कोरोनावायरस को 'वैश्विक संकट में तब्दील होने से रोकना अब भी संभव'

18 फ़रवरी 2020

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने चीन सहित दुनिया के अन्य देशों में कोरोनावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के मद्देनज़र कहा है कि इस वायरस को वैश्विक संकट बनने से अब भी रोका जा सकता है.  यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के महानिदेशक टैड्रोस एडहेनॉम घेबरेयेसस ने बताया कि जिनीवा समय के मुताबिक मंगलवार सुबह 6 बजे तक चीन में 72 हज़ार 528 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और एक हज़ार 870 लोगों की मौत हुई है.

पिछले 24 घंटों में चीन में एक हज़ार 891 नए मामलों का पता चला है जिनकी पुष्टि लैब और क्लीनिक में हुई है.

यूएन एजेंसी के प्रमुख ने भरोसा दिलाया है कि इस वायरस को अब भी व्यापक वैश्विक संकट में बदलने से रोका जा सकता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन इसी इरादे के साथ दिन-रात काम में जुटा है और सभी देशों को तैयारी में मदद कर रहा है.

COVID-19 का पहला मामला दिसंबर 2019 में चीन के वूहान शहर में सामने आया था जो इस वायरस का केंद्र माना गया है.

कोरोनावायरस के संक्रमण के चीन से बाहर 25 देशों में 804 मामले सामने आए हैं और तीन लोगों की मौत हुई है.

पिछले 24 घंटों में 110 नए मामलों का पता चला है जिनमें से 99 संक्रमण डायमंड प्रिंसेस क्रूज़ जहाज़ से हैं जिस पर हज़ारों लोग फंसे हैं. उन्हें जापान के बंदरगाह शहर योकोहामा में अनिवार्य अवधि के लिए अलग रखा गया है.

एक महीने से भी ज़्यादा समय से यूएन स्वास्थ्य एजेंसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों को वायरस के बारे में समझ विकसित करने में मदद मुहैया करा रही है.

एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक संक्रमण फैलने के अब तक 12 देशों में 92 मामले सामने आए हैं.

 विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा, “फ़िलहाल बीमारी की गंभीरता या मामलों की घातकता की दर पर अर्थपूर्ण तुलना करने के लिए हमारे पास चीन से बाहर पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं ”

लेकिन इस संबंध में ज़्यादा जानकारी जुटाने के लिए हर मामले, उपचार और उसके नतीजे के लिए अन्य देशों से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं.

सतर्कता ज़रूरी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने कहा है कि सिंगापुर द्वारा उठाए गए क़दमों से वह बेहद प्रभावित हैं.

सिंगापुर में वायरस के हर मामले का पता लगाने के लिए व्यापक स्तर पर प्रयास हो रहे हैं, और जिन मामलों की पुष्टि हुई है उनके संपर्क में आए लोगों की भी निगरानी हो रही है ताकि संक्रमण आगे फैलने से रोका जा सके.

“सिंगापुर कोई क़सर नहीं छोड़ रहा है, इन्फ़्लुएंजा और न्यूमोनिया जैसी बीमारी के हर मामले का परीक्षण किया जा रहा है.”

वायरस के पहुंचने से पहले तैयारी को अहम बताया गया है ताकि मरीज़ों का इलाज गरिमा और हमदर्दी के साथ किया जा सके, स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा हो सके और वायरस के संचारण की रोकथाम हो सके.

यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के सहयोग से कई देश कोरोनावायरस के ख़तरे से निपटने के लिए ख़ुद को तैयार कर रहे हैं.

“हमने निजी रक्षा उपकरणों की आपूर्ति 21 देशों के लिए की है और आने वाले हफ़्तों में 106 अन्य देशों के लिए भी करेंगे.”

बताया गया है कि इस सप्ताह के अंत तक, अफ़्रीका में 40 देशों और अमेरिकी महाद्वीप के 29 देशों के पास COVID-19 के परीक्षण की क्षमता तैयार हो जाएगी.

इनमें से कई देश अपने नमूने परीक्षण के लिए अन्य देशों में भेज रहे थे और नतीजों के लिए उन्हें कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ रहा था. लेकिन अब परीक्षण के नतीजे उन्हें 24 से 48 घंटों में मिल जाएंगे.

इस बीच, कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य सहित अफ़्रीका के कुछ देश ईबोला वायरस से निपटने के लिए तैयार की गई अपनी क्षमता का इस्तेमाल COVID-19 वायरस का मुक़ाबला करने के लिए की जा रही तैयारी में कर रहे हैं.

यूएन एजेंसी प्रमुख ने बताया, “स्वास्थ्य प्रणाली में निवेश के ज़रिए स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उठाने का यह एक बेहतरीन उदाहरण है.”

नामीबिया, नाइजीरिया और तिमोर-लेस्ते जैसे अन्य देशों में मीडिया के लिए वर्कशॉप आयोजित की गई हैं ताकि सटीक और विश्वसनीय रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा सके.

साथ ही, बांग्लादेश, कंबोडिया, इथियोपिया, पाकिस्तान, सर्बिया और दक्षिण सूडान सहित अनेक देशों ने प्रभावी ढंग से  चौकसी बरतने और हालात की निगरानी करने को अपनी प्राथमिकता बनाया है.

उन्होंने कहा कि वे अपने साझेदार संगठनों के साथ बेहद नाज़ुक हालात वाले देशों – सीरिया से मध्य अफ़्रीका गणराज्य तक – में भी देशों को इस वायरस की चुनौती से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं.

 

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