पाकिस्तान यात्रा पर यूएन प्रमुख का धार्मिक समरसता व सहिष्णुता का संदेश

18 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पाकिस्तान में बादशाही मस्जिद, सिखों के धार्मिक स्थल गुरुद्वारा दरबार साहिब और करतारपुर कॉरिडोर (गलियारे) की यात्रा को एक भावुक लम्हा बताते हुए कहा है कि आस्थाओं के बीच संवाद होते देखना अदभुत है. उन्होंने भारत-पाकिस्तान की सीमा से होकर गुज़रने वाले करतारपुर कॉरिडोर को ‘आशा का गलियारा’ क़रार दिया है जिसके ज़रिए भारतीय श्रृद्धालु अपने पवित्र तीर्थस्थल के दर्शन कर सकते हैं.

करतारपुर में मीडिया से बात करते हुए महासचिव ने कहा, “इस पवित्र स्थल पर सिखों, मुसलमानों, ईसाइयों, और शायद हिंदुओं को भी, शांतिपूर्वक ढंग से समरसता के साथ उपासना करते देखना अदभुत है.”

यूएन महासचिव ने अपनी तीन दिवसीय पाकिस्तान यात्रा के दौरान जलवायु कार्रवाई का आहवान किया, अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए पाकिस्तानी हमदर्दी और यूएन शांतिरक्षा अभियानों में देश के योगदान की सराहना की है.

करतारपुर शहर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के किनारे स्थित है. माना जाता है कि इस शहर को सिख धर्म के पहले धार्मिक नेता - गुरू नानक ने सन् 1504 में बसाया था और यहीं उन्होंने सिख संप्रदाय की स्थापना की. इस शहर का शाब्दिक अर्थ “ईश्वर का स्थल” है.

शांति का कॉरिडोर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भारतीय सिख श्रृद्धालुओं के लिए वीज़ा-रहित यात्रा को संभव बनाने के लिए सितंबर 2018 में करतारपुर कॉरिडोर को बनाने की घोषणा की थी.

प्रधानमंत्री ख़ान ने “शांति के कॉरिडोर” का उदघाटन नवबंर 2019 में गुरू नानक देव की 550वीं जयंती के अवसर पर किया था.

यह कॉरिडोर पाकिस्तान में गुरुद्वारा करतारपुर साहिब को सीमा पार भारत के डेरा बाबा नानक धार्मिक स्थल से जोड़ता है.

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने पाकिस्तान में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “जब हम दुनिया के इतने हिस्सों में धर्म के नाम पर लड़ाई होते देखते हैं, तो यह कहना ज़रूरी हो जाता है कि धर्म शांति के लिए जोड़ता है और इसका सर्वश्रेष्ठ प्रतीक यह पवित्र स्थल (गुरुद्वारा करतारपुर साहिब) है.”

उन्होंने कहा कि यह एक उदाहरण है जो लोगों को एक दूसरे को गरिमा के साथ बर्ताव करने, आपसी मतभेदों को स्वीकार करने और यह समझने में मदद करता है कि विविधता एक ख़तरा नहीं बल्कि आशीष है.

पोलियो उन्मूलन अभियान

इससे पहले, उन्होंने लाहौर शहर में छोटे बच्चों के एक स्कूल का दौरा किया और पोलियो उन्मूलन के काम में जुटे स्वास्थ्यकर्मियों से मुलाक़ात की, जो पोलियो के ख़िलाफ़ एक राष्ट्रव्यापी मुहिम में हिस्सा ले रहे हैं.

महासचिव ने तीन बच्चों को पोलियो की वैक्सीन भी पिलाई.

पाकिस्तान में तीन करोड़ 90 लाख से ज़्यादा बच्चों को फ़रवरी महीने की मुहिम में पोलियो वैक्सीन दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है.

यूएन प्रमुख ने देश में पोलियो उन्मूलन मुहिम पर कहा, “पोलियो उन चंद बीमारियों में से एक है जिन्हें अगले कुछ सालों में हम जड़ से हटा सकते हैं. यह संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकता है और मुझे बेहद ख़ुशी है कि यह पाकिस्तान सरकार की भी स्पष्ट रूप से प्राथमिकता है.”

अपने एक ट्वीट संदेश में उन्होंने लिखा, “महत्वपूर्ण प्रगति संभव हुई है लेकिन इस ख़राब बीमारी से पूरी तरह छुटकारा पाने के लिए हमें संगठित प्रयास की ज़रूरत है.”

उन्होंने धार्मिक व सामुदायिक नेताओं सहित सभी के नाम एक अपील जारी करके पोलियो उन्मूलन के काम में पाकिस्तान सरकार को पूरी मदद मुहैया कराने की बात कही है.

पाकिस्तान पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में दो लाख 65 हज़ार से ज़्यादा स्वास्थ्यकर्मी अग्रिम मोर्चे पर काम कर रहे हैं जो घर-घर जाकर हर बच्चे को वैक्सीन देने में जुटे हैं. इनमें 62 फ़ीसदी से ज़्यादा महिला स्वास्थ्यकर्मी हैं.

वर्ष 2019 में पाकिस्तान में पोलियो के मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है और जंगली पोलियो वायरस के मामले 2018 में 12 से बढ़कर 2019 में 144 हो गए.

वर्ष 2020 में अब तक 17 मामलों का पता चला है.

यूएन महासचिव ने लाहौर यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैनेजमेंट सायंसेज़ में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र अपनी स्थापना के 75 साल पूरे कर रहा है, और इस अवसर पर वह युवाओं को सुनना चाहते हैं.

उन्होंने इच्छा जताई कि नीतियाँ तैयार करने और लागू करते समय युवाओं की राय भी शामिल की जानी चाहिए.

 

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