ही होगी.” 

50 लाख बच्चे युद्ध में पैदा

इस बीच संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनीसेफ़ ने सीरियाई गृहयुद्ध के दस वर्ष पूरे होने के मौक़े पर जारी एक वक्तव्य में कहा है कि सीरिया में नौ वर्ष पहले गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से लगभग 48 लाख बच्चे पैदा हुए हैं.

इनके अलावा लगभग दस लाख बच्चे उन सीरियाई परिवारों में पैदा हुए हैं जिन्हें पड़ोसी देशों में पनाह लेनी पड़ी है. 

यूनीसेफ़ की कार्यकारी निदेशक हेनरिएटा फ़ोर ने एक सप्ताह पहले ही सीरिया का दौरा किया. उन्होंने कहा, “सीरिया में युद्ध ने एक और शर्मनाक पड़ाव पूरा किया है."

"अब जबकि सीरियाई युद्ध दसवें वर्ष में प्रविष्ट हो गया है, लाखों बच्चे भी अपने जीवन दूसरा दशक युद्ध, हिंसा, मौत और विस्थापन के माहौल में ही शुरू कर रहे हैं. ऐसे माहौल में हर हाल में शांति स्थापना की ज़रूरत पहले से कहीं ज़्यादा नज़र आ रही है.” 

सीरिया में वर्ष 2014 में आँकड़े इकट्ठा करने शुरू किए गए थे. तब से लेकर वर्ष 2019 के अंत तक:
•    सीरियाई युद्ध में नौ हज़ार से ज़्यादा बच्चे हताहत हुए.

•    लगभग पाँच हज़ार बच्चों को युद्ध में भाग लेने के लिए भर्ती किया गया, उनमें से कुछ की उम्र तो 7 वर्ष थी.
•    लगभग एक हज़ार शैक्षिक व चिकित्सा ठिकानों पर हमले हुए.  

यूनीसेफ़ प्रमुख ने कहा, “ये बहुत ही दुखद है कि पश्चिमोत्तर हिस्सों सहित अनेक हिस्सों में हिंसा व संघर्ष अब भी जारी है जिसका बच्चों पर बहुत गंभीर असर पड़ रहा है. हालाँकि कुछ अन्य इलाकों में बच्चे अपने खोए हुए बचपन को फिर सहेजने की कोशिश कर रहे हैं, और अपनी ज़िन्दगी को आहिस्ता-आहिस्ता पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.”

विशेष दूत गियर पैडरसन ने भी सीरिया दौरे में यूनीसेफ़ प्रमुख हेनरिएट फ़ोर के साथ थे. गियर पैडरसन ने कहा, “ये स्पष्ट नज़र आता है कि नौ वर्षों के हिंसक व क्रूर युद्ध ने देश को तबाही के कगार पर ला खड़ा किया है."

"बहुत से परिवारों ने बताया कि बहुत से मामलों में तो उनके पास अपने बच्चों को कामकाज के लिए भेजने व लड़कियों की कम उम्र में ही शादी कर देने के सिवाय कोई रास्ता ही नहीं था. किसी भी माता-पिता को इस तरह के निर्णय करने के लिए मजबूर होने की नौबत नहीं आनी चाहिए.”

सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े में भीषण सर्दी और तापमान में भारी गिरावट के मौसम में सशस्त्र संघर्ष में आई तेज़ी ने वहाँ पहले से मौजूद मानवीय त्रासदी को और ज़्यादा भीषण बना दिया है जिससे भारी तबाही हो रही है.

© UNICEF/Ali Haj Suleiman
सीरिया के पश्चिमोत्तर इलाक़े इदलिब में फ़रवरी 2020 में हुए एक हमले में ध्वस्त एक स्कूल. बड़ी संख्या में स्कूल व चिकित्सा सुविधाएँ तबाह हुए हैं.

1 दिसंबर 2019 से लगभग 9 लाक 60 हज़ार लोग विस्थापित हुए हैं जिनमें लगभग 5 लाख 75 हज़ार बच्चे हैं.

सीरिया के पूर्वोत्तर इलाक़े में 60 से ज़्यादा देशों से संबंध रखने वाले लगभग 28 हज़ार बच्चे विस्थापन शिविरों में रहने को मजबूर हैं.

ये बच्चे संभवतः पूर्व चरमपंथी लड़ाकों की संतानें हैं. उन्हें इन बच्चों को बुनियादी सुविधाएँ भी हासिल नहीं हैं. जनवरी 2020 तक केवल 765 बच्चे उनके मूल देशों को भेजे जा सके हैं. 

तकलीफ़ों की कहानी बयाँ करते आँकड़े

यूनीसेफ़ द्वारा जारी ताज़ा आँकड़े सीरिया में जारी बाल व स्वास्थ्य सेवाओं का संकट बयान करते हैं.
•    पाँच से दो स्कूल काम नहीं कर रहे हैं क्योंकि या तो वो ध्वस्त, क्षतिग्रस्त हैं या वहां विस्थापित परिवारों को ठहराया गया है या फिर उनका इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए हो रहा है.
•    आधे से ज़्यादा स्वास्थ्य सुविधाएँ काम नहीं कर रही हैं.
•    सीरिया के भीतर व पड़ोसी देशों में 28 लाख से ज़्यादा सीरियाई बच्चे स्कूली शिक्षा से वंचित हैं.
•    शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग दो तिहाई बच्चों को ऐसी विशिष्ट सेवाओं की ज़रूरत है जो उनके इलाकों में उपलब्ध ही नहीं हैं.
•    युद्ध शुरू होने के बाद से बुनियादी चीज़ों की क़ीमतें 20 गुना तक बढ़ गई हैं.
यूनीसेफ़ प्रमुख हेनरिएटा फ़ोर ने कहा, “युद्धरत पक्ष और उन्हें समर्थन देने वाले पक्ष सीरिया में ये ख़ून-ख़राबा रोकने में नाकाम रहे हैं. हमारा संदेश स्पष्ट है: बच्चों की हत्याएं करना और उन्हें विकलांग बनाना बंद करें, स्कूलों और अस्पतालों पर हमले करना बंद करें, हमें ज़रूरत वाले इलाक़ों में पहुँचने की सुविधा दें, बड़ी संख्या में बच्चों ने बहुत लंबे समय से भारी मुसीबतें झेली हैं.”

यूनीसेफ़ व अन्य की मदद

यूनीसेफ़ ने सीरियाई बच्चों की मदद के लिए अनेक साझीदारों के साथ मिलकर व्यापक काम किया है. 
•    लगभग साढ़े सात लाख बच्चों को खसरा व अन्य बीमारियों से बचाने वाले टीके लगाए हैं.
•    दस लाख से ज़्यादा बच्चों को मनो-सामाजिक सहायता मुहैया कराई गई है.
•    लगभग 30 लाख बच्चों को औपचारिक व अनौपचारिक शिक्षा उपलब्ध कराई गई है.
•    जल आपूर्ति सुविधाओं में बेहतरी लाकर 53 लाख से ज़्यादा लोगों को स्वच्छ जल मुहैया कराया गया है.

यूनीसेफ़ का कहना है कि सीरियाई लोगों के लिए ये जीवनरक्षक कार्यक्रम जारी रखने के लिए लगभग 68 करोड़ 30 डॉलर की रक़म की ज़रूरत है मगर धन की भारी कमी है.

यूनीसेफ़ के आपदा कार्यक्रमों के निदेशक टैड चायबन का कहना है, “सीरिया संकट का एक मात्र समाधान कूटनीतिक तरीक़ों से हो सकता है. मानवीय सहायता पहुँचाने भर से युद्ध समाप्त नहीं होगा लेकिन इससे बच्चों को जीवित रखने में मदद मिल सकती है.”

“मध्य पूर्व क्षेत्र और विश्व भर में अनेक संकट जारी रहने के बीच हम सीरिया में बच्चों की मदद करने के अपने प्रयास जारी रखने के लिए दानदाताओं की दरियादिली से उम्मीद लगाए हुए हैं.”

 

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