शरणार्थियों के लिए 'पाकिस्तानी हमदर्दी का अनुकरण करे दुनिया'

17 फ़रवरी 2020

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि अफ़ग़ान शरणार्थियों को शरण देने के लिए पाकिस्तानी एकजुटता और करुणा बाक़ी दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. उन्होंने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में सोमवार को शरणार्थियों के मुद्दे पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापना के लिए नए सिरे से प्रयासों को मज़बूती देने की बात भी कही.

यूएन प्रमुख ने कहा, “अफ़ग़ानिस्तान के लोगों के लिए समाधान पर काम करना महज़ एकजुटता का संकेत नहीं है, यह दुनिया के सर्वोत्तम हित में है.”

संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने पाकिस्तान सरकार के साथ इस शरणार्थी सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें यूएन एजेंसी प्रमुख फ़िलिपो ग्रैन्डी ने भी हिस्सा लिया.

शरणार्थी एजेंसी के उच्चायुक्त फ़िलिपो ग्रैन्डी ने इस सम्मेलन में कहा, “पाकिस्तान और ईरान ने भारी पीड़ा, फिर से शुरू हुई हिंसा और अनिश्चितता के दौर में अफ़ग़ानिस्तान के शरणार्थियों का साथ दिया है.”

यूएन शरणार्थी एजेंसी के प्रमुख फ़िलिपो ग्रैन्डी ने बताया कि दुनिया में कुल अफ़ग़ान शरणार्थियों का 90 फ़ीसदी पाकिस्तान और ईरान में रहते हैं.

संयुक्त राष्ट्र के दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने शरणार्थियों के लिए एकजुटता व करुणा, मेज़बान देशों की जनता के लिए एकजुटता, अफ़ग़ानिस्तान के आम लोगों के साहस और सहन-क्षमता का ज़िक्र किया.

यूएन प्रमुख ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के साथ एक प्रेस वार्ता में कहा कि पाकिस्तान ने अफ़ग़ान शरणार्थियों को मदद मुहैया कराई है और अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा यह ज़िम्मेदारी निभाने और अर्थपूर्ण ढंग से पाकिस्तान का समर्थन करने का समय है.

महासचिव ने बताया कि पाकिस्तान पिछले 40 वर्षों से अफ़ग़ान शरणार्थियों को शरण देता रहा है और वर्ष 1979 से सबसे ज़्यादा संख्या में शरणार्थियों को अपने यहाँ रखने वाले मेज़बान देशों में शामिल है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी चुनौतियों के बावजूद शरणार्थी संरक्षण के लिए अभिनव टैक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है और अब उन तरीक़ों को विश्व में प्रतिमान के रूप में देखा जाता है.

इस टैक्नोलॉजी इस्तेमाल में बायोमैट्रिक पंजीकरण, राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली की सुलभता, स्वास्थ्य देखभाल और अर्थव्यवस्था में समावेशन शामिल है.

अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए मदद सुनिश्चित करने और राहत व विकास परियोजनाओं के लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र से भी समर्थन मिला है.

UN Photo Mark Garten
महासचिव एंतोनियो गुटेरेश पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शरणार्थियों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कुछ युवाओं से बात करते हुए.

अफ़ग़ानिस्तान के लिए चुनौतीपूर्ण सफ़र

महासचिव ने स्वीकार किया कि अफ़ग़ानिस्तान में हालात गंभीर हैं और हिंसक संघर्ष लंबे समय से खिंच रहा है. स्थानीय लोगों पर हिंसा, ग़रीबी और जबरन विस्थापन का भारी प्रभाव पड़ा है.

पिछले एक साल में ही 4 लाख से ज़्यादा लोगों को घरेलू विस्थापन का शिकार होना पड़ा जिसकी वजह हिंसा, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाएं थी. स्वैच्छिक रूप से घर लौटने के प्रयासों के तहत महज़ आठ हज़ार शरणार्थी ही देश वापिस लौटे हैं.  

यूएन महासचिव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शरणार्थियों के लिए टिकाऊ समाधान सुरक्षा व गरिमा के साथ उनका स्वैच्छिक रूप से अपने मूल देश वापिस लौटना है. और यही बात अफ़ग़ान शरणार्थियो के लिए भी सच है.

“अफ़ग़ान लोगों के लिए समाधान के प्रयास महज़ एकजुटता का ही संकेत नहीं है, इसी में दुनिया का सर्वोत्तम हित है.”

वहीं फ़िलिपो ग्रैन्डी ने कहा कि समाधान की तलाश करना अफ़ग़ानिस्तान में शांति प्रक्रिया में फिर प्राण फूंकने के नज़रिए से भी अहम है. “अफ़ग़ान विस्थापन का शांति के ज़रिए हल निकाला किया जा सकता है और जबरन विस्थापन के निपटारे से शांति को भी मज़बूती मिलेगी.”

“जैसाकि हम दोनों ने कहा, अफ़ग़ानिस्तान वापस लौटने वाले लोगों की संख्या में ऐतिहासिक कमी आई है. अफ़ग़ानिस्तान व वहां के लोगों को ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता. यह समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कार्रवाई करने और खरा उतरने का है.”

“वापसी और पुन: एकीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में हो रहे हमारे प्रयास अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रीय शांति एवं विकास फ़्रेमवर्क के अनुरूप हैं.”

यूएन प्रमुख ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र एक क्षेत्रीय समर्थन प्लैटफ़ॉर्म पर काम कर रहा है जिससे स्वैच्छिक रूप से वतन वापसी के लिए सहारा मिलेगा और अफ़ग़ान शरणार्थियों को लौटकर समाज में फिर से बसने और घुलने-मिलने का अवसर मिलेगा. साथ ही पाकिस्तान व ईरान में मेज़बान समुदायों व शरणार्थियों को मदद मुहैया कराई जाएगी.

उन्होंने कहा कि शांति प्रयासों से ही अंतर-अफ़ग़ान वार्ता का रास्ता निकलेगा लेकिन टिकाऊ शांति और सुरक्षा के लिए मानवीय सहायता, विकास और शांति की कोशिशों को बेहतर ढंग से एकीकृत किए जाने की आवश्यकता है.

“अगर इसे सही ढंग से किया जाए तो बाक़ी दुनिया के लिए यह काम एक मिसाल के तौर पर स्थापित हो सकता है.”

UN Photo/Mark Garten
पाकिस्तान ने यूएन शांतिरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य में पाकिस्तानी महिला शांतिरक्षकों का एक दल तैनात है.

यूएन महासचिव ने यथार्थवादी दृष्टिकोण को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि आने वाला समय अपने साथ अनेक चुनौतियाँ लाएगा.

इस सम्मेलन का संदेश एकजुटता के लिए नई साझेदारी के प्रति आशा और संकल्प का भाव है और विश्व भर से इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी उसी को प्रकट करती है.

इससे अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्तान व दुनिया में लोगों के लिए एक बेहतर भविष्य का रास्ता सुनिश्चित होगा.

ए4पी को मज़बूती

महासचिव ने सोमवार को ‘सेन्टर फ़ॉर इंटरनेशनल पीस एंड स्टेबिलिटी’ में 150 पाकिस्तानी शांतिरक्षकों को श्रृद्धांजलि दी जिन्होंने नाज़ुक हालात में फंसे लोगों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.

यह सेन्टर इस्लामाबाद में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ सायंसेज़ एंड टैक्नोलॉजी का हिस्सा है जो शांतिरक्षा प्रयासों के लिए दुनिया के सबसे अहम संस्थानों में एक है.

यूएन के ऑंकड़ों के अनुसार शांतिरक्षा के क्षेत्र में योगदान (सैनिक व पुलिस) के लिए पाकिस्तान दुनिया में छठे स्थान पर आता है.

पाकिस्तान के चार हज़ार से ज़्यादा वर्दीधारी लोग संयुक्त राष्ट्र के 9 शांति अभियानों में हिस्सा ले रहे हैं. इनमें मध्य अफ़्रीकी गणराज्य और माली में यूएन मिशन भी शामिल हैं जिन्हें सबसे ज़्यादा जोखिम भरे मिशनों के रूप में देखा जाता है.

पाकिस्तान ने कॉंगो लोकतांत्रिक गणराज्य के दक्षिण किवू में महिला शांतिरक्षकों का एक दल भी तैनात किया है. इस टीम ने रोज़गार के लिए प्रशिक्षण, चिकित्सा देखभाल और मनोवैज्ञानिक देखरेख के अलावा सूचना जुटाने के काम में भी अहम भूमिका निभाई है.

 

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