कोरोनावायरस: स्वास्थ्यकर्मियों के लिए निजी बचाव सामग्री की क़िल्लत

3 मार्च 2020

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी है कि स्वास्थकर्मियों के लिए निजी बचाव सामग्री व उपकरणों की वैश्विक आपूर्ति में लगातार बढ़ते गंभीर व्यवधान के कारण कोरोनावायरस  (कोविड-19) और अन्य संक्रामक बीमारियों से ख़तरा बढ़ रहा है. बढ़ती मांग और भय के कारण तेज़ी से ख़रीदारी, जमाखोरी और ग़लत इस्तेमाल के कारण बचाव उपकरणों की भारी कमी हो रही है.

ध्यान रहे कि संक्रमित मरीज़ों की देखभाल में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों को अपने बचाव के लिए फ़ेस मास्क, दस्तानों, गाउन, एप्रन सहित अन्य निजी बचाव सामग्री पर निर्भर रहना पड़ता है.

स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया, “सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के अभाव में विश्व भर में स्वास्थकर्मियों को जोखिम होना वास्तविक है. सरकारों व उद्योग जगत को आपूर्ति बढ़ाने के लिए जल्द कार्रवाई करनी होगी, निर्यात पर लगी पाबंदी हटानी होगी और क़यासबाज़ी व जमाखोरी रोकने के लिए उचित क़दम उठाने होंगे. स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना हम कोविड-19 को नहीं रोक सकते.”

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के मुताबिक वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए उत्पादन में 40 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी करनी होगी.

जब से कोविड-19 महामारी तेज़ी से दुनिया में फैली है, क़ीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हुई है. सर्जिकल मास्क के दामों में छह गुना, N-95 श्वसन यंत्र की क़ीमतों में तीन गुना और गाउन के दामों में दो गुना बढ़ोत्तरी हुई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन अब तक पांच लाख से ज़्यादा बचाव किट 47 देशों में भेज चुका है.

यूएन एजेंसी के अनुमान के अनुसार कोविड-19 से निपटने के लिए हर महीने आठ करोड़ 90 लाख मेडिकल मास्क की ज़रूरत होगी, जबकि जांच के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तानों की अनुमानित संख्या सात करोड़ 60 लाख आंकी गई है.

कोविड-19 अपडेट

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक ने मंगलवार को बताया कि विश्व भर में कोरोनावायरस के संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 90 हज़ार 893 हो गई है और अब तक तीन हज़ार 110 लोगों की मौत हुई है.

चीन में पिछले 24 घंटों में संक्रमण के 129 मामले सामने आए हैं जो 20 जनवरी के बाद सबसे कम आंकड़ा है. चीन के बाहर 48 देशों में एक हज़ार 848 नए मामलों का पता चला है जिनमें 80 फ़ीसदी से ज़्यादा मामलों की पुष्टि कोरिया गणराज्य, ईरान और इटली में हुई है.

12 देशों में पहली बार कोविड-19 के मामले सामने आए हैं और 21 देशों में एक-एक मामला है. 122 देशों में अभी तक इसके संक्रमण के एक भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है.

स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने बताया कि अभी तक का अनुभव दर्शाता है कि कोविड-19, इन्फ़्लुएंज़ा जैसी तेज़ी से नहीं फैलता है.

दूसरा अंतर यह है कि मौसमी इन्फ़्लुएंज़ा की तुलना में कोविड-19 से तबीयत ज़्यादा ख़राब होती है और अभी शरीर में इससे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता भी विकसित नहीं हो पाई है.

कोविड-19 वायरस से संक्रमित अब तक औसतन 3.4 फ़ीसदी मरीज़ों की मौत हुई है जबकि मौसमी फ़्लू से आम तौर पर एक प्रतिशत से भी कम मरीज़ों की जान जाती है.

उन्होंने बताया कि कोरोनावायरस से निपटने के लिए अभी कोई वैक्सीन या उपचार उपलब्ध नहीं है लेकिन इस दिशा में प्रयास चल रहे हैं, दवाइयों का परीक्षण हो रहा है और 20 से ज़्यादा वैक्सीनों पर काम चल रहा है.

 

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